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फलों के नाम Falo Ke Naam

यह पृष्ठ फलों के नाम हिंदी व इंग्लिश में उपलब्ध करवाने के साथ-साथ फलों के बारे में आधारभूत जानकारी देने के उद्देश्य से बनाया गया है। यह पृष्ठ आपका फलों से सबंधित सामान्य ज्ञान बढ़ाने में अत्यंत सहायक है इसलिए अंत तक पढ़े। यदि आप किसी अन्य फल के बारे में जानकारी चाहते हैं तो कमेंट के माध्यम से पूछें।

1. सेब: Apple (एप्पल)
# सेब एक गुद्दादार फल है इसका ऊपरी छिलका लाल व हरे रंग का होता है इसका छिलका पतला होता है तथा खाए जाने योग्य होता है। इसके अंदर का गुद्दा भी इस फल का मुख्य खाने योग्य भाग है तथा यह गुद्दा भाग सफेद रंग का होता है जो कि हवा के संपर्क में आते ही भूरा रंग पकड़ने लगता है। सेब को उपजाए जाने का मूल स्थान एशिया महाद्वीप है तथा यहीं से यह फल यूरोपीय व्यापारियों की मदद से यूरोप पहुँचा। इस फल को डॉक्टर फल भी कहा जाता है क्योंकि अधिक्तर रोगों की अवस्था में चिकित्सकों द्वारा सेब खाए जाने की सलाह दी जाती है जिसका कारण सेब के सेहत सबंधित लाभ हैं।

2. केला: Banana (बनाना)
# केला पीले व हरे छिलके युक्त फल है इसके अंदर का गुद्दा भाग खाया जाता है जो कि पीलापन लिए हुए सफेद रंग का होता है। केले का नाम अत्यधिक मीठे फलों में शुमार है। केले का छिलका मोटा होने के कारण इसका मात्र 70 प्रतिशत भाग ही खाने योग्य रह जाता है। केला एक लंबा फल है परन्तु यह वृक्षों पर नही बल्कि विशाल पौधों पर लगता है तथा केले के इन पौधों को घास की श्रेणी में रखा जाता है। केला भारत के सबसे प्रचलित फलों में से एक है तथा धार्मिक उष्ठानों में यह प्रशाद के रूप में बाँटा जाता है।

3. अमरूद: Guava (ग्वावा)
# अमरूद भारत में अधिक मात्रा में पाए जाने वाले फलों में से एक है। हालांकि इस फल का जन्म अमेरिका में हुआ है परन्तु भारत की भौगोलिक अवस्था इसके साथ सम स्थितियाँ बनाती है। बिल्कुल शुरुआती अवस्था में अमरूद गहरे हरे रंग का होता है तथा जैसे जैसे यह परिपक्वता की ओर बढ़ता है यह तोता रंग से होते हुए पीले रंग को प्राप्त कर लेता है। अमरूद को छिलके सहित खाया जाता है। इसके मुख्य रूप से खाए जा सकने वाले गुद्दा भाग में बीज मिश्रित होते हैं। कुछ प्रजातियों में बीजों को निकाल पाना संभव नही होता क्योंकि ये पूरे गुद्दा भाग में फैले होते हैं इसलिए इसे बीज सहित भी खाया जाता है। कुल मिलाकर अमरूद का 100 प्रतिशत भाग खाने के प्रयोग में लाया जा सकता है परन्तु इसके कठोर बीज पचाने मुश्किल होते हैं। वहीं इसकी कुछ प्रजातियों में केंद्र में बीजों का अलग गुच्छा होता है जिसे निकाला जा सकता है। बीज रहित अमरूदों का स्वाद सर्वोपरि है। अमरूद का फल आमतौर पर सस्ता होता है व यह एक आसानी से प्राप्त किया जा सकने वाला फल है इसलिए अमरूद को निर्धनों का फल भी कहा जाता है।

4. संतरा: Orange (ऑरेंज)
# यह एक रसीला फल है तथा इसके रंग के आधार पर इसका नाम रखा गया है। संतरे का फल एक अलग रंग रखता है जो लाल तथा पीले के मध्य पड़ता है तथा इसे संतरी या नारंगी रंग कहा जाता है। इस फल का छिलका सामान्यतः मोटा होता है तथा इसके अंदर रस से भरी फलियाँ पंक्ति में बिछी होती हैं। जिस स्थान पर ये फलियाँ एक दूसरे से केंद्र बनाकर मिलती हैं उस स्थान पर संतरे के बीज होते हैं। कच्ची अवस्था में यह फल हरा, कड़वा तथा खट्टास से भरा होता है इसलिए इसे पकने के बाद ही खाया जाता है। संतरे का रस भी प्रचलित व उपयोगी तरल है जिसका सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

