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भारत का राष्ट्रीय गान क्या है

भारत का राष्ट्रीय गान "जन गण मन" है इसके बोल तथा अर्थ निम्न लिखित है:

जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता।
पंजाब सिंध गुजरात मराठा द्रविड़ उत्कल बंग।
विंध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधि तरंग।
तव शुभ नामे जागे तव शुभ आशीष माँगे गाहे सब जयगाथा।
जन गण मंगल दायक जय हे भारत भाग्य विधाता।
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे...

अर्थ: जन गण के मन में बसे उस अधिनायक की जय हो जो भारत के भाग्य विधाता हैं।
उनका नाम सुनते ही पंजाब, सिंध, गुजरात और मराठा, द्रविड़ उत्कल व बंगाल।
विंध्य, हिमाचल व यमुना और गंगा से लेकर हिंद महासागर (जलधि) तक उत्साह की तरंगें उठती हैं।
सब तेरे पवित्र नाम पर जाग उठते हैं सब तुमसे पवित्र आशीष पाने की अभिलाषा रखते हैं सब तेरी ही जय गाथाओं का गान करते हैं।
जन गण के मंगलदायक की जय हो, हे भारत के भाग्य विधाता।
तेरी विजय हो, विजय हो, विजय हो, तेरी सदा सर्वदा विजय हो...

भारत के राष्ट्रीय गान से जुड़े सामान्य ज्ञान प्रश्न:

भारत के राष्ट्रगान "जन गण मन" के लेखक कौन हैं?
भारत के राष्ट्रगान "जन गण मन" की रचना का श्रेय रवींद्रनाथ टैगोर को जाता है जो कि बंगाली भाषा के शिरोमणि कवि कहलाते हैं। टैगोर बंगाली साहित्य के लेखन में सबसे अग्रणी हैं उनकी बंगाली रचना "भरोत भाग्यो बिधाता" के हिन्दी रूपांतरण "भारत भाग्य विधाता" का प्रथम पद्य भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया है। उन्होंने भारत ही नही बल्कि बांग्लादेश के राष्ट्रगान "अमार शोनार बांग्ला" की रचना भी की है। इसके अतिरिक्त श्रीलंका का राष्ट्रगान भी इन्ही की रचना से प्रेरित है।

राष्ट्रगान की रचना कब की गई थी?
राष्ट्रगान की रचना वर्ष 1911 में की गई थी इसके बोल व संगीत दोनों ही टैगोर की देन हैं। इसके लिखे जाने के वर्ष दिसंबर 1911 में यह अखबारों की सुर्खियों में छा गया था।

राष्ट्रगान के किस शीर्षक के आधार पर इसे भारतीय संविधान ने राष्ट्रगान के रूप में अपनाया है?
राष्ट्रगान को आज "जन गण मन" शीर्षक दिया जाता है किंतु भारतीय संविधान में इसे "भारत भाग्य विधाता" शीर्षक के आधार पर राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया है।

जन गण मन को किस वर्ष राष्ट्रगान बनाया गया?
जन गण मन को 24 जनवरी 1950 को (संविधान लागू करने से 2 दिन पूर्व) राष्ट्रगान का दर्जा मिला। पहले "वन्दे मातरम" को राष्ट्रगान बनाया जाना तय हुआ था तथा इन दोनों गीतों (वन्दे मातरम व जन गण मन) के लिए मतदान भी करवाया गया। वन्दे मातरम के हिस्से में ज्यादा वोट पड़े परन्तु भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जन गण मन को राष्ट्रगान बनाने के पक्षधर थे। फलस्वरूप जन गण मन को ही भारत के राष्ट्रगान के रूप में चुना गया।

रवींद्रनाथ टैगोर की रचना "भारत भाग्य विधाता" में कुल कितने पद्य हैं?
बंगाली गीत भारत भाग्य विधाता में कुल 5 पद्य हैं जिनमें से प्रथम पद्य को आज हम राष्ट्रगान के रूप में जानते हैं। इस बंगाली रचना का हिन्दी अनुवाद कर संविधान ने इसके प्रथम पद्य को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया है।

राष्ट्रगान को सर्वप्रथम कब गाया गया था?
राष्ट्रगान को सर्वप्रथम 27 दिसंबर 1911 को काँग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया था। यह काँग्रेस का सत्ताईसवाँ अधिवेशन था इसके अध्यक्ष पण्डित बिशननारायण धर थे। 27 दिसंबर 1911 को गाया गया यह गीत अगले दिन अँग्रेजी अखबारों की सुर्खियों में छाया रहा।

