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महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता क्यों कहा जाता है

महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का दर्जा आधिकारिक रूप से नहीं दिया गया है बल्कि महात्मा गांधी के लिए यह शब्द सर्वप्रथम नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा प्रयोग किया गया था। इसलिए कहा जाता है कि महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की उपाधि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दी। दरअसल 06 जुलाई वर्ष 1944 नेताजी सिंगापुर से रेडियो पर संबोधन दे रहे थे तथा अपने संबोधन में उन्होंने महात्मा गांधी को "राष्ट्र का पिता" कहा और उन्हें "राष्ट्रपिता" कहकर संबोधित किया इसके बाद राजनीतिक गलियारों व आम जनों द्वारा महात्मा गांधी के लिए इस शब्द का प्रयोग किया जाने लगा।

इसके बाद जब 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या की गई उसके पश्चात भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रेडियो पर देशवासियों को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी की हत्या की दुखद खबर सुनाई तथा उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा "राष्ट्रपिता अब नहीं रहे..." इस प्रकार उन्होंने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के लिए राष्ट्रपिता शब्द का प्रयोग किया जिस कारण आजाद भारत ने भी इस शब्द को अपना लिया। आधिकारिक रूप से महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का दर्जा प्राप्त नहीं है किंतु लोगों के दिलों में गांधी जी राष्ट्रपिता की उपाधि धारण किए हुए हैं।

यदि बात की जाए कि नेताजी द्वारा महात्मा गांधी के लिए "राष्ट्रपिता" शब्द क्यों प्रयोग किया गया तो इसका उत्तर है कि अपने अहिंसा के रास्ते पर चलने, पूरे देश को एक साथ खड़ा करने तथा पूरे देश का मार्गदर्शन करने के लिए नेताजी ने महात्मा गांधी को "राष्ट्रपिता" की उपाधि दी। भारत की स्वतंत्रता में गांधी जी के अभूतपूर्व योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।

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