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आधुनिक भारत के नृप निर्माता (किंग मेकर) किसे कहा जाता है?

भारत में 300 साल से भी अधिक समय तक शासन करने वाले मुगल साम्राज्य में एक ऐसा समय भी आया था जब मुगल साम्राज्य को प्रबंधित करने की पूरी शक्ति दो भाइयों के हाथों में आ गई थी। इन्ही दो भाइयों को आज आधुनिक भारत के नृप निर्माता अर्थात किंग मेकर के नाम से जाना जाता है क्योंकि इन दोनों भाइयों की नीतियों का मुग़ल साम्राज्य में प्रभाव इतना शक्तिशाली था कि ये किसी भी समय मुग़ल साम्राज्य के शासक को गद्दी से उखाड़ फेंकने का क्षमता रखते थे। इस आर्टिकल में हम आधुनिक भारत के इन्हीं नृप निर्माताओं के बारे में जानेंगे।

आधुनिक भारत के नृप निर्माता (किंग मेकर) के नाम से "सैय्यद बंधुओं" को जाना जाता है। इन दोनों भाइयों का नाम सैय्यद हुसैन अली और सैय्यद हसन अली (अब्दुल्ला खाँ) था। मुगल साम्राज्य के सातवें शासक बहादुर शाह प्रथम का समय काल आते-आते मुगल साम्राज्य में इन दोनों भाइयों का कद इतना ऊँचा हो गया था कि इन्हें किंग मेकर कहा जाने लगा। मुगल साम्राज्य के शासकों को मारकर इन दोनों भाइयों ने बहुत बार मुगल साम्राज्य की राजगद्दी अपने साथियों के लिए खाली करवाई थी। इन दोनों भाइयों की साम्राज्य पर मूल पकड़ मुगल शासक औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात बनी। औरंगजेब की मृत्यु वर्ष 1707 में हुई थी। औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात बहादुर शाह प्रथम जो कि औरंगजेब का पुत्र था; ने सैय्यद बंधुओं के साथ मिलकर अपने भाइयों को हराया तथा राजगद्दी पर बैठ गया। बहादुर शाह प्रथम की मृत्यु (1712) के पश्चात जहांदार शाह मुग़ल साम्राज्य का शासक बना।

किंतु वह 1 साल से भी कम समय के लिए शासक रहा और वर्ष 1713 में सैय्यद बंधुओं ने जहांदार शाह की हत्या करवा दी व फ़ारूखसियार को मुग़ल साम्राज्य का शासक बनाया। फ़ारूखसियार ने वर्ष 1713 से 1719 तक शासन किया लेकिन सैय्यद बंधुओं के राजपाट में अत्याधिक हस्तक्षेप के कारण वह परेशान हो गया और उसने सैय्यद बंधुओं को मारने की साजिश रची। लेकिन इससे पहले कि वह सैय्यद बंधुओं को मार पाता सैय्यद बंधुओं ने ही फ़ारूखसियार की हत्या करवा दी। अब सैय्यद बंधु राजगद्दी पर वास्तविक शासन चाहते थे इसलिए मुगल साम्राज्य पर वास्तविक अधिकार करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने करीबी रफी उद दरजात को 28 फरवरी 1719 को मुगल साम्राज्य का शासक बनाया लेकिन वह ज्यादा समय तक शासन नहीं कर सका और मुगल साम्राज्य का सबसे कम समय तक शासन करने वाला शासक बना। 04 जून 1719 को रफी उद दरजात की क्षयरोग के चलते मृत्यु हो गई। इसके बाद सैय्यद बंधुओं ने अपने दूसरे करीबी रफी उद दौला (शाहजहाँ-।।) को 06 जून 1719 के दिन मुगल सम्राज्य का शासक बनाया लेकिन वह नशे का आदि था तथा 17 सितंबर 1719 को पेचिस नामक बीमारी के चलते उसकी भी मृत्यु हो गई। एक के बाद एक बदलते शासकों के कारण मुग़ल साम्राज्य बुरी तरह से डगमगा रहा था।

इसके पश्चात 17 वर्ष की उम्र में मुहम्मद शाह रंगीला (जिसे अपने विलासिता पूर्ण जीवन के लिए जाना जाता है) को सैय्यद बंधुओं के सरंक्षण में मुगल सम्राज्य का शासक बनाया गया। रंगीला के सरंक्षक होने के कारण इस समय मुगल साम्राज्य का पूर्ण प्रबंधन अप्रत्यक्ष रूप से सैय्यद बंधु ही संभाल रहे थे। राज्य में उनके इतने अधिक हस्तक्षेप से परेशान होकर मुहम्मद शाह रंगीला ने वर्ष 1720 में सत्ता अपने हाथों में ले ली और निजाम उल मुल्क की मदद से हुसैन अली को फतेहपुर सिकरी में मरवा दिया तथा वर्ष 1722 में हसन अली (अब्दुल्ला खाँ) को बड़ी मात्रा में जहर देकर मरवा दिया। इस प्रकार मुहम्मद शाह रंगीला ने मुगल सम्राज्य की राजगद्दी को सैय्यद बंधुओं के चंगुल से आजाद करवाया।

किसे कहा जाता है : सैय्यद बंधुओं को
क्यों कहा जाता है : मुग़ल साम्राज्य की सत्ता पर पकड़ होने के कारण
विशेषता : मुग़ल साम्राज्य पर अप्रत्यक्ष शासन

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