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26 जनवरी कब क्यों कैसे मनाया जाता है | About Republic Day in Hindi

यह पृष्ठ भारत के गणतंत्र दिवस (रिपब्लिक डे) के बारे में पूर्ण जानकारी देने के उद्देश्य से बनाया गया है। भारत मे यह दिन 26 जनवरी के नाम से प्रसिद्ध है क्योंकि भारतीय गणतंत्र दिवस प्रत्येक वर्ष दिनांक 26 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिवस के बारे में पूर्ण जानकारी निम्न है:

गणतंत्र का अर्थ क्या होता है:
Gantantra Meaning in Hindi:
गणतंत्र शासन करने के उस तरीके को कहा जाता है जिसमें शासक या तो सीधा जनता द्वारा चुना जाता है या जनता द्वारा चुने गए अलग-अलग क्षेत्रों के मुख्य व्यक्तियों द्वारा शासक को चुना जाता है जो अप्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा ही चुना गया होता है। शासक चुनने की इस प्रणाली को गणतंत्र कहा जाता है। आधुनिक काल में शासक के स्थान पर राष्ट्रपति को चुना जाता है जो देश में सर्वोपरि होता है तथा देश को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए तंत्र (शासन व्यवस्था) तथा बल (थल, जल, वायु सेना) को अपने अधीन रखता है। गणतंत्र में कोई भी शासक वंशानुगत अर्थात राजा के वंश में जन्म लेने मात्र से शासक नही बन सकता और न ही तानाशाही अर्थात बल पूर्वक सत्ता पर काबिज हो सकता है क्योंकि यहाँ जनता द्वारा ही, जनता में से, जनता के लिए, जनता का शासक चुना जाता है यही गणतंत्र है। भारत में शासन की यह पद्धति 26 जनवरी 1950 को लागू हई थी क्योंकि इसी दिन भारत का संविधान लागू किया गया था जो देश को गणतंत्र पद्धति से चलाने हेतु मार्ग दर्शन करता है।

