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भारत की जीडीपी में कृषि का योगदान कितना है?

भारत की जीडीपी अर्थात सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product) भारत के सभी क्षेत्रों में पैदा होने वाले उत्पादन व सेवाओं को मिश्रित कर निकाला जाने वाला बाजारी मूल्य (मार्किट वैल्यू) है। अर्थात जितना भी हमारे देश में उत्पादन होता है और जितनी भी सेवाएं हमारे देश में दी जाती हैं इन सब के लिए जो मूल्य अदा करना पड़ता है यदि उस मूल्य को जोड़कर एक संख्या निकाली जाए तो वह संख्या हमारी जीडीपी कहलाती है जो कि तिमाही भी हो सकती है और वार्षिक भी। GDP की इस संख्या में विभिन्न क्षेत्रों से भिन्न भिन्न प्रकार का योगदान प्राप्त होता है और इस योगदान का प्रतिशत क्षेत्र के अनुरूप अलग अलग होता है कोई क्षेत्र भारत की जीडीपी में अधिक योगदान देता है तो कोई क्षेत्र भारत की जीडीपी में कम योगदान देता है। इस योगदान को स्टडी कर यह तय किया जाता है कि भारत की जनसंख्या में से कितने प्रतिशत लोगों को किस क्षेत्र में अधिक कार्य करना चाहिए और किस क्षेत्र में कम कार्य करना चाहिए। क्योंकि यदि किसी क्षेत्र विशेष में अधिक लोग कार्यरत है लेकिन क्षेत्र देश की GDP में कम योगदान दे रहा है तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था को हानि पहुंचती है। क्योंकि जहां पर कोई कार्य है एक व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है यदि वहां पर पांच व्यक्ति लगाए जाए तो यह एक प्रकार का आर्थिक नुकसान होगा और इससे भारत में रहने वाले नागरिकों का जीवन स्तर भी कम होगा।


भारत को कृषि प्रधान देश माना जाता है इसलिए भारत की जीडीपी में कृषि कितना योगदान दे रही है इस पर सबकी पैनी नजर रहती है और यह सदैव रूची का विषय रहता है। बात यदि आज से 70 वर्ष पहले देश की आजादी की समय की की जाए तो उस समय वर्ष 1951 में भारत की जीडीपी में कृषि का योगदान 51% था अर्थात उस समय भारत में प्रत्येक 100 में से 51 रुपए कृषि क्षेत्र से आते थे। लेकिन समय के साथ-साथ भारत के लोगों ने अन्य क्षेत्रों में जाना शुरू किया। जब भारत में औद्योगिक क्रांति आई तो इसने लोगों को बड़े स्तर पर उद्योगों की तरफ आकर्षित किया। आज जो लोग आपको नौकरी करते हुए दिखाई देते हैं वे औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत हैं और औद्योगिक क्षेत्र में कार्य कर अपनी आजीविका चलाते हैं। वे लोग जो कार्य करते हैं उसका योगदान औद्योगिक क्षेत्र की जीडीपी में जोड़ा जाता है।

इसी प्रकार अन्य सेवाएं हैं जो भारत में चलती हैं जैसे यदि आप एक ऑटो चलाते हैं और यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते हैं और फिर उनसे कुछ पैसा (किराया) वसूल करते हैं तो यह पैसा आप की सेवा के लिए होता है। सेवा में कुछ उत्पादन नहीं होता लेकिन सेवाओं का अपना अलग मूल्य होता है इसलिए जो किराया यात्रियों से वसूला जाता है (उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर छोड़ने के बाद) वह किराया सेवा क्षेत्र की जीडीपी में जोड़ा जाता है। इस प्रकार पूरे भारत में चल रहे वाहनों से जो भी किराया एकत्रित होता है उसे सेवाओं से प्राप्त जीडीपी का योगदान माना जाता है।
औद्योगिक क्षेत्र और सेवा क्षेत्र सबसे अहम है मौजूदा समय में सेवा क्षेत्र भारत की जीडीपी में सर्वाधिक योगदान दे रहा है। भारत की जीडीपी में सेवा क्षेत्र 54 फीसदी का योगदान देता है इसके बाद औद्योगिक क्षेत्र का नाम आता है जो भारत की जीडीपी में 31% का योगदान देता है। यहां पर ध्यान देने योग्य है कि कृषि जिसे भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है का जीडीपी योगदान इन दोनों से क्षेत्रों से पिछड़ कर मात्र 17% रह गया है। भारत की जीडीपी में कृषि का योगदान मात्र 17% है जो कि वर्ष 1951 में 51% था। यह एक चिंता का विषय है क्योंकि कृषि भारतीय जीडीपी में मात्र 17% का योगदान देती है जबकि भारत की 53% जनसंख्या कृषि से संबंधित कार्यों में लिप्त है। अर्थात भारत के 100 में से 53 व्यक्ति कृषि से सबंधित कार्यों से जुड़े हुए हैं जबकि भारत द्वारा कमाए जाने वाले 100 में से केवल 17 रुपए का योगदान कृषि क्षेत्र से प्राप्त होता है। यही कारण है कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था में सहज योगदान नहीं दे पा रही है। अर्थशास्त्रियों द्वारा समय-समय पर इस विषय पर मंथन किया जाता है और उपाय निकाले जाते हैं कि किस तरह से कृषि में लोगों के योगदान कम किया जाए और कृषि का भारत की जीडीपी में योगदान बढ़ाया जाए।
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