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PSLV Full Form in Hindi | पी. एस. एल. वी. का पूरा नाम क्या है?

यदि आपने कभी अंतरिक्ष में ध्यान दिया हो तो रात के समय आपको कुछ तारों जैसी वस्तु बड़ी ही तेजी से चलती हुई नजर अवश्य आई होगी। देखने में आपको यह किसी तारे जैसीे प्रतीत होती है लेकिन वास्तव में ये कृत्रिम उपग्रह होते हैं जिन्हें विभिन्न देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाता है। ये कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के चक्कर लगाते हैं तथा महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्रित करते हैं जैसे कि मौसम की जानकारी या किसी क्षेत्र विशेष के बारे में भौगोलिक जानकारी इत्यादि। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन कृत्रिम उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा कैसे जाता है? इन्हें भेजने के लिए किस तकनीक का प्रयोग किया जाता है? यदि नही तो आज का यह आर्टिकल आपके लिए है। इस आर्टिकल में आपको उस तकनीकी रॉकेट के बारे में बताया जाएगा जिसके जरिए सैंकड़ो उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे जा चुके हैं और जिसे भारत द्वारा ईजाद किया गया है। इस रॉकेट का नाम है PSLV... आइए जानते हैं PSLV की फुल फॉर्म क्या होती है और साथ ही जानेंगें कि यह कैसे कृत्रिम उपग्रहों को पृथ्वी, चन्द्रमा व मंगल ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर पाने में सफल हुआ है।

PSLV की फुल फॉर्म होती है Polar Satellite Launch Vehicle इसे हिंदी में "पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल" लिखा जाता है और इसका हिंदी में अर्थ होता है "ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन वाहन"। यह एक प्रकार का रॉकेट होता है जिसका प्रयोग कृत्रिम उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुँचाने के लिए किया जाता है।

कृत्रिम उपग्रहों को अंतरिक्ष में ऐसे सीधा नही भेजा जा सकता क्योंकि पृथ्वी के वातावरण से बाहर निकलने व पृथ्वी की कक्षा में स्थापित होने के लिए इन्हें पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल से लड़ना पड़ता है इसलिए इन्हें एक रॉकेट के अंदर रख कर भेजा जाता है इस रॉकेट को सैटेलाइट लांच व्हीकल कहा जाता है क्योंकि ये रॉकेट उपग्रहों के लिए एक व्हीकल का काम करती हैं। PSLV इसी तरह का सैटेलाइट लांच व्हीकल है जो ध्रुवीय कक्षा में कृत्रिम उपग्रहों को स्थापित करता है। PSLV ऊपर जाते समय चार चरणों से होते हुए टूटकर पृथ्वी पर गिर जाता है जबकि इसके अंदर का उपग्रह इससे अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाने लग जाता है। प्रत्येक कृत्रिम उपग्रह का कुछ जीवनकाल होता है तथा अपना जीवनकाल पूरा करने के पश्चात वह उपग्रह काम करना बंद कर देता है व मलबे के रूप में अंतरिक्ष घूमने लग जाता है। कुछ कृत्रिम उपग्रह ऐसे भी होते हैं जो अपना जीवनकाल पूरा करने के पश्चात पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश होकर नष्ट हो जाते हैं।

PSLV सस्ते दामों पर उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर पाने में सक्षम है जिसके चलते बहुत से देश अपने उपग्रहों को PSLV की मदद से अंतरिक्ष में भेजते हैं। इसके लिए भारत उन देशों को पैसा चार्ज करता है अर्थात PSLV के रूप में भारत के पास विदेशी पैसा कमाने का अच्छा विकल्प मौजूद है। आज तक PSLV सैंकड़ो उपग्रहों को सफलता पूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर चुका है जबकि केवल एक बार ऐसा हुआ है कि इसका प्रक्षेपण असफल हुआ। इसलिए अंतराष्ट्रीय बाजार में PSLV एक सस्ता व विश्वनीय सैटेलाइट लांच व्हीकल बन कर उभरा है। PSLV की क्षमता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि भारत द्वारा भेजे गए चंद्रयान और मंगलयान जैसे बड़े अंतरिक्ष मिशन PSLV के जरिए ही भेजे गए थे।

PSLV का निर्माण भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो (ISRO) द्वारा किया गया है। इसरो फुल फॉर्म होती है "इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन" PSLV रॉकेट 44 मीटर ऊँचा व 2.8 मीटर व्यास वाला होता है तथा इसके ऊपरी सिरे में उपग्रहों की तैनाती की जाती है। भारत की इसरो (जिसने PSLV का निर्माण किया है) एक साथ 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर विश्व रिकॉर्ड बना चुकी है।

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