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भारत के दूसरे राष्ट्रपति कौन थे

भारत के एक महान अध्यापक के रूप में जाने गए डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भारत का दूसरा राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त हुआ। उन्होंने राष्ट्रपति पदभार 14 मई 1962 को संभाला तथा अपना 5 वर्ष का सफल कार्यकाल पूर्ण कर 13 मई 1967 को इस पद से निवृत हुए। उन्होंने अपने कार्यकाल में दो प्रधानमंत्रियों की मृत्यु तथा चीन की ओर से हमला करने जैसी कठिनाइयों का सामना किया जिनसे भारत को बड़ी हानि हुई। परन्तु इस कठिनाई भरे समय में भी डॉ. राधाकृष्णन ने अपनी सूझबूझ से शासन व्यवस्था को बनाए रखा।

डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन को किस दिवस के रूप में मनाया जाता है?
डॉ. राधकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को मनाया जाता है तथा इस दिन उन अध्यापकों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कोई उपलब्धि हासिल की हो।

डॉ. राधाकृष्णन भारत के किस राज्य से सबंध रखते थे?
डॉ. राधाकृष्णन का जन्म ब्रिटिश राज में मद्रास प्रेसीडेंसी के तिरुत्तनी में हुआ था वर्तमान में यह क्षेत्र तमिलनाडु का हिस्सा है।

डॉ. राधाकृष्णन के नाम के साथ सर्वपल्ली कैसे जुड़ा?
डॉ. राधाकृष्णन के पूर्वज सर्वपल्ली गाँव से आए थे इसी कारण उनका यह पारिवारिक नाम उनके नाम के साथ जुड़ गया। वर्तमान में सर्वपल्ली गाँव आंध्र प्रदेश के नेल्लौर जिले में है।

डॉ. राधाकृष्णन किस क्षेत्र में अध्यापन का कार्य करते थे?
डॉ. राधाकृष्णन दर्शन शास्त्र में अध्यापन का कार्य करते थे। दर्शन शास्त्र को अंग्रेजी में फिलॉसफी नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्र में मानव चिंतन व पकृति के सिद्धांतों को बनाए जाने के कारणों के बारे में ज्ञान अर्जित किया जाता है। इसमें व्यक्ति स्वयं आत्म चिंतन कर परम् सत्य की खोज के लिए प्रयत्न करता है।

डॉ. राधाकृष्णन द्वारा कौन कौन सी पुस्तकें लिखी गई हैं?
डॉ. राधाकृष्णन हिन्दू फिलॉसफी से सबंधित पुस्तकें लिखने के लिए जाने जाते हैं। उनकी मुख्य पुस्तकों में 1929 में लिखी गई पुस्तक "एन आइडियलिस्ट व्यू ऑफ लाइफ" 1953 में लिखी "द प्रिंसिपल उपनिषद" तथा 1957 में लिखी "अ सोर्स बुक इन इंडियन फिलॉसफी" आदि हैं। हालांकि वे हिन्दू फिलॉसफी के करीब थे परन्तु हिन्दी में लिखने की बजाए उन्होंने इंग्लिश को अपनी पुस्तकों की भाषा के रूप में चुना। इसका उद्देश्य पश्चिमी लोगों व भारत के आधुनिक युवा को हिन्दू फिलॉसफी सरलता से समझाना था।

डॉ. राधाकृष्णन के कार्यकाल में किन दो प्रधानमंत्रियों की मृत्यु हुई थी?
डॉ. राधाकृष्णन के राष्ट्रपति रहते हुए दो प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू तथा लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हुई। दोनों प्रधानमंत्रियों की मृत्यु का कारण हृदयघात (हार्ट अटैक) था। जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु 27 मई 1964 को दिल्ली में हुई तथा लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु 11 जनवरी 1966 को उज़्बेकिस्तान में हुई थी। लाल बहादुर शास्त्री भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जिनकी मृत्यु भारत से बाहर हुई थी। शास्त्री जी ताशकन्द समझौते पर हस्ताक्षर करने उज़्बेकिस्तान गए थे (ताशकन्द समझौता भारत-पाक द्वारा बीच के मामलों को शांति से सुलझाने के लिए किया गया समझौता था)

डॉ. राधाकृष्णन के किस भाषण को सबसे प्रभावी माना जाता है।
तिरंगे के तीन रंगों के अर्थ से सम्बंधित डॉ. राधाकृष्णन द्वारा दिया गया भाषण बहुत ही प्रभावी रहा।

डॉ. राधकृष्णन के कार्यकाल के समय किस देश ने भारत पर हमला किया तथा उसका परिणाम क्या हुआ?
भारत के पड़ोसी देश चीन ने भारत पर हमला 20 अक्टूबर 1962 को किया फलस्वरूप भारत और चीन में युद्ध शुरू हो गया। यह युद्ध 20 अक्टूबर से 21 नवंबर तक चला। जिसमें भारत को हार का सामना करना पड़ा। भारत को आज़ाद हुए ज्यादा समय नही हुआ था इसी कारण आर्थिक रूप से कमज़ोर भारत के सामने बहुत सी चुनौतियां थी जिनसे वह लड़ रहा था ऐसे समय चीन के इस हमले ने भारत को बड़ी क्षति पहुँचाई। परिणामस्वरूप अक्साईचिन पर चीन का नियंत्रण हो गया। इस युद्ध के बाद भारत की रक्षा नीतियों में बहुत बड़ा बदलाव आया।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति कब बने तथा कितने समय तक उन्होंने इस पद पर अपनी सेवा दी?
डॉ. राधाकृष्णन भारत के द्वितीय राष्ट्रपति होने के साथ-साथ भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति भी थे। वे 26 जनवरी 1952 को भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति बने तथा लगातार दो बार इस पद पर अपनी सेवा देने के पश्चात 12 मई 1962 को इस पद से निवृत हुए।

डॉ. राधाकृष्णन का जन्म तथा मृत्यु कब व कहाँ हुई थी?
डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर 1888 को तिरुत्तनी, तमिलनाडु में हुआ था तथा 86 वर्ष सफल जीवन जीने के पश्चात वे 17 अप्रैल 1971 को चेन्नई, तमिलनाडु में मृत्यु को प्राप्त हुए।
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