5. आम: Mango (मैंगो)
# आम भारत का मूल फल है तथा इसे सर्वप्रथम भारत में ही उगाया गया था। इसके महत्व व भारत से जुड़ाव को देखते हुए आम को भारत का राष्ट्रीय फल घोषित किया गया है। आम एक गाढ़ा रसीला फल है। इसके ऊपरी छिलके का रंग पीला, हरा या कभी कभी लाल होता है। इसकी कुछ प्रजातियाँ चीर कर तथा कुछ चूस कर खाई जाती हैं। अन्य फलों की तरह आम का छिलका खाने योग्य नही है। आम का गुद्दा भाग ही खाने योग्य होता है तथा इसके गुद्दा भाग का रंग पीला होता है। आम के केंद्र भाग में बड़ी गुठली पाई जाती है जो कुल फल का लगभग 30 प्रतिशत होती है। यह गुठली गुद्दा भाग में धसी होती है। आम का फल जब कच्ची अवस्था में होता है तो इसका रंग गहरा हरा होता है जो कि पकने के साथ साथ पीले में परिवर्तित हो जाता है। आम का वैज्ञानिक नाम मेंगीफेरा इंडिका है इस नाम में इंडिका शब्द भारत को दर्शाता है। आम को भारत के साथ साथ पाकिस्तान व बांग्लादेश में भी राष्ट्रीय फल का दर्जा प्राप्त है।

6. पपीता: Papaya (पपाया)
# पपीता बहुत ही लाभदायक फलों में से एक है। इसका पौधा ज्यादा अधिक बड़ा नही होता जबकि इसका फल अन्य फलों की अपेक्षा काफी बड़ा होता है। पपीता मोटाई में गोल होता है तथा लंबाई में बढ़ता है। कच्ची अवस्था में यह फल हरा व पकने के बाद पीला हो जाता है। इसका अंदरूनी गुद्दा भाग खाने के लिए प्रयोग किया जाता है जो कच्चा होने पर हरा व पकने पर लाल अथवा पीले रंग का हो जाता है। इस फल के बीज काले या भूरे रंग के होते हैं तथा गुद्दा भाग के अंदर बने खोल में भरे होते हैं। इन बीजों की संख्या सैंकड़ो में होती है। पपीते का पेड़ आमतौर पर घरों में या घर के आसपास लगाया जाता है। यह फल नरम होता है तथा हाथ के दबाव से इसमें गढ़ा पड़ जाता है।

7. अनार: Pomogranate (पोमोग्रेनेट)
# अनार का फल भारत के लोकप्रिय फलों में से एक है। इसके रस भरे बीज खाए जाते हैं तथा बाकी का बचा सारा हिस्सा छिलके के रूप में होता है। जब अनार का फल कच्ची अवस्था में होता हैं उस समय इसका रंग हरा व इसके बीज सफेद होते हैं। इस अवस्था में यह खट्टा तथा कड़वा स्वाद देता है। परिपक्वता की स्थिति में अनार का छिलका व इसके बीज पूर्णतः लाल रंग को प्राप्त कर लेते हैं तथा इसके खाने योग्य बीज मीठे हो जाते हैं। अनार गर्मियों के मौसम का फल है तथा रक्त को सुचारू बनाने में सहायता करता है। सेहत से सबंधित लाभ होने के कारण रोगी को अक्सर अनार खाने व इसका रस पीने की सलाह दी जाती है।

8. अंगूर: Grapes (ग्रेप्स)
# अंगूर का फल गुच्छों में लगता है तथा हरे, लाल व काले रंग में पाया जाता है। इसका रंग इसकी किस्म पर निर्भर करता है। अंगूर का फल सेहत के लिए लाभदायक तो है ही इसके अतिरिक्त इसकी बिक्री अच्छा आर्थिक लाभ देती है क्योंकि इसकी माँग प्रायः अधिक राहती है। अंगूर का फल बेल पर लगता है व एक बेल पर एक बार में लगने वाले अंगूरों की संख्या हजारों में होती है। इस फल का सेवन भी आसान होता है क्योंकि यह फल छिलके व बीज सहित खाया जा सकता है। अंगूर की लोकप्रियता भारत के साथ साथ अन्य देशों में भी देखी जा सकती है तथा वर्तमान में यह रोजाना खाना खाने के बाद खाए जाने वाले फलों का हिस्सा बन चुका है। हरे, लाल व काले रंगों में पाए जाने वाले अंगूर जब कच्ची अवस्था में होते हैं तब भी इनके रंगों में कोई खास फर्क नही होता परन्तु इनका स्वाद खट्टा होता है जो कि पकने के बाद मीठे रस में परिवर्तित हो जाता है। अंगूर के रस को गला-सड़ा कर शराब भी बनाई जाती है अंगूर से शराब बनाने की विधि शराब बनाए जाने की किसी भी विधि से पुरानी है।

9. बेर: Indian Plum (इंडियन पल्म)
# बेर का फल ग्रामीण क्षेत्रों का फल माना जाता है तथा इसका वृक्ष एक बार लगाए जाने के बाद प्रत्येक वर्ष फल देता रहता है इसके लिए इसे किसी खास सिंचाई की आवश्यकता नही होती बल्कि यह पूर्णतः वर्षा पर निर्भर करता है। आमतौर पर बेरों के वृक्ष पंक्तियाँ बनाकर एक ही स्थान पर सयुंक्त रूप से लगाए जाते हैं जिसे बागबानी या बेरों का बाग कहा जाता है। शरुआती अवस्था में बेर का फल छोटा, गलकसा, खट्टास भरा व कड़वा होता है। पकने के साथ साथ यह फल हरे से तोता रंग पकड़ लेता है तोता रंग में बेर मीठा होता है तथा खाने योग्य हो जाता है परन्तु थोड़ा सख्त होता है। इसके बाद यह पीला हो जाता है तथा अधिक मिठास के साथ कोमलता प्राप्त कर लेता है। इस स्थित में बेरों को तोड़कर बेचा जाता है। यदि पीला होने के बाद भी इसे न तोड़ा जाए तो यह लाल रंग के हो जाते हैं जो इस फल की परिपक्वता की चरम सीमा है इस अवस्था में बेर स्वंय टूट कर नीचे गिरने लगते हैं। बेर का खाने योग्य गुद्दा भाग सफेद रंग का होता है तथा इसके केंद्र में कठोर गुठली होती है।

