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TESS Full Form in Hindi टेस का पूरा नाम क्या है

TESS अमेरिकी अंतरिक्ष खोजकर्ता कंपनी नासा द्वारा अंतरिक्ष से में भेजा गया एक स्पेस टेलीस्कोप है जिसके जरिए नासा हमारे सौरमंडल से बाहर अन्य तारों के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने वाले ग्रहों की खोज कर रहा है। इन ग्रहों को एक्सोप्लैनेट कहा जाता है। इन ग्रहों की खोज के लिए नासा ने TESS स्पेस टेलीस्कोप को वर्ष 2018 में लांच किया था और इसने हमारे सौरमण्डल के बाहर स्थित ग्रहों को ढूंढने का अपना सफर आरंभ कर दिया है। TESS के बारे में जानने योग्य विशेष बात यह है कि यह नासा के पूर्व मिशन केप्लर से 400 गुना अधिक अंतरिक्ष क्षेत्र में ग्रहों (एक्सोप्लेनेट) की खोज कर डेटा उपलब्ध करवाएगा। तो चलिए जानते हैं इस अंतरिक्ष मिशन के बारे में पूरी जानकारी और साथ ही इसकी फुल फॉर्म और इस मिशन से संबंधित सभी सामान्य ज्ञान प्रश्न जो परीक्षाओं के लिहाज से हमारे लिए जानने अति आवश्यक हैं:

TESS की फुल फॉर्म होती है Transiting Exoplanet Survey Satellite
(ट्रांजिटिंग एक्सोप्लेनेट सर्वे सेटेलाईट) इस स्पेस टेलिस्कोप का नाम इसके प्रक्षेपण के साथ ही मुख्य खबरों में आ गया था जिस कारण इसकी फुल फॉर्म के बारे में परीक्षा में प्रश्न पूछे जाने के आसार बने रहते हैं।

TESS को कब लांच किया गया था?
टेस को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी "नासा" द्वारा 18 अप्रैल 2018 को लॉन्च किया गया था तथा इसके लिए एक प्राइवेट स्पेस एजेंसी "स्पेसएक्स" के साथ नासा ने कॉन्ट्रैक्ट किया था।

TESS को कहाँ से लांच किया गया था?
TESS स्कोर केप कैनवरल एयर फोर्स स्टेशन, फ्लोरिडा से प्रक्षेपित किया गया था और इसके लिए SpaceX Falcon 9 Rocket का इस्तेमाल किया गया था। जो कि Space Launch Complex 40 से लांच की गई। टेस को पृथ्वी के 13.7 ऑर्बिट में स्थापित किया गया है।

TESS का मिशन क्या है?
इसका मिशन ऐसे एक्सोप्लेनेट की खोज करना है जिन पर पृथ्वी जैसा जीवन संभव हो सके यानी कि वे अपने तारे से उतनी ही दूर हो जितनी दूर पृथ्वी सूर्य से है। जिस कारण यदि वे हैबिचुअल जोन में आए तो उन पर हमें परग्रही जीवन के कुछ संकेत मिल सके। इसके लिए टेस आने वाले 2 वर्ष तक 20,000 सबसे चमकीले तारों पर लगातार अपनी नजर बनाए रखेगा तथा उनसे आने वाले प्रकाश में बदलाव को माप कर यह पता लगाएगा कि उस तारे के आसपास कितने ग्रह मौजूद हैं और कौन सा ग्रह कितना बड़ा है व अपने तारे से कितनी दूर है। ग्रहों की खोज को इस तकनीक को "ट्रांजिट तकनीक" कहा जाता है और इस तकनीक के नाम पर ही टेस स्पेस टेलिस्कोप का नाम पड़ा है। इस मिशन की खोज के आधार पर वैज्ञानिक आगे की खोज करेंगे और जब उन्हें लगेगा कि कोई ऐसा ग्रह मिल चुका है जो पृथ्वी की भौतिक परिस्थियों से सर्वाधिक मेल खाता है तथा उस पर जीवन की संभावनाएं अधिक हैं तो वे उस ग्रह पर अपना ध्यान केंद्रित कर परग्रही जीवन खोजने की कोशिश करेंगे।

