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ओजोन परत से जुड़े सामान्य ज्ञान प्रश्न | GK Question about Ozone Layer in Hindi

पृथ्वी के चारों ओर सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी विकिरणों से पृथ्वी पर बसे जीवन को बचाने के लिए  एक सुरक्षा कवच फैला हुआ है। इस सुरक्षा कवच को हम ओजोन परत के नाम से जानते हैं। यह पृष्ठ ओजोन परत के बारे में संपूर्ण सामान्य ज्ञान उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से बनाया गया है ओजोन परत के बारे में आधार से लेकर संपूर्ण सामान्य ज्ञान प्राप्त करने के लिए इस पृष्ठ को अंत तक पढ़े।

1. ओजोन परत क्या है?
ओजोन परत पृथ्वी के क्षोभमंडल तथा समताप मंडल में फैली हुई एक प्रकार की गैस है जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरणों से हमारी रक्षा करती है क्योंकि यह पराबैंगनी विकिरण से अभिक्रिया कर उन्हें अवशोषित कर लेती है।

2. पराबैंगनी विकिरण क्या है?
पराबैंगनी विकिरण सूर्य से आने वाली वह अदृश्य विकिरण है जो पृथ्वी पर पनप रहे जीवन के लिए खतरनाक है। नग्न आँखों से हमें सूर्य से आने वाला केवल दृश्य प्रकाश ही दिखाई देता है लेकिन वास्तव में सूर्य से दृश्य प्रकाश के अतिरिक्त कुछ अदृश्य विकिरणें भी आती है और पराबैंगनी विकिरण उन्हीं में से एक है।

3. सूर्य से पराबैंगनी विकिरणों के अतिरिक्त अन्य कौन सी विकिरणें आती है?
सूर्य से पराबैंगनी विकिरणों के अतिरिक्त रेडियो, अवरक्त, गामा तथा एक्स रे विकिरणें आती हैं जो कि पराबैंगनी की तरह ही अदृश्य होती हैं।

4. पराबैंगनी विकिरणों से जीवों को क्या क्या नुकसान हो सकते हैं?
पराबैंगनी विकिरणों से चर्म रोग होते हैं जिसमें त्वचा का जलना व विभिन्न प्रकार के त्वचा से सबंधित रोग शामिल हैं। ये अदृश्य विकिरणें मानव व अन्य जीवों के उन सभी अंगों को नुकसान पहुँचा सकती हैं जो सूर्य से आने विकिरणों के सीधे संपर्क में आते हैं।

5. ओज़ोन कैसे बनती है?
हमारी पृथ्वी के चारों ओर कंबल की तरह वायुमंडल की परत बनी हुई है तथा उसी वायुमंडल में ऑक्सीजन भी विद्यमान है। ऑक्सीजन का अणु ऑक्सीजन के दो परमाणुओं से मिलकर बना होता है जिसे हम O2 के नाम से जानते हैं। जब सूर्य से पराबैंगनी विकिरणें ऑक्सीजन के अणु से टकराती हैं तो इसके दोनों परमाणुओं को विखंडित कर देती हैं। विखंडित हुए ऑक्सीजन के इस अकेले परमाणु में उच्च अभिक्रिया करने की क्षमता होती है जिस कारण यह ऑक्सीजन के अन्य अणुओं से संयोजित हो जाता है और O3 का निर्माण करता है इसी O3 को ओज़ोन कहा जाता है।

6. ओज़ोन पराबैंगनी विकिरणों से पृथ्वी की रक्षा कैसे करती है?
ओज़ोन अर्थात O3 से जब सूर्य की पराबैंगनी विकिरणें टकराती हैं तो ये विकिरणें स्वयं अवशोषित होकर ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं में से एक परमाणु को विखंडित कर देती हैं। अपनी उच्च अभिक्रिया क्षमता के चलते यह अलग हुआ परमाणु ऑक्सीजन के किन्ही अन्य दो परमाणुओं से पुनः संयोजित हो जाता है। और फिर पुनः सूर्य की पराबैंगनी विकिरणें स्वयं अवशोषित होकर ऑक्सीजन के इस परमाणु को विखंडित कर देती है और अपनी उच्च अभिक्रिया क्षमता के चलते यह परमाणु पुनः ऑक्सीजन के अन्य अणु में संयोजित हो जाता है। विखंडन और संयोजन की यह प्रक्रिया निरन्तर चलती रहती है और इस प्रक्रिया में पराबैंगनी विकिरणें निरन्तर अवशोषित होती रहती हैं तथा पृथ्वी की सतह तक नहीं पहुँच पाती।

7. ओज़ोन से सबंधित अध्ययन में (ODS) ओ डी एस की फुल फॉर्म क्या होती है?
ओज़ोन से सबंधित अध्ययन में ODS (Ozon Depleting Substance) को कहा जाता है। ओज़ोन को नष्ट करने वाले सभी पदार्थों को ओज़ोन डेप्लेटिंग सब्सटांस की श्रेणी में रखा जाता है।

