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लोकमान्य किसे कहा जाता है?

लोकमान्य उपनाम से "बाल गंगाधर तिलक" को जाना जाता है। लोकमान्य उसे कहा जाता है जिसे लोगों ने सर्वसहमति से अपने नायक के रूप में स्वीकार कर लिया गया हो। बाल गंगा तिलक का वास्तविक नाम केशव गंगाधर तिलक था तथा उन्हें "लोकमान्य तिलक" उपनाम से जाना जाता था। इसके अलावा "लाल, बाल, पाल" के समूह में "बाल" शब्द बाल गंगाधर तिलक के लिए प्रयोग किया गया है। बाल गंगाधर तिलक पेशे से वकील थे तथा उनमें भारतीय राष्ट्रवाद कूट-कूट कर भरा हुआ था। एक विशेष बात जो बाल गंगाधर तिलक के बारे में जानने योग्य है वह यह है कि वे रुढ़िवादी स्वभाव के व्यक्ति थे तथा हिंदू धर्म के संबंध में बनी प्रथाओं को समाप्त करने के पक्ष में नहीं थे। उनका यह रूढ़िवादी दृष्टिकोण बहुत से मौकों पर सामने भी आया।

बाल गंगाधर तिलक वर्ष 1890 में कांग्रेस में शामिल हुए थे। इससे पूर्व 1881 में उनके द्वारा "केसरी" नामक मराठी न्यूज पेपर शुरू किया गया था। बाल गंगाधर तिलक द्वारा दिया गया नारा "स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है... और मैं इसे लेकर ही रहूंगा..." मूल रूप से मराठी भाषा में बोला गया है। बाल गंगाधर गंगाधर तिलक को ब्रिटिश औपनिवेषकों द्वारा "भारतीय अशांति का पिता" कहा जाता था। वर्ष 1916 में होम रूल लीग की स्थापना में तिलक का मुख्य योगदान था। बाल गंगाधर तिलक की सोच महिलाओं के पक्ष में अधिक विकसित नहीं थी उदाहरण के तौर पर तत्कालीन समय में जब बंगाल में फूलमनि नामक 11 वर्षीय लड़की की मृत्यु उसके पति द्वारा जबरदस्ती शारीरिक सबंध बनाए जाने के कारण हो गई तो ब्रिटिश सरकार "ऐज ऑफ कंसेंट बिल - 1891" लेकर आई जिसके अंतर्गत लड़की की शादी की उम्र 10 से बढ़ाकर 12 वर्ष किए जाने का प्रावधान रखा गया था। लेकिन बाल गंगाधर तिलक ने इस बिल का विरोध किया तथा कहा कि ब्रिटिशों को हिन्दू धर्म के रीतिरिवाजों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

इसके अलावा वर्ष 1918 में जब छुआछूत को समाप्त करने के लिए भारतीयों की ओर से याचिका डाली गई उस समय भी बाल गंगाधर तिलक ने इस याचिका पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था।

किसे कहा जाता है : बाल गंगाधर तिलक को
क्यों कहा जाता है : लोगों द्वारा नायक के रूप में स्वीकृत करने के लिए
विशेषता : "स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है... मैं इसे लेकर रहूँगा... जैसा नारा देकर अंग्रेजी हकूमत की नींव हिलाई/ रूढ़िवादी पक्ष के लिए प्रसिद्ध

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