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जनेऊधारी हिन्दू कौन होते हैं

इस पृष्ठ का किसी भी धार्मिक विश्वास या धार्मिक टिप्पणी से कोई सबंध नही है यह पृष्ठ करेंट अफेयर्स में हमसे लगातार पूछे जा रहे प्रश्नों में से चुने गए एक प्रश्न का उत्तर देने के लिए बनाया गया है जो कि जनेऊधारी हिन्दू के बारे में सम्पूर्ण व स्पष्ट जानकारी देने हेतु प्रतिबद्ध है:

हिन्दू धर्म का अनुसरण करने वालों में से वो अनुसरणी जो जनेऊ को धारण करते है वोही जनेऊधारी हिन्दू होते हैं यह प्रश्न से ही पता चलता है अब प्रश्न ये उठता है कि जनेऊ क्या होता है। आइए इसे जानते हैं: जनेऊ हिन्दू धर्म में मान्य सौलह संस्कारों में से एक संस्कार है। जो सफेद रंग के धागों का एक समूह होता है व सूत से बना होता है। 16 अंगुल की लंबाई वाले पवित्र धागे को तभी धारण किया जा सकता है जब धारण करने वाला मन से इसके नियमों का पालन करने के लिए तैयार हो।

जैसा कि बताया गया है सूत से बना जनेऊ एक मात्र धागा न होकर धागों का समूह होता है तथा इसमें तीन सूत्र होते हैं व प्रत्येक सूत्र में तीन धागे होते हैं इस प्रकार जनेऊ कुल नौ धागों से मिलकर बना होता है। जो त्रिमूर्ति, गायत्री मंत्र के तीन चरण, तीन आश्रम इत्यादि अनेकों प्रतीकों को अलग अलग दर्शातें हैं। जनेऊ व इसके पवित्र प्रतीकों का सम्पूर्ण ज्ञान इसे धारण करने से पूर्व दिया जाता है।

पवित्र जनेऊ को को बाएं कंधे के ऊपर तथा दायीं ओर बाजू के नीचे पहना जाता है। व कुछ स्थितियों में दाहिने कान पर बांधा जाने का नियम है। जो हिन्दू जनेऊ धारण कर इसकी पवित्रता को बनाए रखने का वचन लेते हैं उन्हें ही जनेऊधारी हिन्दू कहा जाता है।
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