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क्रीमिया संकट क्या है

क्रीमिया यूरोप का वह हिस्सा है जो 1783 के बाद कभी भी रूस के चंगुल से छूट नही सका है यहां एक समय तातार लोगों की जनसँख्या निवास किया करती थी लेकिन USSR के तानाशाह स्टालिन की नीतियों ने पूरी जनसँख्या को रूसी नागरिकों में तब्दील कर दिया आलम ये है कि आज क्रीमिया में 65% लोग रूसी नस्ल के हैं जबकि तातार लोगों की संख्या 12% पर सिमट कर रह गई है कई वर्षों तक यूक्रेन का हिस्सा बने रहने के कारण 15% यूक्रेनी लोग भी यहां पर बसे हुए हैं, वैसे तो क्रीमिया ने इतिहास में बहुत कुछ झेला है लेकिन हम बात करेंगे हाल ही में घटित हुई 2014 कि घटना की, जब रूस ने इसे अपना हिस्सा बना लिया दुनिया इस घटना को रूस द्वारा क्रीमिया पर किया गया कब्जा कहती है तो रूस इसे जनमत संग्रह के जरिए क्रीमिया का रूस में विलय मानता है सच्चाई क्या है जानने के लिए आइए समझते हैं पूरी घटना को, जिसे क्रीमिया संकट के नाम से जाना जाता है, और जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे 1991 में स्वशासित बना क्रीमिया आज रूस के तथाकथित कब्जे में है

बात शुरू होती है वर्ष 1991 से USSR जैसी महाशक्ति का विघटन हो चुका था इसके छोटे-छोटे हिस्से टूट कर नए देशों में तब्दील हो रहे थे, इनमें से ही एक टुकड़ा था यूक्रेन, क्रीमिया यूक्रेन के हिस्से में गया लेकिन क्रीमिया के लोगों द्वारा स्वतंत्र देश की माँग किए जाने पर क्रीमिया को स्वायत्तता दे दी गई, ऐसे में यूक्रेन का हिस्सा होते हुए भी क्रीमिया आंतरिक मामलों में स्वतंत्र था उसका अपना प्रधानमंत्री व अपनी खुद की संसद थी, USSR के विघटन से सबसे बड़ा हिस्सा निकला रूस, जिसे USSR का उत्तराधिकारी माना गया, USSR से विघटित हुए देशों को रूस ने अपना अलग हुआ हिस्सा माना, कोई भी देश नही चाहेगा की उसके टुकड़े हों यकीनन रूस ने भी नही चाहा था लेकिन सच्चाई यही थी कि अब USSR अस्तित्व में नही रहा था, बल्कि 15 देशों में बंट चुका था, समय-2 पर रूसी नेताओं ने इस विघटन की आलोचना की है, आज के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तो USSR के विघटन को 20 वीं शताब्दी की सबसे बड़ी त्रासदी बताया है ऐसे में साफ झलकता है कि अपने टूटे हुए हिस्सों को रूस फिर से जोड़ना चाहता है, शायद यही कारण रहा कि 1991 में रूस से टूटकर अलग हुए इसके सबसे करीबी व यूरोप के सबसे बड़े देश यूक्रेन को लेकर रूस शुरू से ही संवेदनशील रहा, और जब जब भी पश्चिमी देशों से यूक्रेन की करीबी बढ़ी तब तब रूस आक्रामक हो उठा, रूस की ऐसी ही आक्रामकता 2014 में देखने को मिली जब उसने यूक्रेन के स्वायत क्षेत्र क्रीमिया पर कब्जा किया

रूस ने क्रीमिया पर कब्जा 2014 में किया लेकिन इस कब्जे की पटकथा 2010 में ही लिखनी शुरू हो चुकी थी जब रूसी समर्थक विक्टर यानुकोविच यूक्रेन के राष्ट्रपति बने, विक्टर शुरू से ही रूसी समर्थक रहे लेकिन यूक्रेन के पश्चिम भाग में बसी जनता रूस की अपेक्षा अमेरिका और यूरोपीय संघ से अधिक जुड़ाव महसूस करती थी तथा पश्चिमी देशों की नीतियों से प्रभावित थी, यही कारण है कि पश्चिमी देशों से मिलकर वो यूक्रेन को उन्नत बनाना चाहती थी, इसीलिए 2010 के दशक में यूक्रेन ने यूरोपीय संघ का सदस्य बनने का निर्णय लिया, लेकिन यह बात रूस को अच्छी ना लगी माना जाता है कि रूस ने यूक्रेन के राष्ट्रपति विक्टर पर दबाव डाला था जिस कारण विक्टर ने अंतिम समय में यूरोपीय संघ का सदस्य बनने से मना करते हुए संधि पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया, और यूक्रेन यूरोपीय संघ का सदस्य ना बन सका, इस बात से नाराज यूक्रेन में विपक्ष ने राष्ट्रपति विक्टर का विरोध करना शुरू कर दिया