8. ओज़ोन परत को नष्ट करने में कौन से पदार्थ उत्तरदायी हैं?
ओज़ोन परत के क्षय के लिए Chlorofluorocarbons (क्लोरोफ्लोरोकार्बन), Halons (हैलोन्स) तथा Carbontetrachloride (कार्बनटेट्राक्लोराइड) उत्तरदायी है। ओज़ोन उच्च अभिक्रिया करने वाला अणु होता है जिस कारण यह हाईड्रोजन, नाइट्रोजन, क्लोरीन तथा ब्रोमीन से अभिक्रिया करता है। इस अभिक्रिया में ओज़ोन अणु के तीन परमाणुओं में से एक परमाणु विखंडित हो जाता है जिसके चलते ओज़ोन का अणु ऑक्सीजन के अणुओं में परिवर्तित होता है तथा ओज़ोन परत का क्षय होता है।

9. कौन सी मानवीय क्रियाएं ओज़ोन परत क्षय के लिए उत्तरदायी हैं?
हमारे द्वारा प्रयोग किए जाने वाले रेफ्रीजिरेटर, घरेलू इंसुलेटर, रसायन के प्रयोग से बनाए गए कीटनाशक, फोम तथा खाने के पश्चात बचे फेकें गए डिब्बों को ओज़ोन डेप्लेटिंग सब्सटांस (ODS) का जनक माना जाता है। इसलिए हम उपरोक्त वस्तुओं पर रोक लगाकर या सुरक्षित तरीके से इनका प्रयोग कर ओज़ोन परत के क्षय को रोक सकते हैं।

10. ओज़ोन परत के क्षय से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं?
ओज़ोन परत का क्षय पृथ्वी पर बसे जीवन को बड़े स्तर पर नुकसान पहुँचा सकता है। इनमें ग्लोबल वार्मिंग तथा जलवायु परिवर्तन मुख्य रूप से शामिल हैं। जिसके चलते पृथ्वी पर चल रहे जीवन चक्र में असंतुलन बढ़ेगा और मनुष्यों सहित सभी जीव नकारात्मक ढंग से प्रभावित होंगे। इसलिए ओज़ोन परत के क्षय को रोकना अनिवार्य है।

11. ओज़ोन को नष्ट होने से बचाने का सबसे कारगर तरीका क्या है?
प्रभावी तरीके से ओज़ोन के क्षय को रोकने के लिए तुरंत प्रभाव से क्लोरोफ्लोरोकार्बन बनाने वाले सभी पदार्थों पर रोक लगाना इसका सबसे कारगर उपाय है। इसके अतिरिक्त प्रदूषण न फैलाकर, खाद्य पदार्थों के खाली हुए डिब्बों का सही तरीके से निपटान करके, रसायन युक्त कीट नाशकों का प्रयोग कम करके व फोम इत्यादि का प्रयोग न करके ओज़ोन के क्षय को रोका जा सकता है।

12. विश्व ओज़ोन दिवस कब मनाया जाता है?
विश्व ओज़ोन दिवस या अंतराष्ट्रीय ओज़ोन दिवस प्रत्येक वर्ष 16 सितंबर को मनाया जाता है। इस दिन ओज़ोन के क्षय व इसे बचाने के उपायों के बारे में लोगों को जागृत किया जाता है। 16 सितंबर को विश्व ओज़ोन दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा 19 दिसंबर 1994 को यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली (UNGA) द्वारा की गई थी।

13. ओज़ोन परत पृथ्वी की सतह से कितनी ऊँचाई पर विद्यमान है?
ओजोन परत का 10% भाग क्षोभमंडल में तथा 90% भाग समताप मंडल में विद्यमान है। क्षोभमंडल का क्षेत्र पृथ्वी की सतह से ऊपर की ओर 06 किलोमीटर से 17 किलोमीटर तक है जबकि समताप मंडल पृथ्वी की सतह से 50 किलोमीटर तक फैला हुआ है। 06 किलोमीटर से लेकर 50 किलोमीटर तक के इसी क्षेत्र में ओज़ोन गैस के अणु फैले हुए हैं।

14. ओज़ोन परत की मोटाई कितनी है?
ओज़ोन परत वास्तव में एक परत के रूप में न होकर क्षोभमंडल और समताप मंडल में फैली हुई है। लेकिन यदि हम इस फैली हुई ओज़ोन गैस को एक परत के रूप में एकत्रित करें तो इसकी मोटाई 03 मिलीमीटर होगी। यहां पर यह ध्यान रखने योग्य है कि पृथ्वी के कुछ स्थानों पर ओज़ोन की सघनता अधिक है और कुछ स्थानों पर कम। इसलिए 03 मिली मीटर की यह मोटाई ओज़ोन परत की औसतन मोटाई है।