TESS किस प्रकार अपना मिशन पूरा करेगा?
टेस 2 वर्ष में अपना मिशन पूरा करेगा। इन दो वर्षों में यह स्पेस टेलिस्कोप 20 हजार तारों के चारों ओर घूमने वाले एक्सोप्लेनेट की खोज करेगा। इसके लिए TESS को अंतरिक्ष में 26 सेक्शन बना कर दिए गए हैं तथा यह पहले वर्ष में पहले 13 सेक्शन को कवर करेगा और उसके बाद दूसरे वर्ष में बचे हुए 13 सेक्शन को। इस प्रकार 2 वर्षों में यह पूरे अंतरिक्ष को 26 सेक्शंस में पूरा करेगा। जिसके तहत 20 हजार तारे आते हैं। प्रथम वर्ष में TESS उत्तर दिशा की ओर अपनी नजर बनाए रखेगा तथा द्वितीय वर्ष में दक्षिण दिशा की ओर चमक रहे तारों पर के प्रकाश की गणना करेगा। और जिन ग्रह पर जीवन की संभावनाएं अधिक होगी उनकी वैज्ञानिकों द्वारा एक अलग सूची बनाई जाएगी।

TESS मिशन किसके द्वारा ऑपरेट किया जा रहा है?
टेस मिशन को Massachusetts Institute of Technology (MIT) द्वारा ऑपरेट किया जा रहा है तथा इसकी मैनेजमेंट NASA के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर (ग्रीनबेल्ट, मेरीलैंड) द्वारा की जा रही है।

एक्सोप्लेनेट से क्या तात्पर्य है?
जिस प्रकार सूर्य एक तारा है तथा इसके आसपास आठ ग्रह चक्कर काट रहे हैं और उन्हीं में से एक ग्रह पृथ्वी है। इसी प्रकार पूरे ब्रह्मांड में अरबों-खरबों तारे हैं तथा हमारी गैलेक्सी में भी अरबों की संख्या में तारे विद्यमान हैं। इन तारों का चक्र काट रहे हैं ग्रहों को एक्सोप्लेनेट कहा जाता है।

हमें कैसे पता चलेगा कि खोजे हुए ग्रह पर जीवन संभव है?
इसका पता वैज्ञानिक उस ग्रह की अपने तारे से दूरी तथा उस ग्रह के आकार की गणना करके लगाते हैं। यदि वह ग्रह अपने तारे से उतनी ही दूरी पर स्थित है जितनी दूर पृथ्वी सूर्य से है तोे माना जा सकता है कि उस ग्रह पर पानी की मात्रा मौजूद हो सकती है और क्योंकि पानी जीवन की मूल इकाई है तो हम अंदाजा लगा सकते हैं कि उस ग्रह पर जीवन संभव हो। और इसी आधार पर वैज्ञानिक आगे की रिसर्च करते हैं।

क्या अभी तक TESS को कोई सफलता हाथ लगी है?
जी हाँ... टेस ने सितंबर 2018 में अपनी पहली खोज के चलते दो ग्रहों की खोज की है और इन ग्रहों को वैज्ञानिकों ने सुपर अर्थ (Super Earth) और हॉट अर्थ (Hot Earth) के अंतर्गत रखा है।

सुपर अर्थ ग्रह क्या होता है?
सुपर अर्थ ग्रह उस ग्रह को कहा जाता है जिसका आकार पृथ्वी से बड़ा हो लेकिन यूरेनस और नेपच्यून से छोटा हो। टेस द्वारा हाल ही में खोजे गए 2 ग्रहों में से एक ग्रह सुपर अर्थ की कैटेगरी में आता है जिसका नाम है Pi Mensae c और यह ग्रह हमसे 60 प्रकाश वर्ष दूर है तथा मात्र 6.3 दिनों में अपने तारे का एक चक्कर पूरा करता है।

हॉट अर्थ ग्रह क्या होता है?
हॉट अर्थ उस ग्रह को कहा जाता है जिसका तापमान पृथ्वी से कहीं अधिक हो। टेस द्वारा खोजे गए इन दो ग्रह में से एक ग्रह हॉट अर्थ है जो हमसे 49 प्रकाश वर्ष दूर है इस ग्रह का नाम है LHS3844 b है और यह मात्र 11 घंटे में अपने तारे एक चक्र पूरा कर लेता है।

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