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वेद से जुड़े सामान्य ज्ञान प्रश्न | GK Question about Vedas in Hindi

वेद शब्द हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़ा शब्द माना जाता है। यदि हिंदू धर्म की शुरुआत की बात की जाए तो इसकी शुरुआत के विषय में जो सर्वप्रथम लिखित रचना हमें मिलती है वह वेद है। और इन्हीं वेदों से हमें हिंदू धर्म के प्राचीनतम धर्म होने का साक्ष्य प्राप्त होता है। ज्ञात रहे कि हिंदू धर्म; सनातन धर्म का ही आधुनिक नाम है इसलिए सनातन धर्म को हिंदू धर्म का पर्यायवाची माना जाता है। भारत का सर्वप्राचीन किसी धर्म से जुड़ा हुआ ग्रंथ "वेद" है और माना जाता है कि इन वेदों का संकलन महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास द्वारा किया गया था। वेदों में संसार को एक घर माना गया है तथा इस संसार में बसे सभी मनुष्यों व जीवों को इस परिवार का सदस्य माना गया है। भारत में कुल चार वेद है और इन चारों वेदों को संयुक्त रूप से "सहिंता" कहा जाता है। आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि वेद कौन-कौन से हैं? वेदों के नाम क्या है? वेद किसने लिखें? और वेदों की रचना कब हुई?

वेदों की रचना कब हुई?
यह प्रश्न बहुत ही जटिल है तथा इसका उत्तर दे पाना संभव नहीं है क्योंकि माना जाता है कि वेदों की रचना ईश्वर द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से बताई गई स्मृति के चलते ऋषिओं द्वारा की गई है जिसका कोई निश्चित समय नहीं है बल्कि यह समय के साथ बनते चले गए तथा बाद में एकत्र कर इन्हें सुविधानुसार चार वेदों में ढाला गया। हालांकि वैज्ञानिक आधार पर यह माना जाता है कि वेदों की जो लिखित रचनाएं हमें प्राप्त होती है वह 1000 ईसा पूर्व से पहले के समय रची गई हैं अर्थात आज से लगभग 3000 से 5000 ईसा पूर्व के मध्य वेदों की रचना हुई मानी जाती है परंतु फिर भी इस समय के बारे में सटीकता से नहीं कहा जा सकता।

वेदों को कितने भागों में बांटा गया है?
वेदों को पढ़ने व समझने के लिए इन्हें सुविधानुसार चार भागों में बांटा गया है ये भाग हैं: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। इन सब में ऋग्वेद सबसे प्राचीनतम वेद है तथा अथर्ववेद सबसे बाद में लिखा गया वेद है। ऋग्वेद में जहां ऋचाओं के क्रमबद्ध ज्ञान को संग्रहित किया गया है वहीं यजुर्वेद में सस्वर पाठ के लिए मंत्र तथा बलि देने हेतु अनुपालन के लिए नियमों का संकलन विद्यमान है। वहीं सामवेद में यज्ञ के समय गए जाने वाले मन्त्रों का संकलन है तो अथर्ववेद में मंत्र उच्चारण के साथ ही मनुष्य के विचारों तथा अंधविश्वासों के बारे में जानकारी मिलती है। इस प्रकार इन चारों भागों की अपनी-अपनी अलग विशेषता है और ये सम्मिलित रूप से एक होकर एक विशाल ज्ञान रूपी भंडार की रचना करते हैं।