गणतंत्र दिवस के लिए 26 जनवरी की तारीख ही क्यों चुनी गई:
26 जनवरी की तारीख भारत के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है हालांकि आज हम इस तारीख को गणतंत्र दिवस के रूप में जानते हैं परन्तु वास्तव में यह भारत का प्रथम स्वतंत्रता दिवस है। जिसकी घोषणा वर्ष 1930 में हुई थी। 26 जनवरी 1930 की तारीख का महत्व समझने के लिए हमें इतिहास के उस समय के बारे में जनना होगा जब इस तारीख का जन्म हुआ था।
बात 31 दिसंबर 1929 के काँग्रेस लाहौर अधिवेशन की है। अंग्रेजों की गुलामी व अंग्रेज अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में स्वतंत्रता का मुद्दा जोरों शोरों से उठा। इस अधिवेशन की अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू कर रहे थे। अब अंग्रेजों की कूटनीतियों से कांग्रेस भी त्रस्त हो चुकी थी तथा उन्होंने प्रस्ताव पारित किया कि देश पर देश को लोगों द्वारा चुने गए भारतीय नेताओं का ही शासन होना चाहिए जिससे अंग्रेजी दमनकारी नीतियों का अंत हो सके। इसी तरह की माँग को मद्देनजर रखते हुए काँग्रेस ने ब्रिटिश सरकार से भारत को एक डोमिनियन राज्य बनाने की माँग की। डोमिनियन राज्य बनने के बाद भारत में स्वयं भारतीयों की आजाद सरकार तो बन सकती थी परन्तु उस सरकार पर पूरा नियंत्रण ब्रिटिशों का होता। इससे भारतीय मूल के लोग उच्च पदों पर पहुँचने में सक्षम अवश्य हो जाते। काँग्रेस चाहती थी कि भारतीय लोगों का एक स्वतंत्र शासन भारत पर हो यद्दपि शासक चाहे तो अंग्रेजों के अधीन या उनके उचित आदेश मानने के लिए प्रतिबद्ध हो। भारत को डोमिनियन राज्य बनाने के लिए काँग्रेस ने अंग्रेजों को लगभग एक माह का समय दिया। काँग्रेस ने कहा कि यदि ब्रिटिश सरकार डोमिनियन प्रस्ताव को एक माह के अन्दर लागू नही करती तो वे जनवरी के अंतिम रविवार को भारत की पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा कर देंगे। जनवरी के अंतिम रविवार को 26 तारीख पड़ी। इस अधिवेशन के पश्चात काँग्रेस के अधिवेशन अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू ने भारत का आधिकारिक झण्डा फहराया तथा जनता से अपील की कि यदि 26 जनवरी 1930 तक अंग्रेजी सरकार ने भारत को डोमिनियन राज्य नही बनाया तो 26 जनवरी 1930 को काँग्रेस पूर्ण स्वराज की घोषणा करेगी तथा इस बार अंग्रेजी हुकूमत से लड़ाई पूर्णतः स्वतंत्रता की होगी। हुआ भी यही काँग्रेस की इस बात पर अंग्रेजों ने कोई ध्यान नही दिया फलस्वरूप 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज (अर्थात पूरी तरह भारत पर भारतीयों का राज) की घोषणा कर दी गई। काँग्रेस ने जनता से इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने को कहा। समय के साथ-साथ 26 जनवरी ने लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली व देश की आज़ादी की चाहत रखने वाली जनता के दिलों में यह दिन आशा तथा उमंग भरने लगा।
समय गुजरता गया तथा अंग्रेजों पर भारत को आज़ाद करने का दबाव बढ़ने लगा वर्ष 1947 तक अंग्रेजों को भारत को आज़ाद करने के लिए विवश होना पड़ा। अब जब 1947 आया तो अंग्रेजों ने भारत को आज़ाद करने के लिए किसी विशेष दिन का चुनाव नही किया परन्तु आज़ादी से सबंधित कार्य शुरू कर दिए गए जिनमें भारत तथा पाकिस्तान की सीमाओं को बनाने जैसा दुर्भाग्यपूर्ण कार्य भी था। इसी के चलते समय निकला तथा जुलाई 1947 तक देश को आज़ाद करने के लिए लगभग प्रत्येक छोटे-बड़े कार्य जैसे कि: सीमा निर्धारण, सैन्य व्यवस्था, अंग्रेजों का सुरक्षा पूर्वक देश से चले जाने की व्यवस्था इत्यादि निपटा लिए गए। परन्तु 26 जनवरी अभी दूर थी तथा काँग्रेस में बिखराव, बंटवारा तथा अन्य आंतरिक कारणों की वजह से तेजी से बदल रही देश की स्थिति को देखते हुए 26 जनवरी 1948 तक रुकना जायज नही माना गया। फिर राष्ट्रीय ध्वज को 26 जनवरी 1948 के दिन अपनाने के बारे में सोचा गया परन्तु देश को स्वतंत्र होने से पूर्व ही एक राष्ट्रीय ध्वज की आवश्यक्ता थी इसलिए तारीखों के फेर में रहना सही न मानते हुए 22 जुलाई 1947 को भारतीय झंडा आधिकारिक रूप से अपना लिया गया। सभी कार्य पूर्ण करते हुए 15 अगस्त 1947 को भारत को आज़ाद कर दिया गया। भारत के इतिहास में स्वतंत्रता की माँग की तारीख 26 जनवरी इसकी वास्तविक आज़ादी की तारीख 15 अगस्त से बदल गई। इस प्रकार भारत ने जिसे पिछले 17 साल स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया था उस 26 जनवरी का कोई महत्व न रहा। परन्तु जब 3 वर्ष पश्चात संविधान लागू करने की बारी आई तो इस बार भारतीय नेताओं ने सोच विचार किया कि संविधान 26 जनवरी को लागू किया जाए व इस महत्वपूर्ण तारीख को भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाए। अब एक प्रारूप समिति बनाई गई जिसका उद्देश्य भारत के संविधान का निर्माण करना था जिसमें सबसे अधिक योगदान डॉ भीमराव अंबेडकर ने दिया। उन्होंने 2 वर्ष 11 माह तथा 18 दिन का समय लगाकर 29 नवम्बर 1949 को संविधान निर्माण का कार्य सम्पन्न किया। हालांकि 29 नवम्बर 1949 को संविधान बन कर तैयार था किंतु इसे लागू नही किया गया क्योंकि शीर्ष नेता चाहते थे कि 26 जनवरी के दिन को इस शुभ कार्य के लिए चुना जाए ताकि यह दिन फिर से एक महत्व को पा ले। इसी को ध्यान में रखते हुए दो माह रूकने का निर्णय लिया गया अंततः 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया व भारत में गणतंत्र प्रणाली का शुभारंभ हुआ। तब से 26 जनवरी का दिन गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

