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अल नीनो व ला नीना क्या है?

* हाल ही में यह बात सामने आई है कि जलवायु परिवर्तन के चलते अल नीनो (El Nino) और ला नीना (La Nina) में परिवर्तन आ रहा है।

* इसकी गणना दक्षिण कोरिया के सुपर कंप्यूटर Aleph द्वारा जलवायु मॉडल सिमुलेशन का प्रयोग कर की गई है।

* इस अध्ययन को "नेचर क्लाइमेट चेंज" नामक जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

* इस अध्ययन के अनुसार भविष्य में वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड CO2 बढ़ने से ENSO (El Nino Southern Oscillation) का चक्र कमजोर होगा।

* अल नीनो और ला नीना उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में
घटित होने वाली दो प्राकृतिक जलवायु घटनाए हैं जो पूरी दुनिया में मौसम की स्थिति को प्रभावित करती हैं।

* इन घटनाओं का कोई निश्चित समयकाल नही है लेकिन सामान्यतः ये 2 से 7 वर्ष के अंतराल में अवश्य घटित होती हैं जिस साल ये घटित होती हैं उस वर्ष ये 9 से 12 महीने तक बनी रहती हैं।

* अल नीनो के समय समुंद्र की सतह के तापमान में वृद्धि होती है वहीं ला नीना में समुंद्र की सतह का तापमान सामान्य से कम हो जाता है।
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मुगल भारत कब व क्यों आए थे?

मुगल कौन थे : मुगल विदेशी शासक थे जिन्होंने लगभग 300 वर्षों तक भारत पर शासन किया। मुगल साम्राज्य का संस्थापक बाबर व उत्तरवर्ती शासक तुर्क एंव सुन्नी मुसलमान थे।

मुगल भारत कब आए : मुगलों ने 21 अप्रैल 1526 का पानीपत का प्रथम युद्ध जीतकर भारत में अपने साम्राज्य (1526 से 1857) की स्थापना की थी इसलिए हम कह सकते हैं कि मुगल वर्ष 1526 में भारत आए।

मुगलों द्वारा लड़ा गया पानीपत का प्रथम युद्ध किस-किस के बीच हुआ था : बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच (इब्राहिम लोदी भी भारतीय नही था वह अफगान था जो दिल्ली सल्तनत 1206 - 1526 के आखिरी वंश लोदी वंश का आखिरी शासक बना)

मुगल भारत क्यों आए : मुगल खुद से भारत नही आए बल्कि उन्हें आमंत्रित किया गया था। बाबर को दौलत खान लोदी ने दिल्ली को लूटने के लिए आमंत्रित किया था। दौलत खान लोदी दिल्ली सल्तनत के अंतिम शासक इब्राहिम लोदी का चचेरा भाई था जिसे इब्राहिम लोदी ने लाहौर का गवर्नर बनाया हुआ था लेकिन वो दिल्ली की गद्दी चाहता था इसलिए उसने दिल्ली पर आक्रमण करने के लिए बाबर को आमंत्रित किया था। (इस आमंत्रण में इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खान लोदी और राणा साँगा का भी नाम आता है)

दौलत खान लोदी ने बाबर (मुगलों) को ही क्यों आमंत्रित किया : बाबर अपनी मंगोली पद्दति का प्रयोग कर किए जाने वाले आक्रमणों के लिए प्रसिद्ध था तथा आस पास के छोटे राज्यों पर तीव्र प्रहार करने और उन्हें लूटने के कारण उसका नाम चारों ओर फैल गया था इसलिए दौलत खान लोदी ने दिल्ली को कमजोर करने के लिए बाबर को आमंत्रित करना उचित समझा ताकि बाबर के वापिस जाने के बाद वो खुद दिल्ली पर शासन कर सके लेकिन बाबर कभी वापिस गया ही नही और दिल्ली जीतने के बाद उसने मुगल साम्राज्य की स्थापना कर दी जिसने आगे चलकर भारत का लंबा इतिहास लिखा।


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CAA Full Form in Hindi | सी ए ए की फुल फॉर्म क्या है?

