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भारत जमीन का टुकड़ा नहीं जीता जागता राष्ट्रपुरुष है किसने कहा था?

यह पंक्तियां एक कविता का अंश तथा शीर्षक हैं। इस कविता की रचना आदरणीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने की थी वह एक कुशल राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक प्रसिद्ध कवि भी थे। उनकी सभी कविताएं देश को समर्पित होती थी उनकी कविताओं की श्रृंखला में से ही यह एक कविता "भारत जमीन का टुकड़ा नहीं एक जीता जागता राष्ट्रपुरुष है" विश्व प्रसिद्ध है। इस कविता में उन्होंने भारत देश की भूमि की तुलना एक पौरुष छवि से की थी।

इस कविता में उन्होंने कश्मीर की तुलना मस्तक से की तथा कन्याकुमारी की तुलना देश के चरणों से की। उन्होंने कहा कि यह विशाल समुंदर यह हिन्द महासागर भारत देश के चरण धोता है। उन्होंने बंगाल और पंजाब को देश के विशाल कंधे बताया अपनी इस कविता के जरिए उन्होंने भारत के देशवासियों को अपने देश के प्रति अगाढ़ प्रेम दर्शाने हेतु प्रेरित किया।

अटल बिहारी वाजपेयी जी ने दो बार प्रधानमंत्री रहकर भारत देश की सेवा की है। पहली बार वे 13 दिन के लिए इस पद पर आसीन हुए थे तत्पश्चात वर्ष 1998 में पुनः 5 वर्षों के लिए भारत के प्रधानमंत्री बने। उनका यह सफल कार्यकाल आज तक लोगों के दिलों पर राज करता है। उनकी जो छवि देशवासियों के मन मस्तिष्क पर बनी है वह शायद ही कोई और महापुरुष आज तक बना पाया हो।

अटल जी कविताएं लिखने के साथ-साथ पुस्तक भी लिखा करते थे उनकी कविताओं में नई दिशा, संवेदना, क्या खोया क्या पाया जैसी अमूल्य कृतियाँ शामिल हैं।
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