26 जनवरी कैसे मनाया जाता है:
How to celebrate 26 January in Hindi:
भारत 26 जनवरी से दो दिन पूर्व 24 जनवरी से ही हर्षोउल्लास में डूब जाता है तथा तीन दिन तक चलने वाले गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत होती है। इसकी तैयारियों में सबसे पहले प्रमुख सरकारी इमारतें जैसे कि: राष्ट्रपति भवन, लाल किला तथा राजपथ इत्यादि पर लाइटिंग की सजावट की जाती है। यह सजावट एक मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करती है। तिरंगे के तीन रंग सभी ओर फैल जाते हैं तथा राजधानी दिल्ली सहित पूरा देश देशभक्ति के रंग में रंग जाता है। विभिन्न स्तरों पर इस दिन का अलग-अलग रूप देखने को मिलता है राष्ट्रपति भवन से लेकर विद्यालय स्तर तक गणतंत्र दिवस कैसे मनाया जाता है आइए जानते हैं:

राष्ट्रपति भवन: लोगों की रूचि का मुख्य केंद्र राष्ट्रपति भवन की राजपथ परेड व समारोह रहता है। जहाँ देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य अतिथि तथा अन्य व्यक्ति विशेष उपस्थित होते हैं। यह भव्य समारोह सुबह नौ बजे आरंभ होता है तथा इसका सीधा लाइव प्रसारण भारत के राष्ट्रीय चैनल डी.डी. नेशनल पर होता है। यह समारोह तीन घण्टे तक चलता है। सर्वप्रथम भारत के राष्ट्रपति का आगमन होता है उनके पश्चात प्रधानमंत्री व मुख्य अतिथि समारोह की शोभा बढ़ाते हैं। तत्पश्चात राष्ट्रपति पूरी निष्ठा व सम्मान देते हुए राष्ट्रपति भवन पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं इसी के साथ सामूहिक राष्ट्रगान गाया जाता है। राष्ट्रगान समापन पर तिरंगे को सैल्यूट करते हुए 21 तोपों की सलामी दी जाती है। इस प्रकार इस समारोह का शुभारंभ होता है। समारोह आरंभ होते ही सर्वप्रथम उन शूर वीरों जिन्होंने पूर्ण साहस से व अपनी जान की परवाह न करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देश के नाम कर वीरता का परिचय दिया को राष्ट्रपति द्वारा वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है। इस सम्मानीय कार्य के बाद आकाश में राजपथ के ऊपर से एक हेलीकाप्टर भारत का राष्ट्रीय ध्वज लेकर सबसे आगे उड़ता है तथा पीछे थल सेना, नौसेना तथा वायु सेना के ध्वज लिए तीन हेलीकाप्टर चलते हैं। ये हेलीकॉटर वहाँ बैठे जनसमूह पर पुष्प वर्षा करते हुए आकाश में ओझल हो जाते हैं। इसके बाद परेड का आरंभ होता है तीनो सेनाएं एक एक कर सलामी देते हुए राष्ट्रपति के समक्ष से गुजरती हैं। तत्पश्चात तीनों सेनाएं एक एक कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करती हैं जिसमें टैंक, मिसाइलों व अस्त्रों-शस्त्रों का प्रदर्शन होता है तीनों सेनाएं राष्ट्रपति के समक्ष से गुजरते हुए अपने अस्त्रों शस्त्रों को झुका लेती हैं व निष्ठापूर्वक सलामी देते हुए गुजरती हैं। तत्पश्चात पुलिस की परेड निकलती है सुरक्षा व शक्ति के इस प्रदर्शन के बाद राज्यों की बारी आती है। प्रत्येक राज्य की झाँकियाँ राजपथ से गुजारी जाती हैं। इस प्रकार गणतंत्र का यह भव्य समारोह समापन की ओर बढ़ता है तथा सेना के जवान मोटरसाइकिल करतब दिखाते हैं। तत्पश्चात वायु सेना का आकाश में शक्ति प्रदर्शन होता है राजपथ के ऊपर हवाई जहाज त्रिशूल रचना व अन्य आकृतियों में करतब दिखाते हैं तथा त्रिशूल रूपी रचना कर रहे तीन विमान तिरंगे के तीन रंग आकाश में बिखेरते हैं। राजपथ के ऊपर पुरा आकाश तिरंगे के रंग में रंग जाता है तथा चारों ओर तिरंगे का ही दृश्य छा जाता है इसी भव्य नजारे के साथ इस समारोह का भव्य समापन होता है।