परिचय:

Citizenship Amendment Act 2019 (नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019) या CAA 12 दिसंबर 2019 को अधिसूचित किया गया था और इसे 10 जनवरी 2020 से लागू किया गया। इस अधिनियम के माध्यम से नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन किया गया है।

उद्देश्य एंव विशेषताएं :

* CAA का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई धर्म के उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है।

* इन समुदायों के, अपने संबंधित देशों में धार्मिक आधार पर उत्पीड़न का सामना करने वाले जो व्यक्ति 31 दिसंबर 2014 तक भारत में पलायन कर चुके थे, उन्हें अवैध अप्रवासी नहीं माना जाएगा बल्कि उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी।

* अधिनियम के एक अन्य प्रावधान के अनुसार केंद्र सरकार कुछ आधारों पर ‘ओवरसीज़ सिटीज़न ऑफ इंडिया’ (OCI) के पंजीकरण को भी रद्द कर सकती है।

* संविधान की छठी अनुसूची में शामिल होने के कारण यह अधिनियम त्रिपुरा, मिजोरम, असम और मेघालय के आदिवासी क्षेत्रों पर लागू नहीं होता है।

* इसके अलावा बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत अधिसूचित ‘इनर लिमिट’ के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों भी इस अधिनियम के दायरे से बाहर होंगे।

* यह क़ानून संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। इसके अंतर्गत धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों की पहचान की गयी है।

* यह क़ानून स्थानीय समुदायों के लिए एक जनसांख्यिकीय खतरा समझा जा रहा है।

* इसमें, धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों को नागरिकता का पात्र निर्धारित किया गया है। साथ ही इससे, समानता के अधिकार की गारंटी प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा।

* यह किसी क्षेत्र में बसने वाले अवैध प्रवासियों की नागरिकता को प्राकृतिक बनाने का प्रयास करता है।

* इसके तहत, किसी भी कानून के उल्लंघन करने पर ‘ओसीआई’ पंजीकरण को रद्द करने की अनुमति गई है। यह एक व्यापक आधार है जिसमें मामूली अपराधों सहित कई प्रकार के उल्लंघन शामिल हो सकते हैं।



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MSP Full Form in Hindi | एम एस पी की फुल फॉर्म क्या है?

*MSP - Minimum Support Price (न्यूनतम समर्थन मूल्य)        

* किसी भी फसल का वह न्यूनतम मूल्य होता है जिस पर सरकार किसानों से फसल खरीदती है।

* मौजूदा समय में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति खरीफ और रबी दोनों मौसमों में उगाई जाने वाली कुल 23 फसलों के लिए MSP निर्धारित करती है।

* MSP की गणना किसानों की उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना कीमत के आधार पर की जाती है।

* MSP का निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices) या CACP की शिफारिश पर एक वर्ष में दो बार किया जाता है।

* CACP एक वैधानिक निकाय है जो खरीफ और रबी मौसम के लिए कीमतों की सिफारिश करने वाली अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करता है। 

* MSP का निर्धारण करते समय CACP A2+FL तथा C2 लागत दोनों को ध्यान में रखता है।

* A2 लागत में कि‍सान द्वारा सीधे नकद रूप में और बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरों की मजदूरी, ईंधन, सिंचाई आदि पर किये गए सभी तरह के भुगतान को शामिल किया जाता है।

* A2+FL में A2 सहित अतिरिक्त अवैतनिक पारिवारिक श्रम का एक अनुमानित मूल्य शामिल किया जाता है।

* C2 लागत में कुल नगद लागत और किसान के पारिवारिक पारिश्रामिक (A2+FL) के अलावा खेत की जमीन का किराया और कुल कृषि पूंजी पर लगने वाला ब्याज भी शामिल किया जाता है।