विरोध होता देख देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की माँग को मानते हुए राष्ट्रपति ने EU की बजाए रूस के साथ आर्थिक संधि पर हस्ताक्षर कर दिए, इससे विरोध कम होने की बजाए ओर अधिक बढ़ गया, राष्ट्रपति विक्टर ने विरोध को दबाने के लिए सख्ती का प्रयोग किया फलस्वरूप विरोध हिंसक हो उठा, ऐसे में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें होने लगी, राष्ट्रपति के आदेश के चलते हुई कार्यवाही में 20 फरवरी 2014 को दर्जन भर प्रदर्शकारी मारे गए, इस घटना ने आग में घी डालने का काम किया और विरोध उग्र हो उठे, राष्ट्रपति विक्टर के लिए अपनी जान बचाना मुश्किल हो गया, खुद के खिलाफ होने वाले किसी आगामी षड्यंत्र से बचने के लिए राष्ट्र्पति विक्टर रूस में भाग गए, राष्ट्रपति के भागने के बाद यूक्रेन में संसद ने अंतरिम सरकार का गठन कर दिया और EU से शांति संधि की तथा आर्थिक सहायता की माँग रखी ताकि देश में  शांति सुरक्षा स्थापित चुनाव करवाए जा सकें

उधर रूस ने राष्ट्रपति पुतिन ने इस घटना को यूक्रेन की सरकार के विरूद्ध किया गया तख्तापलट बताया और कहां कि राष्ट्रपति विक्टर 2010 में जन्म द्वारा चुने गए राष्ट्रपति है उनको हटाकर देश में अंतिम सरकार बनाना लोकतंत्र के खिलाफ है जबकि विरोध करने वाले लोगों ने कहा कि राष्ट्रपति विक्टर तानाशाह की तरह बर्ताव कर रहे थे और अपने ही लोगों को मरवा रहे थे ऐसे में उनको सत्ता से हटाया जाना याद है इस प्रकार रूस और यूक्रेन की अंतरिम सरकार के मध्य तनातनी शुरू हो गई यूक्रेन में आई इस राजनीतिक अस्थिरता का फायदा रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने उठाना शुरू कर दिया यूरिन के सब शासित भाग क्रीमिया में रूस ने अपने समर्थकों की मौत से वहां की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करवाने शुरू कर दी है प्रीमियर में रूसी नस्ल के लोग अधिक मात्रा में रहते हैं तथा वे रूसी भाषा बोलते हैं इसलिए वहां पर हो रहे विरोध को और उसके साथ-साथ वहां के लोगों का भी अच्छा खासा समर्थन मिला ऐसे में विरोधियों ने क्रीमिया की संसद को घेर लिया और वहां के राष्ट्रपति से इस्तीफा दिलवा कर रही समर्थक व्यक्ति को राष्ट्रपति बनाया रुचि समर्थक नए राष्ट्रपति ने क्रीमिया के क्षेत्र में शांति व सुरक्षा स्थापित करने के लिए रूस की मदद मांगी जिसके बाद रूस ने बिना पहचान वाले सैनिक प्रीमियर में भेज दिए इंसानों ने केवल 3 दिन में क्रीमिया की संसद इसकी सरकारी इमारतों तथा सैन्य छावनी पर कब्जा कर लिया और मात्र 3 दिनों के अंदर ही प्रीमियर पर उसका कब्जा हो गया

अब रूस इस कब्जे को वैध बनाना चाहता था इसलिए उसने जनमत संग्रह करवाए जाने को कहा क्रीमिया के रूसी समर्थक प्रधानमंत्री ने क्रीमिया में एक जनमत संग्रह करवाया जिसमें लोगों से पूछा गया कि क्या वे एक आधा आजाद देश चाहते हैं या फिर क्रीमिया को रूस में मिलाना चाहते हैं यह जनमत संग्रह 14 मार्च 2014 को करवाया गया था जिसमें प्रीमियर के 83 सीसी लोगों ने भाग लिया और उन 83 फ़ीसदी में से 96 फ़ीसदी लोगों ने रूस के साथ क्रीमिया का विलय करवाने के पक्ष में वोट दिया इसके बाद इस जनमत को आधार बनाकर रूस के राष्ट्रपति और क्रीमिया के प्रधानमंत्री में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए जिसके बाद क्रीमिया का रूस में विलय हो गया अब क्योंकि यह जनमत संग्रह किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था की निगरानी में नहीं हुआ था इसलिए दुनिया के ज्यादातर देशों ने क्रीमिया के रूस में विलय को मान्यता नहीं दी और इसे और पश्चिमी देशों ने इसे रूस द्वारा फ्री में पर किया गया कब जाना और इसी के चलते यूके यूएसए और नाटो के अन्य सदस्य देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए साथ ही रूस को g8 से हटा दिया गया और g8 समूह g7 बन गया इसके बावजूद  रूस यहां पर नहीं रुका और उसने यूक्रेन के पूर्वी इलाकों में जहां पर रूसी बोलने वाली रूसी भाषा बोलने वाली जनसंख्या ज्यादा रहती है वहां पर विरोधियों का को सहायता देनी शुरू कर दी और अब वर्ष 2022 में उसने यूक्रेन के दो पूर्वी इलाकों दानेस्क और लुहान्सक को आजाद क्षेत्र घोषित कर दिया है जिसके बादरूस और यूक्रेन के बीच युद्ध हो रहा है तो यह थी रूस पकरी में के कब्जे की पूरी कहानीन



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