राज्य स्तर: राज्य व अन्य स्तरों पर गणतंत्र दिवस को मनाने की कोई विशेष रूपरेखा नही होती। यद्दपि विभिन्न राज्यों के शीर्ष मंत्री किसी समारोह जो राज्य के किसी भी जिले में हो सकता है में शिरखत कर उस समारोह की शोभा बढ़ा सकते हैं। शीर्ष मंत्री व उनसे नीचे के पदाधिकारी इस दिन अपने अपने स्तर पर मुख्य अतिथि के रूप में शिरखत करते हैं यह समारोह विद्यालयों, कॉलेजों, किसी संस्थान या लोगों द्वारा सामूहिक रूप से एकत्रित होकर किया जाता है। इन समारोहों में नृत्य प्रतियोगिता, कविता, गायन का विशेष असर देखने को मिलता है। नाटकों का भी इन समारोहों में विशेष स्थान रहता है नाटकों में क्रांतिकारियों के जीवन से जुड़ी विशेष घटनाओं को दर्शाया जाता है। देश भर में होने वाले इन समारोहों में क्या क्या मुख्य होता है इसी जानकारी नीचे दी जा रही है:

1). भाषण:
26 January Speech in Hindi:
किसी भी समारोह की शुरुआत गणतंत्र दिवस से सबंधित भाषण से की जाती है। यह भाषण समारोह के प्रवक्ता या भाग ले रहे जनों द्वारा दिया जाता है। इन भाषणों में देश के इतिहास, 26 जनवरी के महत्व तथा देश के बारे में संजोया गया ज्ञान निहित होता है। अधिकतर भाषण गणतंत्र दिवस महत्व से शुरू किए जाते हैं तथा देश की कहानी बयान कर आने वाली चुनौतियों से लड़ने हेतु प्रेरित करते हुए सम्पन्न होते हैं। 26 जनवरी पर स्कूल स्तर पर दिया जा सकने वाला भाषण यहाँ दिया जा रहा है जिसे आप 26 जनवरी पर विद्यालय स्तर पर दे सकते हैं व उचित बदलाव कर राज्य स्तर पर भी इस भाषण का प्रयोग किया जा सकता है:

"नमस्कार! मेरा नाम _________ है मैं _____ कक्षा का छात्र/ की छात्रा हूँ। मैं अपने शिक्षकों का आभारी हूँ कि उन्होंने मुझे आपके समक्ष 26 जनवरी जैसे भव्य दिवस के बारे में अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रधान किया।

मेरे सहपाठियों आप आज इस महान उत्सव पर यहाँ एकत्रित हुए मैं आपका हार्दिक अभिनन्दन करता/करती हूँ। मेरे प्यारे मित्रों हम प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी का दिन इसलिए मनाते हैं क्योंकि इस दिन 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था तथा हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र बना था।