सभी वेद तथा उनके बारे में जानकारी :
वेद एक समस्त जान का विशाल भंडार है तथा इन्हें समझने व पढ़ने के लिए अलग-अलग तरीकों का प्रयोग किया जाता है। यदि बात ऋग्वेद की जाए तो ऋग्वेद में हमें आर्यों के बारे में भी जानकारी मिलती है और वह व्यक्ति जो ऋग्वेद का पाठ करता है उसे "होतृ" कहा जाता है। ऋग्वेद हमें धार्मिक ज्ञान देने के साथ-साथ यह भी बताता है कि आर्यों की राजनीतिक व्यवस्था क्या थी और साथ ही उनके इतिहास के बारे में भी हमें ऋग्वेद से जानकारी प्राप्त होती है इसलिए वेदों का एक अन्य महत्त्व यह भी है कि यह हमारे लिए इतिहास के लिखित साक्ष्य के रूप में भी कार्य करते हैं। और वेदों की यह विशेषता वैज्ञानिक रूप से इनका महत्व बढ़ा देती है। यहां पर हमें यह भी जान लेना चाहिए कि ऋग्वेद में ही समाज के चार वर्णों का उल्लेख मिलता है जैसे: ब्राह्मण, क्षत्रिय वैश्य और शूद्र इन वर्णों के बारे में जानकारी हमें ऋग्वेद से ही प्राप्त होती है। ऋग्वेद में ही यह माना गया है कि ब्राह्मण की उत्पत्ति ब्रह्मा के मुख से, क्षत्रिय की उत्पत्ति ब्रह्मा की भुजाओं से, वैश्य की उत्पत्ति ब्रह्मा की जंघाओं से और शूद्र की उत्पत्ति ब्रह्मा के चरणों से हुई है। इस प्रकार यह लिखित रचना हमें मानवीय समाज में ऊँच-नीच की एतिहासिकता के बारे में जानकारी देती है।

बात यदि यजुर्वेद की की जाए तो सबसे पहले हमें यह पता होना चाहिए कि यजुर्वेद एक मात्र ऐसा वेद है जो गद्य और पद्य दोनों का संकलन है। तथा इस ग्रंथ की विशेषता है कि यह हमें उन नियमों व विधियों का ज्ञान देता है जिसमें यह बताया गया है कि मंत्रों को कैसे पढ़ा जाए, बलि देते समय किन-किन नीतियों व नियमों का पालन किया जाए, यज्ञ करते समय कौन-कौन से मंत्र दोहराए जाए इत्यादि। वह व्यक्ति जो यजुर्वेद का पाठ करता है को "अध्वर्यु" कहा जाता है।

तीसरा वेद सामवेद है और सामवेद के पाठककर्ता को "उर्दातृ" कहा जाता है। यज्ञ के समय जिन मंत्रों को गाया जाता है उनको एक अलग वेद में संकलित किया गया है और उस वेद को सामवेद कहा जाता है। सामवेद में "साम" शब्द का अर्थ ही "गान" होता है इसलिए यज्ञ करते समय गाए जाने वाले मंत्र को स्पष्ट रूप से अलग वेद में संकलित किया गया है और उस वेद को "सामवेद" कहा जाता है। सामवेद की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे भारतीय संगीत का जनक माना जाता है। क्योंकि भारत के इतिहास में संगीत की सबसे प्राचीन लिखित रचना हमें सामवेद में ही प्राप्त होती है।

सबसे बाद में रचा गया वेद अथर्ववेद है तथा इस वेद की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह वेद हमें प्राचीन समय के मनुष्यों के विचारों तथा अंधविश्वासों के बारे में जानकारी देता है। यह हमें बताता है कि प्राचीन समय में कन्याओं के जन्म को अच्छा नहीं माना जाता था हालांकि भेदभाव रहित रहकर सोचा जाए तो मनुष्य मनुष्य ही होता है चाहे वह किसी भी योनि में क्यों न जन्म ले। लेकिन अथर्ववेद में स्पष्ट कहा गया है कि कन्याओं का जन्म होना एक निंदित घटना है और यह वेद कन्याओं के जन्म की निंदा करता है। सामाजिक व्यवस्था, सामाजिक सोच, सामाजिक विचारों के साथ ही समाज में फैले अंधविश्वासों के बारे में सर्वाधिक जानकारी हमें अथर्ववेद से ही मिलती है। इसलिए जादू-टोने जैसे अंधविश्वास (जो कि आज भी समाज में कहीं ना कहीं पनप रहे हैं) के बारे में अथर्ववेद से मिली जानकारी हमें यह बताती है कि अंधविश्वास आज से नहीं बल्कि हजारों वर्षों से इंसान की बुद्धि को जकड़े हुए हैं।

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