राष्ट्रगान में प्रयुक्त शब्द "विंध्य" किसके लिए प्रयोग किया गया है?
विंध्य शब्द विंध्य प्रदेश के लिए प्रयोग किया गया है। यह 1956 से पूर्व भारत का एक राज्य था 1948 को गठित हुए इस राज्य को 8 वर्ष पश्चात 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन आयोग द्वारा मध्य प्रदेश में मिला दिया गया। विंध्य प्रदेश की राजधानी का नाम रेवा था जो कि भोपाल से 420 किलो मीटर दूर थी। इस प्रदेश की सीमा मध्य भारत नाम के अन्य राज्य से लगा करती थी। 1956 में विंध्य प्रदेश, भोपाल स्टेट तथा मध्य भारत तीनों को मिला कर एक बना दिया गया तथा इसे मध्य प्रदेश नाम दिया गया इस प्रकार वर्तमान में विंध्य राज्य मध्य प्रदेश का हिस्सा है।

राष्ट्रगान में किस राज्य का नाम आता है जो वर्तमान में पाकिस्तान का हिस्सा है?
राष्ट्रगान की रचना भारत-पाक बंटवारे से पूर्व हुई थी बंटवारे से पूर्व दोनों देश एक ही भूभाग का हिस्सा थे इसलिए "सिंध" नाम का जिक्र राष्ट्रगान में आता है जो कि आज पाकिस्तान का हिस्सा है। सिंध पाकिस्तान के चार प्रान्तों में से एक है। किन्तु राष्ट्रगान में प्रयुक्त सिंध शब्द "सिन्धु" का प्रतिनिधित्व करता है तथा इसे सिन्धु सभ्यता व सिन्धु नदी के अर्थ पर राष्ट्रगान में रखा गया है। ज्ञात रहे कि सिन्धु सभ्यता भारतीय क्षेत्रों के सृजन का मूल है तथा सिन्धु नदी भारत का हिस्सा है भारत के राष्ट्रगान में सिंध शब्द इन्ही अर्थों का प्रतिनिधित्व करता है।

राष्ट्रगान में प्रयुक्त "द्रविड़" शब्द भारत के किन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है?
द्रविड़ शब्द भारत के दक्षिणी भाग का प्रतिनिधित्व करता है द्रविड़ दक्षिण भारतीयों की मूल प्रजाति व भाषा है। इन भाषाओं में तमिल, तेलुगु, मलयालम तथा कन्नड़ का समावेश है। सम्पूर्ण दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व सयुंक्त रूप से द्रविड़ शब्द करता है जो इसकी एकता व संस्कृति का परिचायक है।

राष्ट्रगान को गाने में कितना समय लगता है?
राष्ट्रगान को गाने में 52 सेकंड का समय लगता है। भारत का राष्ट्रगान "जन गण मन" दो रूपों में गया जाता है एक पूर्ण रूप में तथा दूसरा संक्षिप्त रूप में। जब पूर्ण राष्ट्रगान गाया जाता है तब इसके लिए 52 सेकंड का समय दिया जाता है जबकि संक्षिप्त रूप 20 सेकंड में गाया जाता है। संक्षिप्त रूप में राष्ट्रगान की प्रथम व अंतिम पंक्ति गाई जाती है तथा इसके गायन के लिए विशेष अवसरों पर ही आज्ञा दी जाती है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले समारोहों में तथा राष्ट्र व राष्ट्रपति के सम्मान में पूर्ण राष्ट्रगान गाया जाता है। 52 सेकंड का यह समय राष्ट्रगान को संगीतमय रूप में गाए जाने के लिए दिया गया है और क्योंकि राष्ट्रगान को सदैव पूर्ण सम्मान देते हुए गाया जाना चाहिए इसलिए संगीतमय तरीके से गाना ही राष्ट्रगान का सर्वश्रेष्ठ सम्मान माना जाता है। 52 सेकंड समय निर्धारित करने का उद्देश्य यह है कि जब देश में कहीं भी राष्ट्रगान गाया जाए तो इसमें तेजी या धीमापन मिश्रित ना हो जो कि भाषाओं के क्षेत्रिय प्रभाव के कारण हो सकता है। इसके अतिरिक्त गायन क्षेत्र के लोगों द्वारा राष्ट्रगान को गाया जाता रहा है इसलिए संगीतबध करते समय कोई अतिरिक्त धुन इसमें ना जोड़ी जा सके तथा राष्ट्रगान के मान-सम्मान व प्रतिष्ठा को बरकरार रखा जा सके व मामूली बदलाव भी कर पाना सम्भव ना हो इसी उद्देश्य से 52 सेकंड का समय निर्धारित किया गया है जो हमें राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रगान गाने के लिए विशेष दिशा-निर्देश देता है।