आज का दिन पूरे देश भर में हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन हम अपने देश के प्रति सम्मान की भावना दर्शाते हुए राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं तथा सामूहिक राष्ट्रगान गाते हैं। यह दिन पूरे देश के विद्यालयों, कॉलेजों तथा शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ शहरी, जिला व राज्य स्तरों पर भी मनाया जाता है।

इस दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में परेड का आयोजन किया जाता है। जहाँ आदरणीय राष्ट्रपति, आदरणीय प्रधानमंत्री व शीर्ष नेतागण उपस्थित होते हैं। राजपथ पर होने वाली इस परेड में भारत की तीनों सेनाएं अपना शक्ति प्रदर्शन करती हैं। सेना के साथ-साथ सभी राज्य अपनी संस्कृतिक झलक प्रस्तुत करते हैं। इस भव्य समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर दूसरे देश के राष्ट्रपति को सम्मान पूर्वक आमंत्रित किया जाता है तथा भारत की अतिथि देवो भवः संस्कृति का अनुसरण कर्तव्य हुए पूर्ण सम्मान दिया जाता है।

मैं अपने आपको सौभाग्यशाली मानता/मानती हूँ कि मैंने इस देश की पावन धरती पर जन्म लिया। मुझे भारत का नागरिक होने पर गर्व है इस देश की संस्कृति अपने अलग-अलग रंगों को समेटे हुए है। सभी धर्मों के लोग यहाँ मिल जुल कर रहते हैं। मैं ईश्वर से सदैव इस देश की उन्नति की कामना करता/करती हूँ।

आज के इस दिन हमें यह संकल्प लेना है कि भारत के विकास में हम अपना पूर्ण योगदान देंगे तथा गरीबी व भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से मिलकर लड़ेंगे। इसी के साथ भाषण समाप्त करते हुए मैं कहना चाहूँगा/ चाहूंगी कि:

लाख आए संकट मगर धैर्य को बनाए रखना है...
इस देश की शान-ओ-शौकत को ताजों पर सजाए रखना है...

जय हिंद... जय भारत... (धन्यवाद)

2). कविता:
26 January Kavita in Hindi:
देशभक्ति से परिपूर्ण कविताओं का 26 जनवरी पर विशेष रूप देखने को मिलता है। इनमें अधिक्तर वीर रस (शौर्य का गुणगान करने वाली) कविताओं का समावेश होता है। कविताओं के माध्यम से कवि अपने-अपने स्तर पर प्रशंसको में देश की प्रगति में बढ़ चढ़कर भाग लेने हेतु जोश भरने का कार्य करते हैं।

"सारे जहां से अच्छा, हिन्दुस्तां हमारा...
हम बुलबुले हैं इसकी, ये गुलसितां हमारा..."

3). नृत्य प्रतियोगिता: 26 जनवरी पर विशेष आकर्षण का विषय नृत्य प्रतियोगिताएं होती हैं। इन प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राएं सामूहिक नृत्य प्रदर्शित करते हैं। देशभक्ति गीतों पर होने वाला यह नृत्य दिल को उमंग से भर देता है। आप भी इस दिवस पर प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं नृत्य हेतु देशभक्ति गीतों की सूची निम्न है:

26 January Petriotic Songs List in Hindi:

i). माँ तुझे सलाम: शौर्य भाव से भरा यह गीत "माँ तुझे सलाम" फ़िल्म में ए.आर. रहमान द्वारा गाया गया है इस गाने से दर्शकों में जोश देखते ही बनता है।

ii). सारे जहां से अच्छा: विश्व भर में भारत के मान सम्मान व प्रतिष्ठा की व्याख्या करता यह गीत मोहम्मद इक़बाल की कलम ने 1904 में उकेरा था। इस गीत का उर्दू नाम "तराना-ए-हिन्द" है। इस गीत को अपनी आवाज लता मंगेशकर ने दी है उनकी एलबम "ए मेरे वतन के लोगों" में यह गाना सूचीबद्ध है।

iii). वतन वालों वतन ना बेच देना: देश के आंतरिक संकटो पर वार करता यह गीत "रूप कुमार राठौड़ की आवाज़ में "इंडियन" फ़िल्म में प्रदर्शित किया गया है।

