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भारत के इतिहास में विदेशी यात्रियों के वृत्तांत का क्या महत्व है

समय-समय पर अनेक विदेशी यात्री भारत आए हैं और उन्होंने भारत में जो कुछ भी देखा उसके संबंध में अनेकों लेख लिखे हैं, इन्हीं में हम चीनी व अरबी यात्रियों के वृत्तांत को ले सकते हैं, जैसे कि -

फाह्यान नामक चीनी यात्री चंद्रगुप्त द्वितीय के शासन काल के समय भारत में आया था, यह भारत में आने वाला प्रथम चीनी यात्री था उसने यहां पर लगभग 15 वर्ष तक निवास किया और अपनी पुस्तक में भारत की दशा का तत्कालिक दशा का वर्णन किया, इस प्रकार उस समय भारत की जो भी समाज की दशा थी उसका विस्तार पूर्वक वर्णन हमें फाह्यान की पुस्तक में मिलता है

इसके बाद इंसान नामक एक चीनी यात्री भारत आया इसे यात्रियों के सम्राट के नाम से भी जाना जाता है, हएनसांग के समय भारत आया उस समय भारत में हर्षवर्धन का शासन चल रहा था, इंसान ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'पाश्चात्य संसार' में हर्ष कालीन भारत के समय की जो भी सामाजिक और धार्मिक स्थिति थी उसके बारे में वर्णन किया है

इसके बाद इतसिंग नामक चीनी यात्री भारत आया, उसके लेखों से हमें सातवीं सदी के भारत के विषय में अत्यधिक महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है इन चीनी यात्रियों के अलावा कुछ और भी यात्री भी रहे हैं जो भारत की यात्रा पर आए थे

प्राचीन भारत के इतिहास को जानने के लिए हमें अरबी यात्रियों के वृतांत से भी बहुत सहायता मिलती है, जैसे कि मोहम्मद बिल अलबरूनी, जो एक अरबी यात्री था, वह 11वीं शताब्दी में महमूद गजनवी के आक्रमण के समय भारत आया था और उसने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'तहकीक ए हिंद' में तत्कालीन भारत की राजनीतिक सामाजिक तथा धार्मिक दशा का विस्तृत वर्णन किया है, साथ ही सुलेमान और अल मसूदी जैसे अनेक यात्री भारत आए थे, जिन्होंने भारत के बारे में अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं

निष्कर्ष - इस प्रकार हम कह सकते हैं कि विदेशी यात्रियों के विवरण ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि उस समय की जानकारी हमें इनके द्वारा लिखित लेखों से मिलती है, लेकिन यहां पर यह ध्यान रखना आवश्यक है कि जब हम इनके लेखों से के आधार पर भारत का इतिहास लिखें, तो हमें सावधानी पूर्वक केवल पुष्टि करने योग्य तथ्य को ही इतिहास में सम्मिलित करना चाहिए
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