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OCR Full Form in Hindi ओसीआर का पूरा नाम

यदि आपका काम डाटा एंट्री का है अर्थात आपको पुस्तकों में लिखा हुआ डाटा कंप्यूटर में या अपने मोबाइल में बार-बार टाइप करना पड़ता है और आप इस बेकार की मेहनत से थक चुके हैं तो OCR तकनीक आपके लिए रामबाण साबित हो सकती है। कंप्यूटर से जुड़े अधिकतर लोग इस तकनीक के बारे में जानते हैं लेकिन कुछ यूज़र्स ऐसे हैं जो अभी भी इस तकनीक से अनजान है तो आज आप जिस तकनीक के बारे में जानने जा रहे हैं यह तकनीक आपकी किस्मत बदल सकती है। क्योंकि आप OCR तकनीक का प्रयोग कर सेकिंड के हिसाब से बुक में लिखा हुआ डाटा अपने मोबाइल में प्रिंट कर सकते हैं और उसे एडिट भी कर सकते हैं तो OCR टेक्निक आखिर होती क्या है, यह कहां से शुरू हुई, इसे किसने शुरू किया और इसकी फुल फॉर्म क्या है इस बारे में जानने के लिए इस पेज को अंत तक पढ़े:

OCR की फुल फॉर्म होती है ऑप्टिकल करैक्टर रिकग्निशन (Optical Character Recognition)
तथा इस तकनीक का मुख्य कार्य होता इमेज पर छपे टेक्स्ट की पहचान करके उन्हें डेटा में बदलना अर्थात इस तकनीक के प्रयोग से इमेज पर बने टेक्स्ट वैसे ही बन जाते हैं जैसे हम कंप्यूटर में लिखते हुए बनाते हैं। इसलिए हम इमेज में तो किसी अक्षर को एडिट नहीं कर सकते किंतु जब हम OCR तकनीक से उन्हें फेच कर लेते हैं यानी कि डिजिटल अक्षरों में परिवर्तित कर लेते हैं तो हम उसमें से कुछ भी एडिट कर सकते है या कोई लाइन रिमूव कर सकते हैं अथवा कोई लाइन ऐड कर सकते हैं। इस प्रकार मनचाहा परिवर्तन करने के बाद हम उस डेटा के रूप में फोन या कम्प्यूटर में बने टेक्स्ट को एक इमेज की फॉर्म में दोबारा निकाल सकते हैं इस प्रकार किसी भी इमेज में हमारे द्वारा चाहा गया कोई भी परिवर्तन बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है।

OCR तकनीक का दूसरा सबसे बड़ा फायदा है किताबों की छपाई को डेटा में बदलकर डिजिटल किताबें बनाना। मान लीजिए आप के पास एक पुस्तक है और आपको उसका टेक्स्ट अपनी पेन ड्राइव में चाहिए या फिर मोबाइल में चाहिए तो आप इस तकनीक का प्रयोग कर सकते हैं उदाहरण के तौर पर आपके पास एक कॉपी है जिसमें आपने अपना सिलेबस से लिखा हुआ है लेकिन आप चाहते हैं कि आप उस सिलेबस को मोबाइल में लिखकर टेक्स्ट के रूप में फोन में सुरक्षित रखे तो फिर आप क्या करेंगे? आप यहाँ OCR तकनीक का प्रयोग कर सकते हैं। कॉपी का टेक्स्ट जो कि जो भी आपने लिखा हुआ है उसकी फोटो क्लिक करेंगे और उसको OCR तकनीक के जरिए एक्सेस कर लेंगे जिससे कि आपके कॉपी पर लिखे हुए अक्षर आपके कंप्यूटर में आ जाएंगे और आपके पास एक डेटा बन जाएगा जिसे हम कहते हैं डिजिटल डेटा। इस डेटा में अक्षर हमारे पास डिजिटल में लिखे हुए आएंगे। इस प्रकार की लिखित जानकारी की जरूरत हमें बहुत अधिक पड़ती है कई बार किताबों में जो लिखित डेटा होता है हमें उसे भी सर्च करने की जरूरत पड़ जाती है इस प्रकार की आवश्यकता पड़ने पर भी यह तकनीकी काम आती है।