10. नाशपाती: Pear (पीयर)
# नाशपाती सेब की प्रजाति का हरे रंग का फल है। नाशपाती का आकार नीचे से सेब जैसा तथा ऊपर से संकरा होता है और क्योंकि यह फल नीचे की अपेक्षा ऊपर से ज्यादा पतला होता है इसलिए इसलिए इसका आकार त्रिकोणीय प्रतीत होता है। नाशपाती एक सख्त गुणकारी फल है हालांकि अन्य फलों की अपेक्षा यह फल कम लोकप्रिय है परन्तु फिर भी मौसमानुसार इसकी बिक्री भारत में अच्छी खासी होती है। नाशपाती अपनी कच्ची से लेकर परिपक्वता की स्थित तक हरे रंग की ही रहती है। इसकी मिठास का पता इस पर आए लाल रंग के धब्बों से लगता है। नाशपाती के ठोस होने के कारण इस पर मौसम का प्रभाव अधिक नही पड़ता इस कारण नाशपाती की कुछ प्रजातियाँ पूरा साल फल देती हैं। इसकी कुछ प्रजातियों में मौसमी मार सहन करने की क्षमता इतनी अधिक है कि वे शून्य तापमान से नीचे भी जीवित रहने में सक्षम होती हैं।

11. लीची: Litchi (लीची)
# लीची चैरी परिवार का फल है जिसे छील कर खाया जाता है। यह रसीला व झिल्लीदार होता है इसका ऊपरी छिलका बाहर से खुरदरा होता है। लीची का खाने योग्य भाग सफेद, लचीला व रस से भरा हुआ होता है। इस भाग के अंदर इसके काले रंग के बीज धंसे होते हैं। लीची अपनी कच्ची अवस्था में हरे रंग के खुरदरे फल जैसी होती है तथा जैसे जैसे यह पकती जाती है लाल व भूरे रंग में परिवर्तित हो जाती है। भारत में लीची बहुत कम मात्रा में पाई जाती है तथा इसकी लोकप्रियता भी कम है जो इसे उगाने के लिए किसानों के प्रोत्साहन में बाधा है। भारत के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़ कर लीची की खेती कहीं नही होती।

12. अनानास: Pineapple (पाइनएप्पल)
# अनानास एक खट्टास युक्त मीठा फल है। आमतौर पर अनानास का रस ही पीया जाता है। रसीला व खट्टास युक्त होने की वजह से अनानास सेहत के लिए उपयोगी माना जाता है क्योंकि इसमें शरीर के लिए आवश्यक अम्लीय गुण होते हैं। आर्थिक तौर पर बिक्री के लिए भी अनानास एक लाभदायक फल है। रस के अलावा अनानास को चीर कर भी खाया जा सकता है। अनानास वृक्षों पर उगने की बजाए कृषि के पौधों के ऊपरी सिरों पर लगता है। देखने में यह फल कांटेदार प्रतीत होता है तथा इसके ऊपरी ओर पत्तों का मुकुट बना होता है। अनानास का ऊपरी छिलका उबड़ खाबड़, मोटा व सख्त होता है। इसका यह अलग किस्म का रूप इस फल को आकर्षण प्रदान करता है। छीले जाने पर अनानास अंदर से पीले रंग का निकलता है जो कि स्वादिष्ट रस से परिपूर्ण होता है। अनानास कच्ची अवस्था से लेकर पकने तक एक ही जैसा दिखाई देता है परन्तु कच्ची अवस्था में इसके स्वाद में कड़वाहट होती है जो पकने के बाद मिठास में परिवर्तित हो जाती है।

13. चीकू: Sapota (स्पोटा)
# चीकू मिट्टी रंगा फल होता है तथा जो रंग इसके छिलके का होता है उसी रंग का यह अंदर से भी होता है। चीकू का फल नरम होता है तथा हाथ के दबाव से यह आसानी से टूट जाता है। एक नजर देखने पर चीकू आलू जैसा प्रतीत होता है। कच्ची अवस्था में यह फल हरे रंग का होता है। कच्चे चीकू को खाने से गले में कसाव उत्पन्न हो जाता है जबकि पकने के बाद इसकी मिठास किसी भी अन्य फल से अधिक होती है। चीकू के नरम होने के कारण इसे खाना सुगम होता है। इसके अंदर काले रंग के सख्त बीज पाए जाते हैं। बीजों की संख्या दो या दो से अधिक हो सकती है। जितना नरम यह फल होता है उतने ही अधिक सख्त इसके बीज होते हैं जो कि काले रंग के कठोर आवरण से ढके हुए होते हैं। चीकू का फल छिलके सहित भी खाया जा सकता है तथा छिलके के बगैर भी। जहाँ इस फल का खाने योग्य पिलपिला गुद्दा लाभकारी है वहीं इसके छिलके में भी सेहत सबंधी गुण पाए जाते हैं।