क्या राष्ट्रगान को 52 सेकंड से कम या ज्यादा समय में गाया जाना राष्ट्रगान का अपमान है?
# नही... राष्ट्रगान को 52 सेकंड से कम या ज्यादा समय में गाना कदापि इसका अपमान नही है किन्तु यदि एक त्रुटि मुक्त व आधिकारिक राष्ट्रगान की बात की जाए तो उसके लिए 52 सेकंड का समय निर्धारित है। आप पूरे सम्मान से राष्ट्रगान गा रहे हैं तो इसका मतलब ये नही है कि आपको 52 सेकंड से पहले या बाद में इसके समापन नही करना है आप अपने पूर्ण भाव से इसे गा सकते हैं 52 सेकंड का दिशानिर्देश मात्र एक बराबर लय देने के उद्देश्य से दिया गया है। यदि आप किसी कारण वश इसे 52 सेकंड से कम या ज्यादा समय में गा रहे हैं किंतु पूर्ण सम्मान दे रहे हैं तो इसे कदापि राष्ट्रगान का अपमान नही समझा जाएगा।

संक्षिप्त राष्ट्रगान क्या है और इसमें कौन सी दो पंक्तियाँ आती हैं?
# संक्षिप्त राष्ट्रगान "जन गण मन" की प्रथम व अंतिम पंक्ति को कहा जाता है ये पंक्तियाँ हैं: "जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता... जय हे... जय हे... जय हे... जय... जय... जय... जय... हे..." राष्ट्रगान का संक्षिप्त रूप 20 सेकंड में गाया जाता है इसके गायन की आज्ञा तब दी जाती है जब किसी कारणवश पूर्ण राष्ट्रगान ना गाया जा सकता हो।

क्या राष्ट्रगान को गाने के लिए कोई विशेष समय निश्चित है?
नही... राष्ट्रगान किसी भी समय गाया जा सकता है बशर्ते गाते हुए राष्ट्रगान को पूर्ण सम्मान दिया जाए व जब राष्ट्रगान गाया जा रहा है तो सावधान मुद्रा में खड़ा होना चाहिए। कुछ स्थानों पर इस बात का भ्रम है कि राष्ट्रगान सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद नही गाया जा सकता किन्तु ऐसा कोई नियम नही है। कई जगहों पर तथा कुछ लोगों द्वारा अनजाने में बताया जाता है कि राष्ट्रगान रात आठ बजे के बाद या किसी अन्य समय के बाद नही गाया जा सकता परन्तु ये सब भ्रम है भारतीय नागरिक दिन-रात जब भी आवश्यक हो पूर्ण सम्मान देते हुए बे-झिझक राष्ट्रगान का गायन कर सकते हैं।

क्या राष्ट्रगान छत के नीचे गाया जा सकता है?
हाँ... राष्ट्रगान का गायन छत के नीचे किया जा सकता है। पूरे सम्मान से राष्ट्रीय गान को (प्रतिकूल जगह छोड़ कर) कहीं भी गया जा सकता है चाहे वह खुले असमान के नीचे हो, किसी हॉल में हो या किसी कमरे में। बस इसमें इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोई ऐसा स्थान ना हो जहाँ राष्ट्रगान की प्रतिष्ठा व सम्मान को ठेस पहुँचे। जनों में यह भ्रम है कि छत के नीचे राष्ट्रगान का गायन इसका अपमान है परन्तु ऐसा नही है बल्कि संसद भवन में यह स्वंय ही प्रधानमंत्री व गणमान्य व्यक्तियों के समक्ष राष्ट्रगान छत के नीचे गाया जाता है। इसलिए आप इस भ्रम को न रखें व यदि आवश्यक हो तो छत के नीचे बेझिझक राष्ट्रगान करें।

क्या राष्ट्रगान के समय खड़ा होना आवश्यक है?
राष्ट्रगान को सम्मान देना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है तथा राष्ट्रगान का सम्मान करने के लिए गणमान्य व्यक्तियों से लेकर आम नागरिक तक खड़े होकर अपना सम्मान व्यक्त करते हैं। परन्तु निजता या किसी मजबूरी के चलते जैसे कि विकलांगता अथवा रोग की अवस्था में यदि कोई नागरिक खड़ा होने में असमर्थ है तो इसे राष्ट्रगान का अपमान नही समझा जा सकता। इसके अतिरिक्त यदि कोई व्यक्ति बिना खड़े हुए राष्ट्रगान के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करने का इच्छुक है तो यह उसका निजी अधिकार है परन्तु ध्यान रहे राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े हुए व्यक्तियों के लिए अड़चन पैदा करना, अव्यवस्था फैलाना या राष्ट्रगान का अपमान करने मात्र के औचित्य से खड़ा ना होना अपराध माना जाता है तथा इसके लिए जेल व जुर्माने का प्रावधान है। राष्ट्रगान के सम्मान में खड़ा होना या ना होना प्रत्येक नागरिक का निजी अधिकार है किन्तु मात्र अपमान करने के उद्देश्य से खड़ा ना होना अपराध समझा जाएगा।