* MSP के साथ प्रमुख समस्या गेहूं और चावल को छोड़कर अन्य सभी फसलों की खरीद के लिए सरकारी मशीनरी की कमी है। गेहूं और चावल की खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) के द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत नियमित रूप से की जाती है।

* चूंकि राज्य सरकारों द्वारा अंतिम रूप से अनाज की खरीद की जाती है और जिन राज्यों में अनाज की खरीद पूरी तरह से सरकार द्वारा की जाती हैं, वहां के किसानो को अधिक लाभ होता है। जबकि कम खरीद करने वाले राज्यों के किसान अक्सर नुकसान में रहते हैं।

MSP आधारित खरीद प्रणाली बिचौलियों, कमीशन एजेंटों और APMC अधिकारियों पर भी निर्भर होती है, और छोटे किसानों के लिए इन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
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राज्य के नीति के निदेशक सिद्धांत क्या हैं?

* आयरिश संविधान (45) से लिया गया (मूल स्रोत स्पेनिश संविधान) 

* संविधान भाग 4 (अनुच्छेद 36 से 51)

* कार्यों का विवरण (37)

* व्याख्या : वे सभी आदर्श जिनका पालन राज्य को देश के लिए नीतियां एयर कानून बनाते समय ध्यान में रखना चाहिए

* उद्देश्य 1 : लोगों के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करना

* उद्देश्य 2 : भारत को पुलिस राज्य के विपरीत एक कल्याणकारी राज्य बनाना

* मौलिक अधिकारों के जैसे लेकिन अलग (मौलिक अधिकारों के अधीनस्थ नही)

* मौलिक अधिकारों की बजाए दायरा विस्तृत व असीम

* मौलिक अधिकार नकारात्मक (राज्य सीमा) लेकिन निदेशक सिद्धांत सकारात्मक (कानून द्वारा प्रवर्तनीय नही)

* निदेशक सिद्धांतो के कार्यान्वयन के लिए मौलिक अधिकारों में संशोधन नही किया जा सकता (गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य 1967) बाद में संविधान के मूल ढांचे को आधार बनाया

* प्रकार : समाजवादी, गांधीवादी और उदार व बौद्धिक

* समाजवादी के उदाहरण : सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक न्याय, आय व अवसरों की असमानता कम कर सामाजिक सुरक्षा की स्थापना, लोक कल्याण को बढ़ावा, श्रमिकों की सुरक्षा, बच्चों व युवाओं का शोषण रोकना, शिक्षा अधिकार देना, बेरोजगारी दूर करना, बुढापा, बीमारी व विकलांगता में सहायता, सार्वजिनक स्वास्थ्य में सुधार, गरीबों को निशुल्क कानूनी सहायता

* गांधीवादी के उदाहरण : ग्राम पंचायत स्वशासन, ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा, लोकतांत्रिक नियंत्रण, समाज के कमजोर वर्गों (SC/ST) इत्यादि के शैक्षिक व आर्थिक हित को बढ़ावा, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार व नशे पर रोक, दुधारू पशुओं जैसे व अन्य मवेशी जैसे बछड़े इत्यादि के वध पर रोक व नस्लों में सुधार

* उदार-बौद्धिक के उदाहरण : समान नागरिक संहिता, शिशु (6 वर्ष) प्रारंभिक देखभाल व शिक्षा, कृषि और पशुपालन का आधुनिक और वैज्ञानिक आधार पर संगठन, पर्यावरण रक्षा व सुधार, वनों एंव वन्य जीवों की रक्षा, कलात्मक व ऐतिहासिक महत्व के स्मारकों व स्थानों की रक्षा, लोक सेवाओं में न्यापालिका व कार्यपालिका को अलग करने हेतु कदम उठाना, अंतराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा की स्थापना