15. ओज़ोन परत की मोटाई मापने की इकाई क्या है?
ओजोन परत की मोटाई मापने की इकाई "डॉबसन" है 100 डॉबसन 01 मिली मीटर के बराबर होते हैं। इसलिए यदि परीक्षा में पूछा जाए कि ओज़ोन परत की मोटाई कितनी है तो इसका उत्तर होगा 300 डॉबसन। ज्ञात रहे 300 डॉबसन 03 मिली मीटर के बराबर होता है।

16. ओजोन परत की मोटाई मापने की इकाई डॉबसन का नाम किसके नाम पर रखा गया है?
ओज़ोन परत की मोटाई मापने की इकाई डॉबसन का नाम ओज़ोन के गुणों का विस्तार अध्ययन करने वाले ब्रिटिश वैज्ञानिक Gordon Miller Bourne Dobson (गॉर्डन मिलर बॉर्न डॉबसन) के नाम पर रखा गया है।

17. ओज़ोन परत की खोज कब व किसने की थी?
ओजोन परत की खोज वर्ष 1913 में फ्रांस के दो भौतिकविदों "फैबरी चार्ल्स" और "हेनरी बुसोन" ने की थी।

18. ओज़ोन गैस का रंग कैसा होता है?
ओज़ोन गैस का रंग "नीला" होता है।

19. क्या ओज़ोन एक गंधहीन (Odorless) गैस है?
नहीं... ओज़ोन गंधहीन गैस नही है। ओज़ोन में एक विशेष प्रकार की तीव्र गंध होती है जिस कारण इसकी मौजूदगी को आसानी से पहचाना जा सकता है।

20. हमारे वायुमंडल में विद्यमान ओज़ोन गैस को कितने भागों में बांटा गया है?
दो भागों में... गुड ओज़ोन तथा बैड ओज़ोन

21. गुड ओज़ोन किसे कहा जाता है?
गुड ओज़ोन पृथ्वी के समताप मंडल में पाई जाती है तथा यह गैस प्राकृतिक तरीके से सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरणों से अभिक्रिया करके बनती है।

22. बैड ओज़ोन किसे कहा जाता है?
बैड ओज़ोन पृथ्वी के क्षोभमंडल में पाई जाती है जो कि पृथ्वी की सतह से 06 से 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक विद्यमान है। क्षोभमंडल में फैली ओज़ोन गैस मानवीय क्रियाकलापों की वजह से वायुमंडल में फैले रसायनों से अभिक्रिया करके बनती है।

23. पृथ्वी के चारों ओर ओज़ोन परत का निर्माण कब हुआ था?
ओज़ोन का निर्माण आज से दो अरब वर्ष पहले उस समय हुआ था जब नीले-हरे शैवाल नामक प्रारंभिक जलीय जीवों ने पानी और कार्बन डाईऑक्साइड के अणुओं को सूर्य की ऊर्जा का प्रयोग कर अन्य कार्बनिक योगिक व आणविक ऑक्सीजन में बदलना शुरू किया था।

24. किस महाद्वीप के ऊपर ओज़ोन परत में एक बड़ा छिद्र हो गया है?
अंटार्कटिका पर

25. अंटार्कटिका किस ध्रुव पर स्थित है?
दक्षिणी ध्रुव पर

26. ओज़ोन में हुए छिद्र की खोज किस वर्ष की गई थी?
वर्ष 1985 में

27. ओज़ोन में हुए छिद्र की खोज किसने की थी?
जोसफ फरमन (Joesph Farman) ने

28. किसी क्षेत्र के ऊपर ओज़ोन परत की मौजूदगी कैसे मापी जाती है?
पृथ्वी की सतह तक पहुँचने वाली पराबैंगनी विकिरणों (Ultraviolet Rays) की मात्रा को मापकर उस क्षेत्र के ऊपर ओज़ोन परत की उपस्थिति व मात्रा का पता लगाया जा सकता है।

29. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल क्या है?
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल एक सन्धि है जो ओज़ोन परत को नष्ट करने वाले पदार्थों के उत्सर्जन को रोकने के लिए दुनिया के सभी देशों के मध्य हुई है।

30. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल सन्धि कब लागू की गई थी?
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर 16 सितंबर 1987 से होने शुरू हुए थे और यह सन्धि 01 जनवरी 1989 को लागू की गई थी।

31. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल सन्धि कहाँ हुई थी?
मॉन्ट्रियल, कैनेडा में (कैनेडा में स्थित मॉन्ट्रियल स्थान के नाम पर इस सन्धि का नाम मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पड़ा है)

32. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के लागू होने के बाद से अब ओजोन में हुए छिद्र पर क्या प्रभाव पड़ा है?
यह छिद्र धीरे-धीरे छोटा होना शुरू हो गया है।

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