iv). देश रंगीला: नारी नृत्य हेतु विशेष रूप से रचित यह गाना देशभक्ति की एक मिसाल पेश करता है। देश की संस्कृति का गुणगान करता यह गीत "फ़ना" फ़िल्म में महालक्ष्मी अय्यर द्वारा गाया गया है तथा अभिनेत्री काजोल ने इसमें अद्भुत नृत्य पेश किया है।

v). कंधे से मिलते हैं कंधे: देश की एकता तथा अखण्डता का प्रारूप यह गीत शंकर महादेवन व सोनू निगम जैसे दिग्गज गायकों ने सामूहिक रूप से गाया है। जोश से ओतप्रोत यह गीत लक्ष्य फ़िल्म में फिल्माया गया है तथा एक अमिट छाप छोड़ता है।

vi). चक दे इंडिया: यह जोशीला गाना चक दे इंडिया फ़िल्म का शीर्षक गीत है। सुखविंद्र सिंह, सलीम मर्चेंट व मरियाना डिक्रूज की आवाज़ में यह गीत जगदीप साहनी द्वारा लिखा गया है।

vi). ऐसा देश है मेरा: पंजाबी-हिन्दी के सामंजस्य से बना यह गीत देश की संस्कृति तथा विविधता को दर्शाता है। इस गीत में लता मंगेशकर व उदित नारायण के साथ पंजाबी गायक गुरदास मान ने भी अपनी आवाज दी है। पृथा मंजूमदार सहित इन चार दिग्गज गायकों की आवाज में सजा यह गीत "वीर ज़ारा" फ़िल्म में प्रदर्शित हुआ है।

vii). मेरे देश की धरती: पचास वर्ष पुराना यह गीत आज भी देश वासियों की जुबां पर चढ़कर बोलता है। इस ऐतिहासिक गीत को "उपकार" फ़िल्म में दर्शाया गया है। कृषि प्रधान भारत देश की आर्थिक शक्ति को बयां करता यह गीत महेंद्र कपूर की आवाज से सुसज्जित है।

viii). मेरा रंग दे बसंती चोला: शहीदी गीत मेरा रंग दे बसंती चोला शहीद भगत सिंह पर बनी फिल्म "23 मार्च 1931 शहीद" में फिल्माया गया है। देश की आन के लिए मर मिटने का हौंसला दिखाता यह गीत हंस राज हंस व उदित नारायण ने मिलकर गाया है।

ix). ए वतन ए वतन हमको तेरी कसम: देशभक्ति से परिपूर्ण यह गीत "शहीद" फ़िल्म में प्रदशित किया गया था। दिग्गज गायक मोहम्मद रफी ने इस गीत को अपनी आवाज दी है वहीं प्रेम धवन ने अपनी कलम से इस गीत को उकेरा है।

x). अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो: "कर चले हम फिदा" यह गीत अल्का याग्निक, उदित नारायण व सोनू निगम सहित कई गायकों ने एकसाथ मिलकर गाया है। देश पर कुर्बान हो जाने की दिली तम्मना को बयां करता यह गीत देश भक्ति के अति प्रिय गानों में से एक है।

xi). ये देश है वीर जवानों का: नया दौर फ़िल्म का यह गाना देश की युवा शक्ति का परिचायक है। साहिर लुधियानवी का लिखा यह गीत देश की गौरवान्वित युवा ताकत को दर्शाता हुआ श्रोताओं के दिल में उतर जाता है इस गीत को आवाज मोहम्मद रफी ने दी है।

xi). आओ बच्चों तुम्हे दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की: बच्चों के लिए लिखा गया यह गाना भारत के गौरवमयी इतिहास व इसकी भौतिक स्थिति का मनमोहक वर्णन है व सहज शब्दों में बच्चों के लिए बनाया गया है। आदिनाथ मंगेशकर द्वारा गाया गया यह गीत जागृति फ़िल्म में प्रदर्शित किया गया था।

