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चीनी यात्रियों का क्रम क्या है

भारत के इतिहास के संबंध में यदि हम बात करें तो मुख्य रूप से तीन चीनी यात्री भारत की यात्रा पर आए हैं और उन्होंने अपने लेखों में भारत की उस समय की दशा का वर्णन किया है, जिस समय ये यात्री भारत आए थे, उनके समयनुसार यदि हम इनके क्रम की बात करें तो सबसे पहले 399 ईसवी में चीन का यात्री फाहियान भारत आया था, फाहियान चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में भारत आया था, यानी कि उस समय चंद्रगुप्त द्वितीय का शासन यहां पर चल रहा था, फाहियान प्रथम चीनी यात्री था, जो भारत की यात्रा पर आया, उसने यहां पर 15 वर्षों तक निवास किया और एक पुस्तक लिखी जिसमें उन्होंने भारत की उस समय की जो भी सामाजिक दशा थी उसका विस्तार पूर्वक वर्णन किया है 

इसके बाद 630 ईसवी में है ह्येनसांग भारत आया, यह दूसरा मुख्य चीनी यात्री था, इसे यात्रियों का सम्राट के नाम से भी जाना जाता है, यह जिस समय भारत आया उस समय भारत में हर्षवर्धन का शासन चल रहा था, ह्येनसांग ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'पाश्चात्य संसार' लिखी इसके लेख में उन्होंने हर्ष के कालके समय भारत की जो सामाजिक व धार्मिक स्थिति थी उसके विषय में लिखा है, उस समय के भारत के समाज व धर्म के बारे में अच्छी खासी जानकारी हमें इस पुस्तक से प्राप्त होती है

इसके बाद सातवीं सदी के अंत में इतसिंग नामक चीनी यात्री भारत आया, इतसिंग ने जो लेख लिखे हैं उनमें हमें सातवीं सदी के भारत के विषय में अत्यधिक महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है, तो इस प्रकार यह था चीनी यात्रियों का सही क्रम, मुख्य रूप से इन्हीं तीन चीनी यात्रियों के बारे में बात की जाती है, इनके अलावा भी कुछ अन्य चीनी यात्री भी भारत आए थे लेकिन मुख्य रूप से जो भारत के इतिहास के बारे में हमें जानकारी मिलती है वह इन्हीं तीनों के लेखों से प्राप्त होती है, इनमें से सबसे पहले आया था फाहियान, उसके बाद आया ह्येनसांग और तीसरे नंबर पर आया इतसिंग, और इन तीनों की ही जो लिखित रचनाएं हैं, उनसे हमें अच्छी खासी जानकारी भारत के इतिहास के बारे में प्राप्त होती है
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