राष्ट्रगान से जुड़े विवाद क्या हैं?
राष्ट्रगान किसी वाद-विवाद से बहुत ऊँचा है परन्तु क्योंकि हम राष्ट्रगान की सम्पूर्ण व निष्पक्ष जानकारी देने हेतु प्रतिबद्ध हैं इस लिए लोकतांत्रिक रूप से इन विवादों की जानकारी दी जा रही है। भारत के प्रत्येक नागरिक का अधिकार है कि वह इन विवादों की जानकारी रखे तथा अपने विवेक के आधार पर सही गलत का निर्णय ले विवाद से सबंधित प्रश्न निम्न हैं:

1). क्या रवींद्रनाथ टैगोर ने "जन गण मन" अंग्रेजी सरकार के लिए लिखा था?
जब प्रथम बार 27 दिसंबर 1911 को राष्ट्रगान गाया गया उससे अगले ही दिन अंग्रेजी अखबारों की सुर्खियों में यह छपा कि काँग्रेस के सत्ताइसवें अधिवेशन की शुरुआत एक गीत से हुई जो जॉर्ज पंचम (ब्रिटिश भारत के सम्राट) के स्वागत में लिखा गया था इन सुर्खियों ने विवाद को जन्म दे दिया। इस विवाद की जड़ "अधिनायक" शब्द को बनाया गया तथा कहा गया कि यह शब्द जॉर्ज पंचम व अंग्रेजी सरकार के लिए प्रयोग किया गया है। परन्तु रविंद्रनाथ टैगोर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया तथा इन्हें बे-बुनियाद बताया। धीरे-धीरे यह विवाद गीत के शीर्षक "भारत भाग्य विधाता" तक पहुँचा तथा विरोधियों ने प्रश्न उठाया भारत का भाग्य विधाता किसके लिए प्रयोग किया गया है? जिसके उत्तर में पक्षधरों ने "आम जनता" को भारत का भाग्य विधाता बताया तथा कहा गया कि लोकतांत्रिक देश का भाग्य विधाता उसकी अपनी जनता होती है जो राजा का चुनाव कर देश का भाग्य सुनिश्चित करती है टैगोर ने यह गीत देश की जनता का आह्वान करने के लिए लिखा था। यहाँ तक विवाद ढल चुका था किन्तु इस विवाद को हवा तब मिली जब इस पूर्ण गीत का अंग्रेजी अनुवाद करते हुए टैगोर ने "राज राजेश्वर" शब्द का अर्थ किंग ऑफ ऑल किंग्स लिख दिया। इस पर पुनः विवाद उठता देख तर्क दिया गया कि ईश्वर को भी राज राजेश्वर कहा जाता है तथा यह शब्द उन्ही के लिए प्रयुक्त किया गया है।

2). क्या राष्ट्रगान को सिनेमाघरों में बजाया जाना सही है?
यह विवाद पहले 1975 व फिर 2016 में उठा। भारतीय सरकार ने सिनेमाघरों में फ़िल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाना अनिवार्य कर दिया तथा फ़िल्म के शुरू होने से पूर्व खड़ा होकर राष्ट्रीय गान को सम्मान देना नियम बनाया गया। इसका कुछ लोगों ने विरोध किया तथा कहा कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान चलाना व खड़ा होकर इसे सम्मान देने पर विवश करना नागरिकों पर देशभक्ति थोपने जैसा है देशभक्त होने के लिए देशभक्ति दर्शाना आवश्यक नही होना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ इसके समर्थन में भी लोगों ने अपनी सँख्या दर्ज करवाई। मिली जुली प्रतिक्रिया होने के कारण कई स्थानों पर झड़पें भी हुई तथा कुछ मामलों में जब कोई व्यक्ति राष्ट्रगान के सम्मान में खड़ा होने से मना करता तो उसे लोगों की दबंगई का सामना करना पड़ता। कभी-कभी कोई व्यक्ति वास्तव में खड़ा होने में असमर्थ हो सकता है या विकलांग हो सकता है परन्तु दबंगई पर उतरे लोग इस बारे में ज्यादा नही सोचते तथा मारपीट पर उतारू हो जाते हैं जिनमें शरारती तत्व भी शामिल होते हैं इसलिए ऐसी घटनाओं के चलते राष्ट्रगान को सिनेमाघरों में बजाया जाना इसकी गरिमा को ठेस पहुँचाना कहा गया। इससे पूर्व इसी प्रकार के विवादों के चलते 1975 में राष्ट्रगान सिनेमाघरों में बजाना बंद किया गया था परन्तु 41 वर्ष पश्चात 2016 में शिक्षित समुदाय की बढ़ती सँख्या को देखते हुए इसे फिर से शुरू किया गया।
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