* निदेशक सिद्धांतो का कार्यान्वयन : भूमि सुधार (जमींदारों जैसे बिचौलियों की समाप्ति), श्रम सुधार (बाल श्रम निषेध 1986, बंधुआ मजदूरी उन्मूलन 1976), पंचायती राज व्यवस्था (ग्राम, ब्लॉक व जिला स्तर शासन 1992, 73 वां संशोधन, अनुच्छेद 40 संवैधानिक दायित्व), शिक्षा (शिक्षा का अधिकार 2009, 6 से 14 वर्ष शिक्षा मौलिक अधिकार), ग्रामीण क्षेत्रीय विकास (मनरेगा 2006, कुटीर उद्योग), पर्यावरण में सुधार (पर्यावरण सरंक्षण अधिनियम 1986), वन्यजीव सरंक्षण (अधिनियन 1972), विरासत सरंक्षण (प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक एंव पुरातत्व स्थल व अवशेष अधिनियम 1958)

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पर्यावरण सरंक्षण में भारतीय न्यायपालिका की क्या भूमिका है?


* पर्यावरण : वे सभी अवस्थाएं जिनसे हम घिरे हैं पौधों पशुओं और प्राकृतिक संसाधनों व रहने की परिस्थियों से मिलकर पर्यावरण का निर्माण होता है

* स्वच्छ पर्यावरण मानव जीवन के लिए अनिवार्य, इसलिए मानव विकास व सुरक्षा के लिए उत्तरदायी संस्थाएं पर्यावरण को लेकर भी उत्तरदायी हैं।

* आज पर्यावरण सरंक्षण देश ही नही वैश्विक स्तर पर प्रमुख कर्तव्य, पर्यावरण क्षय एक अंतराष्ट्रीय समस्या

* पर्यावरण की समस्या से निपटने के लिए भारतीय न्यायपालिका महत्वपूर्ण कार्य कर रही है यह अपना स्वरूप व दृष्टिकोण रूढ़िवादी से प्रगतिशील में परिवर्तित कर रही है।

* न्यायपालिका व्यक्तिगत हितों के सरंक्षक के साथ-साथ सामाजिक व पर्यावरण हित के सरंक्षक के रूप में सक्रिय भूमिका का निर्वाह करती रही है।

* भारतीय संविधान के चौथे अध्याय में मौलिक कर्तव्यों के अंतर्गत प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा व संवर्द्धन के विषय में उपबंध हैं।

* न्यायालय जनहित याचिका के माध्यम से भी पर्यावरण संरक्षण में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है जिससे पर्यावरण सुरक्षा के संबंध में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

* न्यायपालिका ने न्यायिक सक्रियता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है विभिन्न पर्यावरण आंदोलन व दिल्ली में स्वच्छ पर्यावरण बनाने के लिए CNG बसों का परिचालन इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
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सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियां क्या हैं?


* भारत के सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियां अपनी प्रकृति व विस्तार के अनुसार किसी भी अन्य देश के सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में अधिक

* मूल अधिकारों का सरंक्षक (भाग 3 / अनुच्छेद 12 से 35)

* संविधान का अंतिम व्याख्याकार (131, 132, 133)

* आपराधिक मामलों की अपील का अंतिम न्यायालय

* भारत सरकार व एक या एक से अधिक राज्यों के बीच के विवाद की सुनवाई

* राज्यों के बीच के विवाद की सुनवाई

* उच्च न्यायालयों के निर्णर्यों के विरूद्ध सुनवाई, दीवानी व फौजदारी दोनों (132)

* सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के आधार पर निर्णय दिए जा सकते हैं (129)

* निर्णय को किसी अन्य न्यायालय में चुनौती नही दी जा सकती

* मानहानि हेतु दण्डित करने का अधिकार

* रिट - बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेद, उत्प्रेषण, अधिकार पृच्छा (32)

* रिट संविधान का मूल ढांचे का हिस्सा (संसद द्वारा कमी व समाप्ति असंभव)

* राष्ट्रपति परामर्श ले सकता है (143)

* परामर्श (किसी पर बाध्यकारी नही)

* निर्णयों का पुनर्विलोकन (137)

* असंवैधानिक कानून निरस्तता

* संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व अन्य सदस्यों को हटाना (राष्ट्रपति के लिए SC जांच व प्रमाणिकता आवश्यक)

* सभी न्यायालयों व पंचायतों आदि की निगरानी का अधिकार

* उच्च न्यायालयों के लंबित मामलों का निबटारा

* राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी विवाद निबटारा (केवल SC)
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राष्ट्रभाषा और राजभाषा में क्या अंतर है?

