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सन्यासी विद्रोह कब हुआ था?

इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि सन्यासी विद्रोह कब हुआ था? साथ ही जानेंगे सन्यासी विद्रोह के बारे में वो सभी तथ्य जो सामान्य ज्ञान की दृष्टि से आपको पता होने चाहिए।

सन्यासी विद्रोह की जड़ें वर्ष 1763 से उगनी शुरू हुई थी और इसके शुरू होने का मुख्य कारण था प्लासी और बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों की विजय। जिसके बाद अंग्रेजों द्वारा बंगाल के स्थानीय लोगों की सामाजिक व आर्थिक व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया गया। ब्रिटिशों की क्रूरता का आलम यह था कि उन्होंने बंगाल के नवाबों व स्थानीय राजाओं के सभी अधिकार छीन कर स्वयं की सत्ता स्थापित कर ली थी जिसके बाद बंगाल क्षेत्र के नवाब मात्र एक कठपुतली बनकर रह गए थे। उनके पास किसी भी प्रकार की आर्थिक व सैन्य शक्ति नहीं बची थी और वे अंग्रेजों के आदेशानुसार चलने पर विवश थे। ऐसे समय में जहां राजाओं की हालत इतनी बदतर हो चुकी थी वहीं आम लोगों का जीवन स्तर पहले से ज्यादा दयनीय हो गया था। आम लोगों में मुख्यतः किसान और मुगल सम्राज्य के पतन के बाद बेकार हो चुके सैनिक थे जो पैसे व खाद्य वस्तुओं की कमी के चलते लगातार मृत्यु को प्राप्त हो रहे थे।

ऐसी स्थिति में उनके पास केवल एक ही रास्ता बचता था और वह रास्ता था विद्रोह का रास्ता। इसलिए वर्ष 1763 में सन्यासी विद्रोह शुरू हुआ जिसकी अगुवाई सन्यासी कर रहे थे। सन्यासियों का इस विद्रोह में मुख्य तौर पर नाम इसलिए लिया जाता है क्योंकि किसान और मुग़ल सैनिक जो मुग़ल साम्राज्य के पतन के कारण बेकार हो चुके थे उन्होंने गृह त्यागकर सन्यासी की तरह जीवन बताना शुरू कर दिया था क्योंकि जहां पर राजाओं की इतनी बुरी हालत थी वहां पर आम लोगों का मांगकर खाने के लिए विवश होना तय था। एक तरफ तो लोगों को मांग कर भी जीने योग्य खाद्य वस्तुएं भी नहीं मिल पा रही थी वहीं दूसरी तरफ अपनी आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए अंग्रेज अधिक से अधिक कर वसूल रहे था और क्योंकि सन्यासी कर नहीं देते थे इसलिए अंग्रेजों के लिए ये एक बोझ के समान थे। जब सन्यासी एक समूह में चलते हैं तो अंग्रेजों को अपने प्रति हो रहे षड्यंत्र का संदेह होता था और इसी संदेह के चलते कई बार अंग्रेज-सन्यासियों का टकराव होता था। इसी टकराव के चलते वर्ष 1771 में ब्रिटिशों द्वारा एक हमला किया गया जिसमें 150 सन्यासी मारे गए और इस घटना ने सन्यासी विद्रोह की आग में घी डालने का काम किया। हालांकि आधुनिक हथियारों की कमी व सशक्त सैन्य शक्ति ना होने के कारण सन्यासी विद्रोह को अंग्रेजों द्वारा वर्ष 1800 तक क्रूरता पूर्वक कुचल दिया गया लेकिन इस विद्रोह ने बाद में होने वाले चुआड़ और संथाल जैसे विद्रोहों के लिए प्रेरणा का काम किया।

कब शुरू हुआ : 1763 (समाप्त 1800)
प्रभावित क्षेत्र : बंगाल और बिहार
अगुवाई किसने की : सन्यासियों ने
किसके खिलाफ था : ब्रिटिशों के

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