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श्रीलंका की राजधानी क्या है | Srilanka Capital in Hindi

जब श्रीलंका की राजधानी की बात आती है तो यह सरल सा दिखाई देने वाला प्रश्न एक सीधा व स्पष्ट उत्तर नही दे पाता। क्योंकि श्रींलका उन कुछ देशों में से एक है जिनकी दो राजधानियां हैं। श्रीलंका ने अपने दो शहरों को राजधानी का दर्जा दिया हुआ है। श्रीलंका की पहली राजधानी है "कोलंबो" जिसे अंग्रेजी में "Colombo" लिखा जाता है और दूसरी राजधानी है "श्रीजयवर्धनपुरा कोटे" जिसे अंग्रेजी में "Sri Jayawardenepura Kotte" लिखा जाता है। लेकिन प्रश्न यहाँ पर यह उठता है कि आखिर श्रीलंका की दो राजधानियां क्यों हैं? जबकि बड़े से बड़े देश एक राजधानी से अपनी राजनीतिक व व्यापारिक व्यवस्था आसानी से व सफलतापूर्वक चला रहे हैं। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों श्रीलंका जैसे छोटे से देश की दो राजधानियां हैं।

बात यदि श्रीजयवर्धनापुरा कोटे की की जाए तो श्रीजयवर्धनापुरा कोटे का राजधानी के रूप में इतिहास बहुत पुराना है। 14 शताब्दी में जब श्रीलंका में "सिंहली साम्राज्य" का शासन था उस समय श्रीजयवर्धनापुरा कोटे को देश की राजधानी होने का दर्जा प्राप्त था और यह दर्जा लगभग 200 वर्षों तक इस शहर के साथ रहा। उसके बाद 16 शताब्दी में पुर्तगालियों का श्रीलंका में आगमन हुआ तथा उन्होंने श्रीजयवर्धनापुरा कोटे पर अपना अधिकार कर लिया। परन्तु अधिकार करने के बाद भी पुर्तगालियों पर सिंहली साम्राज्य की तरफ से लगातार आक्रमण हो रहे थे जिस कारण पुर्तगाली अपने व्यापार पर ठीक से ध्यान केंद्रित नही कर पा रहे थे। फलस्वरूप पुर्तगालियों ने अपनी राजधानी श्रीजयवर्धनापुरा कोटे से बदलकर कोलंबो कर ली। क्योंकि ऐतिहासिक रूप से कोलंबो का व्यापारिक क्षेत्र में काफी दबदबा रहा था। पुर्तगालियों के बाद जब वर्ष 1796 में श्रीलंका पर ब्रिटिशों का अधिपत्य स्थापित हुआ तो उन्होंने भी 1815 में कोलंबो को अपनी राजधानी के रूप में बरकरार रखा। ब्रिटिशों का राज वर्ष 1948 में समाप्त हुआ और श्रीलंका आजाद हुआ तथा आजाद श्रीलंका ने भी कोलंबो को ही अपनी स्वतंत्र राजधानी घोषित किया।

यहाँ ध्यान देने योग्य है कि कोलंबो का व्यापारिक इतिहास 2000 वर्ष पुराना है और क्योंकि कोलंबो श्रीलंका जैसे द्वीप के पश्चिमी छोर पर स्थित है इसलिए समुंदर के रास्ते व्यापार करने के लिए कोलंबो को अपना मुख्य केंद्र बनाना सभी व्यापारियों को भाता है। इसके अलावा जनसंख्या की दृष्टि से कोलंबो श्रीलंका का सबसे बड़ा शहर है व बड़ी तेजी से शहरी क्षेत्र में तब्दील होता जा रहा है इसलिए व्यापारिक विकास के लिए यह उत्तम स्थान माना जाता है। यही कारण है कि श्रीलंका पर शासन करने वालों ने कोलंबो को सदैव एक राजधानी के रूप में जगह दी गई।

पुर्तगालियों के समय से लेकर वर्ष 1978 तक कोलंबो ही अकेला शहर था जिसे श्रीलंका की राजधानी का दर्जा प्राप्त था लेकिन वर्ष 1978 में श्रीलंकाई सरकार ने अपनी राजधानी बदलने की घोषणा की और उस समय के तत्कालीन राष्ट्रपति जे. आर. जयावर्धने ने श्रीजयवर्धनापुरा कोटे को श्रीलंका की राजधानी घोषित किया और वर्ष 1982 में इस शहर के नवनिर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई। श्रीजयवर्धनापुरा कोटे एक सुनियोजित शहर है जिसे इस तरीके से बनाया गया है कि यहाँ पर ट्रैफिक या जनसंख्या वृद्धि के कारण होने वाली समस्याएं उतपन्न न हो सकें। इस शहर को सुनियोजित तरीके से इसलिए बसाया गया है क्योंकि कोलंबो में ट्रैफिक व जनसंख्या से संबंधित समस्याएं बार-बार उत्पन्न हो रही थी। लेकिन ऐसा नही है कि श्रीजयवर्धनापुरा कोटे के राजधानी बनने के पश्चात श्रीलंका के लिए कोलंबो का महत्व कम हो गया बल्कि श्रीलंका ने दोनों शहरों को राजधानी के रूप में स्वीकार किया।

मौजूदा समय में श्रीजयवर्धनापुरा कोटे श्रीलंका की प्रशासनिक राजधानी है तथा कोलंबो श्रीलंका की व्यापारिक राजधानी है। दोनों शहरों का अपने स्तर पे श्रीलंका की राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए श्रीलंका इन दोनों शहरों को राजधानी के रूप में दर्जा देने हेतु प्रतिबद्ध है।
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