14. कीवी: Kiwi (कीवी)
# कीवी एक फल का नाम भी है तथा एक जीव का नाम भी इसलिए कभी कभी इनमें उलझाव उत्पन्न हो जाता है। कीवी का फल देखने में चीकू जैसा लगता है परन्तु इसका स्वाद व अंदरूनी सरंचना चीकू से बिल्कुल अलग होती है। कीवी के मध्य में केंद्र के चारों ओर काले रंग के बीजों का घेरा बना होता है। इसकी यह सरंचना केंद्र से लेकर गुद्दा भाग से होकर छिलके तक फैली होती है। कीवी का छिलका भूरे रंग का होता है जिसपर रूईनुमा मुलायम काटों की तरह के उभराव होते हैं। एक दो बार देखने मात्र से कीवी व चीकू में अंतर किया जा सकता है। कीवी पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जाने वाला फल है इस कारण मैदानी क्षेत्रों में इसका आयात निर्यात कम होता है। हालांकि फलों की दुकानों पर यह फल आमतौर पर देखा जा सकता है परन्तु क्योंकि इसे पहाड़ी क्षेत्रों से लाना पड़ता है इस कारण इसका मूल्य अधिक हो जाता है। कीवी का खाने योग्य गुद्दा भाग हरे रंग का होता है।

15. खजूर: Dates (डेट्स)
# खजूर के फल अपने छिलके व गुठली के मध्य इमली की तरह का पिसा हुआ परन्तु अत्यंत मीठा अर्ध-तरलीय पदार्थ रखते हैं। खजूर का यही भाग खाने योग्य व स्वादिष्ट होता है। आमतौर पर खजूर को छिलके सहित खाया जाता है। इसका पतला छिलका इसके फल में इतना घुलमिल जाता है कि दोनों के स्वाद में अंतर करना मुश्किल हो जाता है इसलिए यह एक मिश्रित स्वाद देते हैं। खजूर प्रायः भूरे व लाल रंग का होता है मिठास के मामले में इस फल का कोई तोड़ नही है। खजूर गुच्छों में लगता है तथा इसका तना मुक्त वृक्ष 15 से 20 मीटर तक ऊँचा होता है। खजूर के पेड़ पर फल बहुत ही ऊँचाई पर लगते हैं तथा अमूमन पक जाने पर स्वयं ही टूट कर नीचे गिर जाते हैं। खजूर को प्रायः बंद पैकेटों में बेचा जाता है क्योंकि यह फल कई महीनों तक खराब नही होता। खजूर में एक ही गुठली होती है जो गेहूँ के दाने जैसी लगती है परन्तु गेहूँ के दाने से 7 से 8 गुना तक बड़ी होती है। कच्चेपन की अवस्था में खजूर हल्की लालिमा लिए हुए होते हैं तथा पक जाने पर गाढ़े लाल हो जाते हैं। पकने की चरम सीमा पर यह फल भूरे व काले रंग को प्राप्त कर लेते हैं।

16. इमली: Tamarind (टामारिंड)
# इमली बूटों पर लगने वाला फल है। यह फलियों के रूप में बूटों पर लटका होता है। इमली के ऊपरी हल्के सख्त छिलके का रंग हल्का भूरा या मिट्टी रंगा होता है तथा इसके अंदर से निकलने वाला गहरा भूरा फल मुख्य रूप से प्रयोग में लाया जाता है। खट्टेपन में इमली का कोई तोड़ नही जितने भी खट्टे फल पाए जाते हैं उनमें इमली का नाम सर्वोपरि है। इमली का प्रयोग प्रायः चटनी बनाने के लिए होता है। होटलों पर प्रयोग की जाने वाली लाल चटनी, सॉस व कैचअप में खट्टापन डालने के लिए इमली का प्रयोग किया जाता है। इमली के बूटों को रोपे जाने के कुछ समय बाद ही इन पर फल लगने लगते हैं जबकि इन बूटों का आकार समय के साथ बढ़ता जाता है व अपनी चरम सीमा पर ये वृक्ष बन जाते हैं। इमली का फल लच्छेदार होता है तथा इन लच्छों के मध्य में खट्टा पदार्थ होता है जो इस फल का मूल है।

17. आलूबुखारा: Prune (पृन)
# आलूबुखारा खट्टे मीठे स्वाद से युक्त फल होता है इस फल के अंदर पाया जाने वाला खाने योग्य गुद्दा भाग पीला तथा रसीला होता है। आलूबुखारा का छिलका खट्टास लिए होता है और क्योंकि यह फल छिलके सहित खाया जाता है इसलिए इस फल का मिश्रित स्वाद आता है। आमतौर पर भारत में बिकने वाले आलूबुखारे का छिलका गाढ़े लाल रंग का होता है। यह फल बहुत सी किस्मों में पाया जाता है इसकी कुछ किस्में काले व पीले रंग में भी पाई जाती हैं। भारत में आलूबुखारा की सबसे कम प्रयोग की जाने वाली प्रजातियों में हरे रंग का आलूबुखारा आता है जो देखने में बहुत कम मिलता है। आलूबुखारा उन फलों में शामिल है जिन्हें भारत में लोकप्रियता नही मिली है। इस फल का प्रयोग विक्रेताओं द्वारा जैम तथा मुरब्बा बनाने के लिए किया जाता है जो इसे आर्थिक फायदे हेतु महत्वपूर्ण बनाता है।