राष्ट्रभाषा किसी भी देश की वह भाषा होती है जो उस देश के सर्वाधिक लोगों द्वारा बोली व समझी जाती है। जैसे कि ब्रिटेन के 98% लोगों द्वारा अंग्रेजी भाषा बोली व समझी जाती है इसलिए अंग्रेजी ब्रिटेन की राष्ट्रभाषा है। भारत में कोई राष्ट्रभाषा नही है यद्द्पि हिंदी भाषा भारत की राष्ट्र भाषा होने की दौड़ में प्रथम स्थान रखती है क्योंकि भारत की 44% जनसँख्या हिंदी को अच्छी तरह बोल व समझ सकती है। परंतु यह प्रतिशत हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाने की अनुमति फिलहाल नही देता।

वहीं राजभाषा किसी देश की वह भाषा होती है जिसका प्रयोग वहां की सरकार द्वारा सरकारी कामकाज करने के लिए किया जाता है। भारत की संघीय राजभाषा हिंदी है। जो कि देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। आमतौर पर किसी देश की राष्ट्रभाषा ही उस देश की राजभाषा होती है लेकिन भारत विविधताओं का देश है इसलिए यहाँ पर यह तथ्य लागू नही होता। भारत के प्रत्येक राज्य को अपनी अलग राजभाषा बनाने का अधिकार है।

भारत में हिंदी सहित कुल 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है इसलिए अलग-अलग क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषाएं अलग हैं। वहीं यदि हम संपर्क भाषा की बात करें तो अंग्रेजी हमें पूरे देश में एक दूसरे से बातचीत करने की सुविधा प्रदान करती है इसलिए अंग्रेजी हमारी संपर्क भाषा है।

निम्न GK प्रश्नों का उत्तर जानें :

धर्मनिरपेक्षता और पंथनिरपेक्षता क्या है?

प्रान्त और राज्य में क्या अंतर है?

लोकसभा और राज्यसभा में क्या अंतर है?

सामान्य ज्ञान क्विज 127

इतिहास की जानकारी के स्त्रोत क्या हैं?

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प्रथम विश्व युद्ध कब हुआ था?

प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत 28 जुलाई 1914 को उस समय हुई जब बोस्निया के राष्ट्रवादियों ने सर्बिया की सहायता से ऑस्ट्रिया-हंगरी के राजकुमार की हत्या कर दी। इस हत्या के बाद ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया को आत्मसमर्पण करने को कहा लेकिन सर्बिया के मना करने पर ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया पर 28 जुलाई 1914 को युद्ध की घोषणा कर दी। इसी दिन प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हो गई।

बाद में एक दूसरे से हुई गुप्त संधियों व निजी लाभ के चलते जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, जापान, अमेरिका, इटली जैसे बड़े देश युद्ध में कूद पड़े और अंत में जब जर्मनी ने 11 नवंबर 1918 को आत्मसमर्पण किया तब यह युद्ध समाप्त हुआ।

इस युद्ध को ग्लोबल वॉर (वैश्विक युद्ध) कहा गया और माना गया कि इसके बाद कोई भी युद्ध नही होगा लेकिन यह अनुमान गलत साबित हुआ क्योंकि इसके दो दशक बाद 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हो गया जो जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम की घटना पर जाकर समाप्त हुआ था।

निम्न GK प्रश्नों के उत्तर जानें :

प्रथम विश्व युद्ध क्यों हुआ था?