xii). ए मेरे वतन के लोगों: भारत की सबसे लोकप्रिय गायिका लता मंगेशकर की आवाज में गाया गया यह गाना अपने आप में एक इतिहास को संजोय हुए है। इस गाने के बोल कवि प्रदीप ने लिखे हैं। शहीदों के अमर बलिदान को शत शत नमन करता यह देशभक्ति गीत 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के वीर शहीदों को समर्पित है।

xiii). देश मेरे देश मेरे: "द लेजेंड ऑफ शहीद भगत सिंह" फ़िल्म का यह गीत जोश से भरा है तथा दुश्मन के लिए एक ललकार की तरह है। ए.आर. रहमान व सुखविंद्र सिंह की आवाज में बुने गए इस गाने के साहस भरे बोल समीर द्वारा लिखे गए हैं।

xiv). जिंदगी मौत ना बन जाए: सोनू निगम तथा रूप कुमार राठौड़ द्वारा गाया गया यह गाना आने वाली विपरीत स्थितयों के लिए सजग रहने हेतु प्रोत्साहित करता है। अंसारी द्वारा लिखा गया यह गीत देश मे उजागर हो रही समस्याओं पर गहरी चोट करता है।

xv). नन्हा मुन्ना राही हूँ: "सन ऑफ इंडिया" फ़िल्म का यह गीत पूर्ण रूप से बच्चों पर आधारित है व बच्चों के लिए बनाया गया है। आज के बच्चे देश का भविष्य हैं उन्हें देश प्रेम से जोड़ता यह गीत विद्यालय स्तर पर हो रहे देशभक्ति समारोह का मुख्य केंद्र रहता है। इस गीत को शांति माथुर ने आवाज दी है।

xvi). जिस देश मे गंगा बहती है: देश की भावनात्मक व प्रिय संस्कृति को दर्शाते हुए स्वयं का प्यार भरा परिचय देता यह गीत मुकेश चंद माथुर ने गाया है। फ़िल्म के इस गीत को 60 वर्ष पूर्व शैलेन्द्र ने लिखा था।

xvii). कदम कदम बढ़ाए जा: जीने के गुर सिखाता यह गाना रामचन्द्र चितलकर ने गाया है। "समाधि" फ़िल्म में पदर्शित इस गाने के बोल राजेन्द्र ने लिखे हैं।

xviii). सरफरोशी की तम्मना: यह एक कविता है जिसे सुरों में पिरोया गया है। बिस्मिल अजीमाबादी द्वारा लिखी गई यह कविता आजादी की लड़ाई के समय भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारियों के लिए प्रोत्साहन का कार्य करती रही थी। इसे गाने का रूप फ़िल्म "द लेजेंड ऑफ भगत सिंह" में दिया गया है जिसमें सोनू निगम ने अपनी आवाज दी है।

इन गीतों पर नृत्य प्रतियोगिताएं प्रत्येक वर्ष होती है। गणतंत्र दिवस के साथ-साथ स्वतंत्रता दिवस पर भी नृत्य कला का विशेष रूप इन गानों की ताल पर देखने को मिलता है। विद्यालयों में इस प्रकार की प्रतियोगिताओं का अपना एक उच्च स्तर है।

4). नाटक:
26 January Natak in Hindi:
क्रांतिकारियों व देश की सेना के जवानों को समर्पित नाटक 26 जनवरी पर विशेष रूप से आकर्षण का विषय रहते हैं। इन नाटकों के माध्यम से क्रांतिकारियों के जीवन की विभिन्न घटनाओं का संजीव वर्णन किया जाता हैं। स्वतंत्रता संग्राम के समय मुख्य धारा में रहे क्रांतिकारियों की वेश भूषा धारण कर बच्चे तथा वयस्क अपने-अपने स्तर पर नाटक प्रस्तुत करते हैं। कुछ नाटक साधारण तरीके से किए जाते हैं तो कहीं भिन्न भिन्न नाटकों में प्रतियोगिताएं देखने को मिलती हैं। यद्दपि नाटकों की सूची बहुत लंबी होती है परन्तु कुछ विशेष नाटक जो मुख्यतः देखने को मिलते हैं वे निम्न हैं:

i). भगत सिंह व बटुकेश्वर दत्त द्वारा सेंट्रल असेंबली में बम फेंकना:
चरित्र: भाग 1 में: भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त व असेंबली के अन्य सदस्य, भाग 2 में: भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव व अंग्रेजी सरकार की वेशभूषा में अन्य सदस्य।
स्थान: सेंट्रल असेंबली जो आज संसद के नाम से जानी जाती है की काल्पनिक स्टेज।
विस्तार: 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह व बटुकेश्वर दत्त ने ब्रिटिश सेंट्रल असेंबली में दो बम फेंके तथा आत्म समर्पण कर दिया इस घटना के फलस्वरूप लगभग 2 वर्ष बाद 23 मार्च 1931 को भगत सिंह तथा इनके अन्य दो साथियों राजगुरु व सुखदेव को फाँसी पर लटका दिया गया। इस घटना के पश्चात देश की जनता जो आजादी के लिए नरमी से पेश आ रही थी ने अंग्रेजों से सीधी टक्कर लेने का मन बना लिया। इस महान शहीदी की घटना को दर्शाता यह नाटकीय रूप 26 जनवरी के दिन मंच का हिस्सा बनता है।

ii). घर से विदा लेकर सीमा पर जाते हुए जवान का देश के प्रति फर्ज, देशभक्ति और अपनों से बिछड़ते हुए उमड़ते भावों की संजीव भावनाएं संजोता नाटकीय दृश्य।

iii). सीमा पर बैठे जवानों पर अचानक हुए आतंकी हमले के कारण बदली परिस्थिति का संजीव दृश्य जो देश के सैनिकों और वीर शहीदों को समर्पित होता है।

iv). बच्चों से भरी कक्षा का दृश्य व उन्हें देशभक्ति का ज्ञान देता अध्यापक जो देश की संस्कृति, शौर्य तथा बलिदान के बारे में ज्ञान देता हुआ दर्शाया जाता है।

v). वीर क्रांतिकारी मंगल पांडे के बुलंद हौंसले तथा वीरता का संजीव वर्णन करता नाटकीय दृश्य।

vi). महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू व काँग्रेस के भारत की आजादी के लिए किए गए अहिंसा पूर्वक संघर्ष की कहानी बताता नाटक।

vii). 26 जनवरी के विशेष अवसर पर देश की समस्याओं जैसे कि भ्रष्टाचार, गरीबी, महिला व बाल शोषण, महिलाओं को पढ़ाई से वंचित रखना इत्यादि सामाजिक बुराइयों पर चोट करता नाटकीय दृश्य।

viii). प्राचीन भारत (विश्व गुरु) तथा आधुनिक भारत के बीच के सफर को दर्शाता नाटकीय दॄश्य।

उपरोक्त नाटक विशेष रूप से 26 जनवरी पर रूचि का केंद्र होने के साथ-साथ आम लोगों में देशभक्ति की भावना का प्रसार करते हैं।

5). सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता: बच्चों में भारत से जुड़ी जानकारी का विस्तार करने हेतु भारत देश के इतिहास व अन्य क्षेत्रों से जुड़े प्रश्नों को लेकर सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं। जिससे भारत के बारे में सामान्य ज्ञान न सिर्फ बच्चों बल्कि दर्शकों तक भी पहुंचे। सामान्य ज्ञान की प्रतियोगिताओं हेतु सामान्य ज्ञान प्रश्न व क्विज यहाँ से लिए जा सकते हैं।

6). मार्च निकलना: देशभक्ति गीत व नारों के साथ मार्च निकलना भी एक आकर्षण का विषय रहता है। सभी स्कूलों के विद्यार्थी एकत्रित होकर भारतीय तिरंगे को गर्व से हाथों में उठाकर मार्च निकलते हैं तथा देशप्रेम की अलख जगाते हैं। इससे वे लोग जो किसी कारण वश समारोहों का हिस्सा नही बन सके हों उन तक भी इस महान व भव्य दिवस की ध्वनि पहुंचती है।
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