18. खरबूजा: Muskmellon (मस्कमेलन)
# खेत में उगाए जाने वाले फलों में खरबूजा सर्वश्रेष्ठ है। उत्तरी भारत के साथ साथ देश के अन्य हिस्सों में भी खरबूजा बहुतयात तौर पर उगाया जाता है। खरबूजा गर्मियों के मौसम में उगाया जाने वाला फल है तथा खेतों में उगाए जाने के कारण मौसमी समय में इसकी उपलब्धता बहुत अधिक हो जाती है। खरबूजे का छिलका मोटा व लचीला होता है। कच्ची अवस्था में खरबूजे का रंग हरा होता है तथा इस पर गहरे हरे रंग की धारियाँ बनी होती हैं। कच्चे खरबूजे का गुद्दा भाग भी हरे रंग का तथा बेस्वाद होता है। जब खरबूजा पक जाता है तो यह पीले रंग का हो जाता है तथा इसकी धारियाँ हल्के हरे रंग की हो जाती है जिस कारण बाहर से देखने पर यह फाड़ीनुमा फल की तरह प्रतीत होता है जबकि इसके अंदर का गुद्दा भाग लाल व हर तरफ से एक समान हो जाता है यह गुद्दा भाग फाड़ियों में नही बंटा होता। इस फल के मध्य में बीजों का एक गुच्छा होता है तथा बीजों व छिलके के मध्य का लाल रंग का गुद्दा भाग खाने हेतु प्रयोग किया जाता है।

19. तरबूज: Watermelon (वाटरमेलन)
# तरबूज का फल खेत में उगाया जाता है इस फल का आकार प्रायः ज्यादातर फलों से बड़ा होता है। तरबूज का बाहरी छिलका हरे रंग का होता है तथा इस पर गहरे हरे रंग की धारियाँ बनी होती हैं। अंदर से खाने योग्य गुद्दादार भाग मीठे रसनुमा पानी से भरा होता है तथा लाल रंग का होता है। तरबूज के इस मीठे लाल रंग का प्रतिशत पूरे फल का 90 प्रतिशत होता है। इसके बीज पूरे फल में फैले होते हैं जिस कारण इसे टुकड़ों में काटकर पहले बीज अलग किए जाते हैं फिर खाया जाता है। तरबूज गर्मियों का फल है तथा शरीर में पानी व रक्त की पूर्ति करने में सहायक है। मौसम में इसकी पैदावार बहुत अधिक मात्रा में होती है जिस कारण इसका मूल्य कम ही रहता है। इसकी खरीददारी व माँग गर्मीयों के मौसम में चरम पर होती है। खरबूजा व तरबूज दोनों फलों का समय एक ही है।

20. आँवला: Gooseberry (गुज़बरी)
# आँवला या आमला हरे रंग का फल होता है जिसका स्वाद खट्टा होता है। आँवला पतले तने वाले झाड़ीनुमा वृक्ष पर लगते हैं। इस फल का ऊपरी छिलका चिकना तथा इसके खाने योग्य गुद्दा भाग में ही सम्मिलित होता है। आँवला खटाई भरे रस से परिपूर्ण होता है व स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। पहाड़ी क्षेत्रों में आँवला की ऊपज अधिक होती है तथा पहाड़ी फल होने के कारण अन्य क्षेत्रों में इसकी उपलब्धता कम ही देखने को मिलती है। एक नजर देखने पर आँवला पानी से भरी हरे रंग की गेंद जैसे लगते हैं। काटे जाने पर इसके अंदर से निकलने वाली गुठली गहरे हरे रंग की होती है जो प्रायः गोल आकार में होती है व इस पर उभरी हई सख्त धारियाँ बनी होती हैं। आँवले का मुरब्बा व रस दोनों ही स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं।

21. आडू: Peach (पीच)
# आडू का फल देखने में आलूबुखारा जैसा प्रतीत होता है परन्तु जहाँ आलूबुखारा पूर्णतः लाल रंग का होता है वही आडू के लाल रंग पर पीले धब्बे होते हैं जो इसे दूर से देखने पर खुरदरा प्रतीत करवाते हैं। आडू का आकार गोल होता है तथा इसका स्वाद खट्टास युक्त व साधारण मीठा होता है। आडू की वातवरण के साथ मिलती प्रवृति को देखते हुए पाया गया कि यह भारत का मूल फल नही है इसे यहाँ बाद में लाया गया है। आडू मूलतः ईरान देश का फल है। आडू का ऊपरी छिलका लाल, गुद्दा भाग पीला तथा इसकी गुठली गहरे लाल रंग की होती है। छोटे सेब जैसा दिखाई देने वाला यह फल भारत में कम ही बिकता है तथा मुख्य फलों की श्रेणी से बाहर है। भारत में लोकप्रियता कम होने के कारण इस फल का उत्पादन भी कम ही होता है।