तीसरा सबसे बड़ा फायदा OCR तकनीक का यह है कि कई बार हमारे पास जो पुस्तक होती है वह किसी और लैंग्वेज में होती है लेकिन हमें उस पुस्तक को अपनी भाषा में चेंज करना पड़ता है। अब इसके लिए अगर हम पुस्तक की इमेज भी ले लेते हैं तब भी हम उसकी भाषा को कन्वर्ट नहीं कर सकते हैं अब ऐसी स्थिति में हम क्या करेंगे? OCR तकनीक का प्रयोग करके उस पुस्तक के किसी भी पेज का पूरा डेटा लेंगे डिजिटल वर्ड्स में कन्वर्ट करेंगे और डिक्शनरी ऐप पर जाकर या फिर Google ट्रांसलेटर की सहायता से ट्रांसलेट करके देख लेंगे कि इस पुस्तक में क्या लिखा है। इस प्रकार यह तकनीक हमें उन पुस्तकों को भी पढ़ पाने में सक्षम बनाती हैै जिस भाषा का हमें ज्ञान नही होता। इस प्रकार के फायदे के रूप में यह तकनीक वर्तमान में बहुत अधिक प्रयोग हो रही है दूसरी लैंग्वेज की पुस्तक पढ़ने वाला व्यक्ति मान लीजिए हिंदी जानता है लेकिन इंग्लिश की पुस्तक पढ़ना चाहता है तो वह पुस्तक के पेज की फोटो खींचेगा और उसे ट्रांसलेट करके देख लेगा कि उसमें क्या लिखा है।

OCR तकनीक का अगला फायदा यह है कि हमें कई बार पुस्तक में से कोई वर्ड या कोई लाइन सर्च करनी होती है कि वह लाइन कहां पर है तो ऐसे में हम OCR का प्रयोग कर सकते हैं जैसे कि हमें एक पुस्तक के पृष्ठ पर कोई अक्षर ढूंढना है या फिर यह देखना है की कोई शब्द इस पुस्तक में कितनी बार आया है तो इसके लिए हमें पूरा के पूरा पेज ध्यान से पढ़ना पड़ता है लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं है अगर आपके पास OCR तकनीक है और आपने उसे अपनी पुस्तक को डिजिटल में कन्वर्ट कर लिया है तो कहीं भी कोई भी वर्ड या अक्षर सर्च कर सकते हैं चाहे इसमें कोई टॉपिक हो चाहे टेक्स्ट हो। इस प्रकार ओसीआर तकनीक हमारी बहुत सहायता करती है आमतौर कोई विशेष लाइन ढूंढने के लिए हमें पूरी बुक को पढ़ना पड़ेगा जिसमें बहुत अधिक समय लगता है इसलिए बिना समय गवाएं कुछ ही सेकंड में हम पुस्तक में से कोई भी लाइन में कोई भी टेक्स्ट सर्च कर सकते हैं।

OCR तकनीक का अगला फायदा यह है कि ब्लाइंड स्टूडेंट्स के लिए यह तकनीक बहुत ही फायदेमंद है नॉर्मल पुस्तकों को यदि कोई ब्लाइंड स्टूडेंट पढ़ना चाहता है तो इस तकनीक की सहायता से हम टेक्स्ट को डिजिटलाइज़ करेंगे और उसके बाद उसे ब्लाइंड लैंग्वेज में कन्वर्ट कर देंगे जिससे ब्लाइंड स्टूडेंट्स सामान्य पुस्तकों को आसानी से पढ़ सकेंगे। शुरुआत में इस तकनीक का अविष्कार ब्लाइंड स्टूडेंट्स को ध्यान में रखकर ही किया गया था जिससे उन स्टूडेंट्स को सामान्य पुस्तकें पढ़ने में आसानी हो सके और वे सामान्य ज्ञान अर्जित कर सकें।

