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अशोक के शिलालेखों की भाषा क्या है

अशोक के शिलालेख प्राकृत भाषा में लिखे गए हैं तथा इनकी लिपि ब्राह्मी व खरोष्टि है। मध्यकालीन भाषाओं को सयुंक्त रूप से प्राकृत भाषा कहा जाता है। जिसमें से मगधी भाषा अधिक्तर शिलालेखों की मुख्य भाषा है तथा ब्राह्मी लिपि के प्रयोग से लिखी गई है। सम्राट अशोक ने इन शिलालेखों का निर्माण बौद्ध धर्म से प्रभावित होकर व मानवता कल्याण के आदर्शों का अनुसरण करने के लिए लोगों को प्रेरित करने हेतु करवाया था। शिलालेख उन पत्थरों को कहा जाता है जिन पर कोई लेख खुदवाया गया हो। 232 ईसा वर्ष पूर्व से भी पहले के ये शिलालेख आज से 2300 वर्ष पूर्व खुदवाए गए थे। क्योंकि ये पत्थर पर छपे थे इस कारण आज तक सुरक्षित हैं तथा बौद्ध धर्म के प्रचीनतम प्रमाण के तौर पर जाने जाते हैं। आज भी अशोक के शिलालेख इतिहास की एक स्पष्ट तस्वीर उकेरते हैं जबकि कागज़ व पत्तों पर लिखित रचनाएँ समय के साथ नष्ट हो चुकी हैं। ये अभिलेख भारत के साथ साथ नेपाल, अफगानिस्तान, पाकिस्तान तथा बांग्लादेश से प्राप्त हुए हैं। अशोक के शिलालेखों से सबंधित अन्य सामान्य ज्ञान प्रश्न निम्न हैं।

किस शिलालेख में कलिंग युद्ध के पश्चात सम्राट अशोक के हृदय परिवर्तन के बारे में बताया गया है?
शिलालेख संख्या 13 में।

सारनाथ का अशोक स्तंभ जहाँ से भारतीय तिरंगे का अशोक चक्र लिया गया है भारत के किस राज्य में स्थित है?
वाराणसी, उत्तर प्रदेश

क्या अशोक के सभी अभिलेख कलिंग युद्ध के बाद लिखवाए गए हैं?
हाँ... कलिंग युद्ध के पश्चात भारी तबाही देख कर राजा अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ तथा उन्हीने मानव कल्याण से सबंधित शिलालेखों का निर्माण करवाया।

शिलालेखों में अशोक को किस नाम से संबोधित किया गया है।
देवनांप्रिय प्रियदर्शी राजा (अर्थात देवों के प्रिय व सब पर कृपा दृष्टि रखने वाले राजा)

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