22. जामुन: Jambul/ Black Plum (जाम्बुल/ ब्लैक पल्म)
# अपने नाम के अनुरूप यह फल जमुनी (वॉयलेट) रंग का होता है। इस फल में हल्की खट्टास होती है तथा खाने में यह मीठा होता है। जामुन का वृक्ष हर प्रकार के मौसम की मार सहने में सक्षम है तथा बिना किसी सिंचाई के मात्र वर्षा पर निर्भर रहकर फल देता रहता है। कृषि क्षेत्रों में जामुन का वृक्ष खेतों के कोनों पर तथा खेतों को अलग करने वाली पंक्ति में लगाया जाता है क्योंकि यह वृक्ष छाया व फल दोनों देने में सक्षम है। जामुन का पतला छिलका व इसका अंदर का रसीला गुद्दा भाग दोनों खाए जा सकते है तथा स्वादिष्ट होते हैं। जामुन फल के कुल भाग का लगभग 80 प्रतिशत खाया जा सकता है जबकि इसके मध्य में कठोर ना खाने योग्य गुठली होती है जो इसके कुल भाग का 20 प्रतिशत होती है। जामुन गर्मियों के मौसम का फल है।

23. सीताफल: Castered Apple (कस्टर्ड एप्पल)
# सीताफल एक फल होने के साथ साथ सब्जी की तरह भी प्रयोग किया जा सकता है। इसका अन्य नाम शरीफा है। सीताफल का रंग फीका हरा होता है तथा इसका बाहरी छिलका गुंदा हुआ प्रतीत होता है। सीताफल के बीज काले रंग के होते हैं जो इसके खाने योग्य गुद्दा भाग में जगह जगह धँसे हुए होते हैं। अंदर से यह फल पीलापन लिए हुए सफेद या पूर्ण सफेद होता है। स्वाद में यह फल मीठा होता है तथा अपने सेहत सबंधी लाभदायक गुणों के लिए मशहूर है। इस फल को स्वाद के लिए नही बल्कि सेहतमंद रहने के लिए खाया जाता है। सीताफल भारत का मूल फल नही है इसलिए इसका भारतीय नाम कैसे पड़ा इस पर विवेचना होती रहती है।

24. मौसंबी: Sweetlime (स्वीटलाइम)
# मौसंबी या मौसमी खट्टे-मीठे रस से भरा हुआ फल है। इसका स्वाद बहुत पसंद किया जाता है। मौसंबी की सरंचना संतरे के जैसी होती है तथा यह नींबू की प्रजाति का फल है। मौसंबी के छिलके का रंग हरा होता है तथा पहली नजर में यह फल कच्चे संतरे जैसा प्रतीत होता है जबकि हरे रंग में ही यह अपनी परिपक्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। मौसंबी के फल में मिठास आते ही इस पर पीले धब्बे पड़ने लगते हैं। मौसंबी की अंदरूनी सरंचना संतरे व नींबू के जैसे ही फडीयों की गोल श्रृंखला में होती है जो आपस में जुड़ी होती हैं तथा बीज मध्य में होते हैं। मौसंबी के बीज सफेद रंग के तथा गेहूँ के दाने के आकार के लगभग होते हैं। सभी फलियाँ खट्टे-मीठे रस से भरी होती हैं। मौसंबी का रस बहुत पसंद किया जाता है। मौसंबी के फल की बहुत सी किस्में पाई जाती हैं जिसमें कुछ किस्मों की अंदरूनी सरंचना गहरी लाल होती है। मौसंबी जूस की दुकानों का मुख्य फल है।

25. अंजीर: Fig (फिग)
# अंजीर ऊपरी तौर पर जमुनी रंग का फल है तथा इसके अंदर का बीजनुमा भाग लाल रंग का होता है। यह फल ताजी अवस्था में खाने की बजाए सुखाकर खाए जाने के लिए अधिक प्रसिद्ध है। इस फल का छिलका मोटा होता है जिस कारण इसका 60 प्रतिशत भाग ही खाने योग्य रह जाता है। साबूत अंजीर देखने में प्याज जैसा लगता है। जब यह फल पूर्णतः पक जाता है तब इसे सुखाया जाता है व खाने के लिए प्रयोग किया जाता है। अंजीर जैसे-जैसे सूखता है इसकी मिठास बढ़ती जाती है। सूखाने के बाद इस फल को पीसा जाता है तथा दूध में घोलकर पीने से यह फल सेहत सबंधी अनेक लाभ देता है कब्जी की शिकायत में अंजीर एक रामबाण इलाज है।