अब थोड़ा जान लेते हैं कि OCR तकनीक काम कैसे करती है दरअसल जब हमारे पास कोई पुस्तक होती है और हम उसे मोबाइल से या फिर एक कैमरे में क्लिक करते हैं तो वह छोटे-छोटे डॉट्स में जिन्हें पिक्सल्स कहते हैं में इमेज बनती है उसमें से कुछ पिक्सल्स डार्क होते हैं जहां पर कोई इमेज होती तथा जहाँ पर बैकग्राउंड होता है वहां पर पिक्सल्स फीके होते हैं। जिस वजह से जब हम OCR तकनीक का प्रयोग किसी इमेज पर करते हैं तो वह जो डार्क डॉट्स होते हैं OCR उनकी पहचान करता है और मिलान करता है कि यह किस अक्षर से मैच खा रहे हैं इंग्लिश की बुक को OCR करना है तो ABC के अक्षरों से मैचिंग होगी तथा 0 से 9 तक के नम्बर्स को भी मैच किया जाएगा। इसी प्रकार हिंदी में क, ख, ग की मैचिंग होगी। जो अक्षर मैच होता जाएगा वह डिजिटलाइज होता जाएगा।

OCR तकनीक का शुरुआती अविष्कार वर्ष 1914 में इमैनुअल गोल्डबर्ग ने किया था तथा उस समय यह तकनीक ब्लाइंड विद्यार्थोयों के लिए बनाई गई थी लेकिन बाद में इस तकनीक का पेटेंट IBM कंपनी ने खरीद लिया था। पेटेंट यानी कि वह अधिकार जिसके तहत किसी भी अविष्कार को बनाना, उसको विकसित करना और उसकी उसको बेचना उसी का अधिकार हो जाता है जिसने वह पेटेंट खरीदा होता है। जिसके पास अविष्कार का पेटेंट होता है वही उस तकनीक का विकास कर सकता है और फायदा कमा सकता है। ओसीआर तकनीक का पेटेंट खरीदने वाली IBM की फुल फॉर्म होती है इंटरनेशनल बिजनेस मशीन।

OCR तकनीक अब धीरे-धीरे मोबाइल्स में आ चुकी है। मोबाइल एंड्रॉयड तथा iOS प्लेटफार्म पर इसकी बहुत सी एप्लीकेशंस बन चुकी हैं जिनका प्रयोग करके हम पहले पृष्ठ की फोटो ले सकते हैं और फोटो लेने के बाद हम उसे OCR एप्लीकेशन में डाल कर इमेज पर लिखे टेक्स्ट का डिजिटल डेटा बना सकते हैं लेकिन अभी यह तकनीक पूरी एक्यूरेसी के साथ इंग्लिश लैंग्वेज में ही उपलब्ध है। लेकिन धीरे-धीरे इस तकनीक को अन्य भाषाओं में भी उपलब्ध करवाया जा रहा है।

बात की जाए हिंदी की तो हिंदी लैंग्वेज में भी OCR तकनीक उपलब्ध है लेकिन फिलहाल आप इसे इंग्लिश की तरह मुफ्त में प्रयोग नही कर सकते। इसके लिए आपको थोड़े पैसे चुकाने पड़ते हैं तो इसलिए यदि आपको OCR तकनीक बहुत अधिक आवश्यकता पड़ती है तो आप इसका हिंदी वर्जन खरीद सकते हैं लेकिन यदि आपको फिलहाल इसकी आवश्यकता नही है तो प्रतीक्षा कीजिए जल्द ही OCR का मुफ्त हिंदी वर्जन भी एप्लीकेशन के रूप में आ जाएगा।

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