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GDP Full Form in Hindi | जीडीपी का पूरा नाम क्या है?

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था उस देश की उन्नति का सूचक होती है। आर्थिक रूप से कोई देश कितना समृद्ध है यही उस देश की शक्ति का पैमाना माना जाता है। यदि कोई देश आर्थिक रूप से समृद्ध है तो वह अन्य देशों से अपनी रक्षा करने के लिए हथियार भी खरीद सकता है और किसी भी प्रकार की कोई सुख सुविधा जो वह अपने नागरिकों को देना चाहता है उसे भी वह अपनी आर्थिक स्थिति की बदौलत दूसरे देशों से खरीद सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी देश के पास खाद्य भंडारों की कमी है तो वह इसे दूसरे देशों से आयात करवा कर अपने देश में इन पदार्थों की पूर्ति कर सकता है और अपने देश के नागरिकों को एक अच्छा जीवन दे सकता है। अब यहां पर प्रश्न है आता है कि किस देश की अर्थव्यवस्था कैसी है यह पता कैसे लगाया जाए क्योंकि कोई भी देश बहुत बड़ा होता है और उसकी अर्थव्यवस्था का बाजार मूल्य में ज्ञात करना इतना सरल नहीं होता इसलिए किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति का पता लगाने के लिए एक फार्मूला तैयार किया गया है जिसके द्वारा उस देश में बीते वर्ष में हुए कुल उत्पादन व उस देश में दी जाने वाली कुल सेवाओं को एकत्रित कर उनका मार्केट मूल्य निकाला जाता है और उस मार्केट मूल्य के आधार पर अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्था को एक संख्या दी जाती है और इसी संख्या को जीडीपी कहा जाता है। आज इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि जीडीपी क्या होती है और इसे कैसे कैलकुलेट किया जाता है। साथ ही जानेंगे कि जीडीपी किस प्रकार किसी देश की अर्थव्यवस्था का आईना बनती है।


जीडीपी जिसे हिंदी में सकल घरेलू उत्पाद कहा जाता है की फुल फॉर्म होती है Gross Domestic Product यहाँ पर Gross शब्द का अर्थ होता है कुल (Total) और Domestic का अर्थ होता है घरेलू। तथा प्रोडक्ट में आती है वह वस्तुएं जिनका उत्पादन किया गया है और वह सेवाएं जो देश की सीमाओं के अंदर दी गई हैं। इस प्रकार ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट का सामूहिक अर्थ निकलता है "किसी एक देश की सीमाओं के भीतर किसी विशेष समय अवधि में जिन वस्तुओं का उत्पादन हुआ है और जो सेवाएं दी गई हैं उनका कुल जोड़" जब हम देश में हुए कुल उत्पादन और कुल सेवाओं का मार्केट मूल्य निकाल कर उसे जोड़ देते हैं तो यह उस समय अवधि की जीडीपी निकल आती है। किसी भी देश की जीडीपी मुख्य रूप से या तो 3 महीने बाद निकाली जाती है या फिर 01 वर्ष बाद। कोई भी देश किस प्रकार और किस तेजी से उन्नति कर रहा है इसका अनुमान जीडीपी के आधार पर लगाया जाता है मान लीजिए यदि किसी देश की जीडीपी में वर्ष 2010 और 2011 के बीच 7 फ़ीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की जाती है तो इसका अर्थ होगा कि देश 7 फ़ीसदी की दर से उन्नति कर रहा है।

जीडीपी किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का चेहरा होता है इसीलिए जब किसी देश की जीडीपी की संख्या लोगों के सामने रखी जाती है तो इसके आधार पर लोग (विशेषतः व्यापारी) यह तय करते हैं कि वे देश में अपना पैसा लगाएंगे या नही। क्योंकि यदि किसी देश की जीडीपी अच्छी है और वह समय के साथ साथ तेज गति से उन्नति भी कर रहा है तो व्यापारियों को लगता है कि उस देश में पैसा निवेश करना सुरक्षित है और वे कम निवेश कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं इसलिए व्यापारी पैसा निवेश करने से कतराते नही। इस प्रकार जीडीपी को अर्थव्यवस्था के आईने की तरह देखा जाता है और जीडीपी के आधार पर ही किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का सटीक व सीधा आकलन किया जाता है। वहीं यदि किसी देश की जीडीपी कम होती है तो उस देश कोे अलग से प्रयास करना पड़ता है कि वह निवेशको को सुरक्षित महसूस करवाए ताकि वे निवेश करने हेतु तैयार हो सकें। क्योंकि जिस देश की जीडीपी अच्छी होती है वहां पर निवेशक अपने आप आते हैं जबकि जिस देश की जीडीपी बेहतर नहीं होती उस देश में निवेशक निवेश करने से कतराते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें विशेष सुविधाएं मुहैया करवाई जाती है ताकि वे कम जीडीपी वाले देश में निवेश करें और देश की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने हेतु सरकार की सहायता करें।

किसी भी देश की वार्षिक जीडीपी निकलने के लिए उस देश में बीते वर्ष जितना उत्पादन हुआ है और जितनी सेवाएं दी गई हैं उनकी मार्केट वैल्यू तय की जाती है और फिर उन सभी उत्पादन व सेवाओं की वैल्यू को जोड़ दिया जाता है जोड़ने के बाद जो संख्या हमारे पास आती है उस संख्या को हम जीडीपी कहते हैं। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए किसी देश में बीते वर्ष कुल 100 मोबाइल फोन बने हैं और एक मोबाइल फोन की कीमत 100 रुपए है; तो मान लिया जाएगा कि उस देश की जीडीपी 100x100=10,000 रुपए है। और इस ₹10000 की जीडीपी के आधार पर ही अन्य देशों के साथ तुलना कर उस देश की आर्थिक व्यवस्था का अंदाजा लगाया जाएगा जीडीपी किसी भी देश को दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले एक स्तर प्रदान करती है यदि जीडीपी अच्छी है तो देश उच्च स्तर पर होता है और यदि जीडीपी बेहतर नहीं होती तो देश निम्न स्तर पर होता है जिसका सीधा असर निवेशकों पर पड़ता है यदि निवेशक किसी देश में निवेश करने से डरते हैं तो उस देश में बाहर से पैसा आना बंद हो जाता है या कम हो जाता है जिस कारण वहां की अर्थव्यवस्था को और अधिक क्षति पहुंचती है इस प्रकार किसी भी देश की जीडीपी उस देश की अर्थव्यवस्था और विकास पर बड़ा असर डालती है।
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