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खसरा रूबेला टीकाकरण अभियान क्या है Measles Rubella Vaccination Campaign in Hindi

खसरा रूबेला टीकाकरण अभियान भारत सहित लगभग 150 देशों में चलाया जा रहा एक स्वास्थ्य अभियान है इसका उद्देश्य खसरा और रूबेला (जर्मन खसरा) को जड़ से खत्म करना है। इसके लिए यह टीकाकरण अभियान भारत के सभी राज्यों में समय-समय पर चलाया जाता है। इस टीकाकरण अभियान का उद्देश्य भारत से खसरा और रूबेला को ठीक उसी तरह खत्म करना है जिस तरह पोलियो को देश से खत्म किया गया है। इसलिए खसरा रूबेला टीकाकरण अभियान स्वस्थ भारत की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम है जो कई वर्षों से भारत में लगातार चलाया जा रहा है तथा इसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं।

रूबेला (जर्मन खसरे) को कहा जाता है यह एक प्रकार का वायरस होता है जो बहुत ही तेजी से फैलता है यह वायरस नाक, श्वसन नली तथा फेफड़ों को सर्वाधिक क्षति पहुँचाता है। यह एक संक्रमित रोग है तथा खाँसने व छींकने पर नाक से बहने वाले पानी की बूंदों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। किसी संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने व उसके साथ पानी इत्यादि सांझा करने तथा उसके द्वारा प्रयोग किए गए टिशू का प्रयोग करने से भी फैलता है। क्योंकि यह रोग इतनी आसानी से फैल जाता है इसलिए इस पर काबू पाना थोड़ा मुश्किल होता है। रूबेला जैसे किसी भी तेजी से फैलने वाले संक्रामक रोग को जल्द से जल्द देश से समाप्त किया जाना आवश्यक होता है इसीलिए रोकथाम हेतु विभिन्न देशों में टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं इस समय भारत सहित 150 देशों में खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान चल रहे हैं जो अपने उद्देश्यों के लगातार सफल भी हो रहे हैं।

बात यदि रूबेला के लक्षणों की की जाए तो इसके लक्षण बड़े ही होेते हैं जैसे कि बुखार आना, सिरदर्द होना या फिर कान के पीछे या गर्दन की ग्रंथियों का अचानक से बड़ा होने लगना। ऐसा भी नहीं है कि यह रोग लक्षणों के साथ ही फैलता है कई बार इस रोग का कोई लक्षण दिखाई नहीं देता जिस कारण यह गंभीर अवस्था में पहुँच जाता है। इस रोग के फैलने की कोई विशेष तय उम्र नहीं है यह बच्चों से लेकर बूढ़े तक किसी को भी हो सकता है यद्द्पि बच्चों से ज्यादा व्यस्त कर लोगों में यह बीमारी होने का खतरा ज्यादा होता है। यदि यह रोग अपनी गंभीर स्थिति को पकड़ ले तो शरीर पर लाल चकते हो जाते हैं जो चेहरे से शुरु होकर पूरे शरीर पर फैलने लगते हैं जो देखने में एक बुरी स्थिति का अनुभव करवाते हैं। यदि इस बीमारी का समय पर इलाज न करवाया जाए तो यह रक्त में प्लेटलेट्स की कमी का कारण भी बन सकता है इसके अलावा मस्तिष्क की सूजन जैसे रोग भी रूबेला की वजह से पनप सकते हैं।

यह रोग जितना सामान्य देखने में लगता है उतना है नही। यदि गर्भ में पल रहे बच्चे को यह रोग जकड़ ले तो इसे जन्मजात रूबेला सिंड्रोम कहा जाता है जो कि अजन्मे बच्चे में बहुत सी विसंगतियां पैदा कर सकता है जैसे कि पैदा होने वाले बच्चे में बहरापन, अंधापन तथा दिल के रोग इस बीमारी के कारण देखे गए हैं इसके अलावा बच्चे के मानसिक विकास में कमी का कारण भी यह बीमारी बन सकती है इसलिए गर्भ में पल रहे बच्चे को किसी प्रकार की विसंगति का सामना नहीं करना पड़े इसके लिए गर्भवती महिलाओं को यह टीका लगवाने की सलाह दी जाती है खासकर ऐसी स्थिति में जब महिला को गर्भधारण करने से 3-4 महीने पहले यह बीमारी हुई हो। इसके अतिरिक्त 9 महीने से लेकर 15 वर्ष तक की आयु के बच्चों को यह टीका कुल 3 बार लगाया जाता है। पहला टीका 9 से 12 महीने ज बच्चे को लगाया जाता है तथा दूसरा टीका बच्चे के 16 से 24 महीने का होने पर लगाया जाता है तथा तीसरा टीका बच्चे के 9 से 15 वर्ष के होने पर लगाया जाता है। जो बच्चों में उम्र भर के रूबेला प्रतिरक्षक क्षमता पैदा करता है पोलियो की तरह इस बीमारी को बड़ी गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार जगह-जगह इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए टीकाकरण अभियान चलाती है जिन्हें मीजल्स रूबेला टीकाकरण अभियान के नाम से जाना जाता है।

भारत सरकार अस्पताल, आंगनवाड़ी, स्कूल तथा मोबाइल वैन का प्रयोग कर दूरस्थ क्षेत्रों तक इस टीके को पहुँचाती है ताकि देश का कोई भी बच्चा इससे अछूता ना रहे। इसके अलावा गर्भवती अवस्था में स्त्रियों को भी यह टीका लगवाने की सलाह दी जाती है ताकि उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को किसी प्रकार की विसंगति का सामना न करना पड़े। यह टीका बिल्कुल निशुल्क होता है इसलिए गरीब से गरीब माता पिता भी अपने बच्चे को यह टीका लगवा सकते हैं। रूबेला की बीमारी मुख्य रूप से सर्दियों तथा बसंत के मौसम में फैलती है इसलिए इन मौसमों में बच्चों और वयस्कों को खुद को इस बीमारी से बचाने की कोशिश करनी चाहिए और यदि कोई व्यक्ति इस बीमारी से संक्रमित है तो उससे उचित दूरी बनाकर रखनी चाहिए। प्रत्यक्ष रूप से इस बीमारी का इलाज नही किया जाता सिर्फ बुखार को ठीक करने के प्रयास व थोड़ी सी सावधानी से ही इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। लेकिन क्योंकि सरकारी इसे जड़ से खत्म करने के पक्ष में है इसलिए वह प्रभावी ढंग से पूरे देश में खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान चलाती है।

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