26. नारियल: Coconut (कोकोनट)
# नारियल एक तैलीय फल है इसका स्वाद हल्का फीका किंतु स्वादिष्ट होता है। इस प्राकृतिक तेल युक्त फल में हल्की मिठास होती है। नारियल का फल लंबे पेड़ों पर लगता है तथा ये पेड़ तना मुक्त होते हैं। नारियल इसके वृक्ष के ऊपर बने पत्तों के छज्जे के केंद्र में लगता है। नारियल का फल ऊपर से झार तथा सख्त खोल से ढका होता है तथा अंदर से खोखला होता है। ताजे नारियल यह खोखला भाग मीठे पानी से लगभग आधा भरा होता है। यह पानी भी गुणकारी होता है तथा इसकी विशेष माँग रहती है। सूखने के बाद या ताजी अवस्था में नारियल का अर्धसख्त गुद्दा भाग खाया जाता है। नारियल के फल मुख्यतः समुंद्री किनारों पर उगते हैं इसलिए भारत के केरल राज्य जो कि समुंद्र के किनारे पर बसा है में उच्च किस्म के नारियल पाए जाते हैं। इस फल का हिन्दू धर्म में अपना एक अलग महत्व है। नारियल के ताजे पानी भरे फल को कोई नया कार्य करने से पूर्व द्वार पर फोड़ना शुभ माना जाता है। तथा फोड़ने के बाद इसके टुकड़ों को देवों का प्रशाद मानकर बाँटा जाता है। इस फल के गुद्दा भाग का छिलका पतला व भूरा होता है व खाने योग्य मुख्य भाग चटक सफेद होता है।

27. आलूबालू: Cherry (चेरी)
# पहाड़ी इलाकों में उगाया जाने वाला यह फल छोटे आकार का व गहरा लाल होता है। इसका स्वाद खट्टास से परिपूर्ण व मीठा होता हैं। इस फल को अधिक्तर इलाकों में चेरी के नाम से जाना जाता है। इस फल का आलूबालू व गिलास नाम कुछ ही क्षेत्रों में प्रचलित है। चेरी देखने में छोटे सेब जैसी लगती है तथा इसका आकार लगभग एक इंच के आसपास होता है। चेरी का फल छिलके से लेकर इसकी आंतरिक सरंचना तक लाल रंग का ही होता है इसके अतिरिक्त यह फल हरे रंग में भी पाया जाता है। भारत में इस फल का उत्पादन बहुत कम होता है।

28. शहतूत: Mulberry (मलबरी)
# शहतूत जिसे क्षेत्रीय भाषाओं में सिर्फ "तूत" कहा जाता है एक मीठा फल है। इसके वृक्ष की टहनियाँ अपने लचीले पन के लिए जानी जाती हैं। यह फल गुच्छों में लगता है तथा देखने मे स्वयं भी फलों का सूक्ष्म गुच्छा प्रतीत होता है। उत्तरी भारत मे उगाया जाने वाला यह फल शुरुआती अवस्था में सफेद रंग का होता है तथा जैसे जैसे यह पकता है अपना रंग सफेद से हरा व हरे से लाल कर लेता है। परिपक्वता की चरम सीमा पर शहतूत काले रंग को धारण कर लेता है। कच्ची अवस्था में यह फल खट्टा होता है तथा जैसे जैसे पकता है वैसे वैसे मिठास प्राप्त करता जाता है।

29. सिंगाड़ा: Water Chestnut (वाटर चेस्टनट)
# सिंगाड़ा एक ऐसा फल है जिसे फल के रूप में तो प्रयोग किया ही जाता है परन्तु यदि इसे सूखा कर पिसवा लिया जाए तो इसके आटे से रोटियाँ तथा व्रत में खाए जा सकने वाले अन्य खाद्य पदार्थ बनाए जा सकते हैं। सिंगाड़ा की प्रवृति सभी फलों से अलग है क्योंकि एक ओर जहाँ सभी फल जमीन पर उगते हैं वहीं सिंगाड़ा पानी की सतह पर तैरता हुआ परिपक्वता को प्राप्त करता है। इस फल के पौधे को पनपने के लिए पानी के नीचे कीचड़ की अवस्था चाहिए होती है ताकि इसकी जड़ें बिना बल लगाए आसानी से फैल सकें। इसलिए इस फल को विशेष किस्म में कीचड़ युक्त जलाशयों में उगाया जाता है जिस कारण इसे जलाशय का फल भी कहा जाता है। सिंगाड़ा अपने बनने की शुरुआत सफेद रंग के फूल से करता है तथा धीरे धीरे हरे रंग से होकर लाल रंग में परिवर्तित हो जाता है। इस फल का खाने योग्य भाग सफेद रंग का होता है तथा आकार त्रिकोणीय होता है। हरे व लाल रंग के इस मिश्रित फल के दोनों और कांटे निकले होते हैं देखने में यह फल सख्त लगता है परन्तु वास्तव में नरम होता है।

30. करौंदा: Carissa Carandas (कैरिसा कैरण्ड्स)
# करौंदे का फल छोटा व लाल होता है। इसका पौधा झाड़ीनुमा होता है तथा आकार व ऊँचाई में छोटा होता है। करौंदे का स्वाद खट्टास से भरा होता है इसलिए इसका प्रयोग प्रायः अचार बनाने में किया जाता है। खट्टे फलों के शौकीन लोगों की यह पहली पसंद है क्योंकि खट्टे फलों में यह अग्रिमता रखता है व रोग निवारक का काम करता है। करौंदा अंदर से गुद्दादार व सफेद होता है।