शीतयुद्ध से सबंधित सामान्य ज्ञान प्रश्न

धर्मनिरपेक्षता और पंथनिरपेक्षता में क्या अंतर है?

लोकसभा और विधानसभा में क्या अंतर है?

भारत का आधिकारिक नाम क्या है?

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प्रथम विश्व युद्ध क्यों हुआ था?

प्रथम विश्वयुद्ध होने का शुरुआती कारण था बोस्निया के राष्ट्रवादियों द्वारा ऑस्ट्रिया-हंगरी के राजकुमार की हत्या करना। बोस्निया उस समय ऑस्ट्रिया-हंगरी का गुलाम था तथा बोस्निया की आजादी की मांग करने वाले राष्ट्रवादियों ने ऑस्ट्रिया-हंगरी के साराजेवो नामक स्थान पर 28 जून 1914 के दिन राजकुमार की गोली मारकर हत्या कर दी। इस हत्या में सर्बिया (जो कि ऑस्ट्रिया-हंगरी का पड़ोसी देश है) ने बोस्निया राष्ट्रवादियों का साथ दिया था। इसी कारण ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा लेकिन सर्बिया के मना करने पर ऑस्ट्रिया-हंगरी ने उस पर युद्ध की घोषणा कर दी।

अब सर्बिया में सलविक नस्ल के लोग रहते थे तथा रूस में भी इसी नस्ल के लोगों का निवास था तो सांस्कृतिक समानता को देखते हुए सर्बिया ने रूस से मदद माँगी। रूस मदद करने के लिए राजी हो गया और रूस ने ऑस्ट्रिया-हंगरी पर युद्ध की घोषणा कर दी। अब ऑस्ट्रिया-हंगरी अकेला रह गया और उसने एक पुरानी संधि के तहत जर्मनी से मदद मांगी। जर्मनी मदद को राजी हो गया। जर्मनी के युद्ध में आते ही रूस ने ऑस्ट्रिया-हंगरी के साथ-साथ जर्मनी पर भी युद्ध की घोषणा कर दी। इसके बाद फ्रांस को भी युद्ध में कूदना पड़ा क्योंकि उसने रूस के साथ युद्ध में साथ देने की संधि की हुई थी।

जब फ्रांस ने जर्मनी पर युद्ध की घोषणा की तो जर्मनी ने बेल्जियम के रास्ते फ्रांस में घुसने की सफल कोशिश की। लेकिन बेल्जियम की संधि ब्रिटेन से थी इसलिए बेल्जियम के रास्ते जबरदस्ती घुसने के कारण ब्रिटेन ने भी जर्मनी पर युद्ध की घोषणा कर दी। बाद में ब्रिटेन से संधि के चलते जापान भी युद्ध मे कूद गया। बाद में 1917 में जब जर्मनी ने अमेरिका के समुंद्री जहाजों पर हमला किया तो अमेरिका भी मित्रपक्ष देशों (रूस, ब्रिटेन, फ्रांस) के साथ युद्ध में शामिल हो गया।

इस प्रकार ऑस्ट्रिया-हंगरी के राजकुमार की हत्या ही प्रथम विश्व युद्ध शुरू होने का आकस्मिक कारण बनी। यद्द्पि सैन्य शक्ति, युद्ध संधियाँ, तकनीक, हथियार, राष्ट्रवाद तथा साम्राज्यवाद जैसी अन्य भावनाओं ने इस युद्ध में आग में घी डालने का काम किया।

निम्न GK प्रश्नों के उत्तर जानें :

प्रथम विश्व युद्ध कब हुआ था?

शीतयुद्ध से सबंधित सामान्य ज्ञान प्रश्न

धर्मनिरपेक्षता और पंथनिरपेक्षता में क्या अंतर है?

लोकसभा और विधानसभा में क्या अंतर है?

भारत का आधिकारिक नाम क्या है?

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