31. स्ट्रॉबेरी: Strawberry (स्ट्राबरी)
# स्ट्रॉबेरी एक अंग्रेजी नाम है तथा इसी नाम से यह फल भारत में भी जाना जाने लगा है। यह फल बेल पर लगता है तथा शुरुआती अवस्था में इसका रंग सफेद होता है। पकने के बाद स्ट्रॉबेरी का ऊपरी छिलका गहरे लाल रंग का हो जाता है। यह फल त्रिकोणीय रूप में होता है तथा इसके छिलके पर छोटे छोटे कण उभरे हुए होते हैं जो इसे देखने व छूने पर महसूस किए जा सकते हैं। स्ट्रॉबेरी एक रसीला व स्वादिष्ट फल है व अपनी अलग किस्म की महक के लिए भी जाना जाता है। स्ट्रॉबेरी की महक के कारण इससे बने व्यंजनों को पहचाना जा सकता है तथा इसी फल के नाम पर इससे बने व्यंजनों का नाम रखा जाता है।

32. खुबानी: Apricot (एप्रीकॉट)
# खुबानी का फल देखने में आडू जैसा प्रतीत होता है क्योंकि यह फल आडू वनस्पति परिवार का सदस्य है। परन्तु यह कई मायनों में आडू से अलग होता है एक ओर जहाँ आडू लाल रंग का होता है वहीं परिपक्व अवस्था में खुबानी का फल पीला रंग धारण करता है। स्वाद में यह फल मीठा होता है तथा इसके पकने के अंदाजा इसके छिलके पर आई लाली से लगाया जा सकता है। इस फल पर एक दबाव लाइन बनी होती है तथा इसका खाने योग्य गुद्दा भाग पीले रंग का होता है। खुबानी के मध्य में भूरे रंग की गुठली होती है। इस सख्त खोल से बनी गुठली को तोड़ने पर अंदर से बादाम जैसी सरंचना वाला बीज निकलता है इसे भी खाने हेतु प्रयोग में लाया जा सकता है। हालांकि खुबानी का बीज औषधीय गुणों के लिए लाभदायक है परन्तु इसे अधिक मात्रा में खाने पर यह नुकसान पहुँचा सकता है।

33. कमरख: Starfruit OR Carambola (स्टारफ्रूट या करम्बोला)
# कमरख को ताराफल भी कहा जाता है क्योंकि यह तारे जैसी लंबी सरंचना जैसा होता है तथा जब इसे काटा जाता है तो इसके टुकड़े पंच मुखी तारों की आकृति में कटते हैं। यह एक खट्टा फल है जिस कारण करौंदे की तरह इसका भी अचार बनाने में प्रयोग किया जाता है। इस फल का ऊपरी छिलका चिकना होता है तथा स्पर्श करने पर यह फल नरम व मुलायम लगता है। इसकी अंदरूनी सरंचना पीलक लिए हुए सफेद होती है तथा इसके केंद्र तारा रूप में सरंचित होता है तथा सफेद रंग का होता है। दक्षिण एशिया में इस फल की बहुतयात है परन्तु फिर भी भारत में अन्य फलों की अपेक्षा इसका उत्पादन बहुत कम होता है।

34. रसभरी: Cape Gooseberry OR Ground Cherries (केप गुज़बेरी या ग्राउंड चेरीज़)
# यह फल एक प्याज के आकार के पतले बाहरी झिल्लीनुमा आवरण से ढका हुआ होता है। जब यह फल पक जाता है तो यह आवरण और भी पतला होकर सूख जाता है तथा इसे आसानी से तोड़ा जा सकता है। इस आवरण के अंदर से केसरिया रंग का मूल फल निकलता है जो आकार में गोल होता है। इस फल के ऊपरी आवरण का रंग नीलेपन में होता है।

35. किशमिश: Raisins (रेज़ीन्स)
# यह कोई अलग फल नही है बल्कि अंगूरों का सूखा हुआ रूप है। जब अंगूर सुखाए जाते हैं तो इनके अंदर का मीठा रस अर्धतरलीय रूप धारण कर कृष्टलों में संकुचित हो जाता है तथा अंगूर का आकार छोटा हो जाता है व इसका ऊपरी छिलका सिकुड़ जाता है। अंगूर के इसी रूप को किशमिश कहा जाता है जो मेवे के रूप में प्रयोग की जाती है। किशमिश का स्वाद अंगूर की अपेक्षा बहुत बदल जाता है इस कारण अनजान व्यक्ति इस बात का पता नही लगा पाता कि किशमिश अंगूर से बनी हैं।

36. नारंगी: Orange (ऑरेंज)
नारंगी संतरे का ही दूसरा नाम है हालांकि क्षेत्रीय भाषाओं के अनुसार संतरे व नारंगी की किस्में अलग हो सकती हैं परन्तु दोनों एक ही फल हैं। कभी कभी संतरे व नारंगी को अलग अलग फल समझ लिया जाता है।

37. कीनू: Kinnow (किनउ)
# यह संतरे जैसा फल है तथा संतरे की प्रजाति से सबंधित है। इस फल को संतरा समझ लिया जाता है परन्तु संतरे की अपेक्षा इसका आकार बड़ा होता है व रंग अधिक चमकीला होता है। कीनू के अंदर पाई जाने वाली रसभरी फलियों का आकार भी संतरे की फलियों से बड़ा होता है। तथा संतरे की अपेक्षा कीनू में मिठास ज्यादा होती है।

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